दिल्ली-NCR में H1N1 वायरस के मामले अचानक बढ़े, कई डॉक्टर्स संक्रमित; 1 दिन में सैकड़ों संक्रमित बड़े

Aug 21, 2026 - 19:17
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दिल्ली-NCR में H1N1 वायरस के मामले अचानक बढ़े, कई डॉक्टर्स संक्रमित; 1 दिन में सैकड़ों संक्रमित बड़े

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H1N1 cases in Delhi-NCR: बदलते मौसम और उमस के बीच दिल्ली-एनसीआर में H1N1 यानी स्वाइन फ्लू के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक दिल्ली में एक दिन के भीतर 114 नए केस सामने आए हैं। अकेले दिल्ली में 1700 से अधिक मामले दर्ज हुए हैं। राजधानी के एक सरकारी अस्पताल में कुछ डॉक्टरों समेत कई लोग भी स्वाइन फ्लू से संक्रमित पाए गए हैं। दिल्ली में H1N1 के मामलों की संख्या 1700 का आंकड़ा पार कर गई है। स्वाइन फ्लू से संक्रमण का यह मामला पिछले साल 229 केसों की तुलना में छह गुना से अधिक है।दिल्ली के सरकारी अस्पताल में कई डॉक्टर्स की रिपोर्ट भी पॉजिटिव आई है। कुछ मरीजों में ऑक्सीजन का स्तर भी कम हुआ है। इससे गंभीर सांस संबंधी संक्रमण की चिंता बढ़ गई है। उमस और बदलते मौसम के बीच लोगों में सांस संबंधी इंफेक्शन का भी खतरा बढ़ रहा है। रिपोर्ट के मुताबिक, 20 अगस्त को इन्फ्लूएंजा के 159 नए मामले दर्ज किए गए हैं, जिनमें से 114 H1N1 के थे। इसके साथ ही दिल्ली में अब तक H1N1 के कुल मामलों की संख्या 1777 हो गई है। मामलों में वृद्धि के चलते केंद्र सरकार ने स्थिति की समीक्षा शुरू कर दी है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने दिल्ली के स्वास्थ्य मंत्री और वरिष्ठ स्वास्थ्य अधिकारियों के साथ बैठक बुलाई है। H1N1 में अचानक तेज बुखार, सूखी खांसी, शरीर में दर्द, सिरदर्द, गले में खराश, ठंड लगना और थकान हो सकती है। कुछ मामलों में सांस लेने में परेशानी और ऑक्सीजन का स्तर कम हो सकता है। अगर सांस लेने में परेशानी, सीने में दर्द, लगातार तेज बुखार, भ्रम, होंठ नीले पड़ना या लक्षण बिगड़ना जैसे संकेत दिखें तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए। इसमें बुजुर्ग, छोटे बच्चे और गर्भवती महिलाएं ज्यादा सावधानी बरतें। डायबिटीज, दिल या फेफड़ों की बीमारी और कमजोर इम्युनिटी वाले लोगों में भी गंभीर संक्रमण का खतरा अधिक हो सकता है। विशेषज्ञों के अनुसार, जिन लोगों में गंभीर लक्षण हैं या जो हाई-रिस्क ग्रुप में आते हैं, उनके लिए समय पर इलाज जरूरी है। ओसेल्टामिविर (Oseltamivir) दवा इस संक्रमण की शुरुआत में ज्यादा असरदार है। इसे आमतौर पर पहले 48 घंटे में लिया जाता है। इसमें हर मरीज को एंटीबायोटिक की जरूरत नहीं होती। इसका इस्तेमाल तभी किया जाता है, जब साथ में बैक्टीरियल इंफेक्शन हो। विशेषज्ञों के अनुसार, इस संक्रमण से बचाव के लिए हाथों को बार-बार साफ करना जरूरी है। खांसते या छींकते समय मुंह ढककर रखें। बीमार लोगों के करीब जाने से बचें। बीमार होने पर आराम रहें। लक्षण गंभीर होने पर डॉक्टर से सलाह लें। फ्लू वैक्सीन इंफेक्शन से बचाव में मदद कर सकती है।

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SuragBureau

Surag Bureau पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं और स्थानीय व राष्ट्रीय मुद्दों पर समाचार लेखन करते हैं। हमारा उद्देश्य पाठकों तक सटीक, निष्पक्ष और विश्वसनीय जानकारी पहुंचाना हैं।

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