एटा में राशन वितरण में धांधली: दो कोटेदारों पर एफआईआर दर्ज
एटा जिला प्रशासन ने राशन वितरण में अनियमितता बरतने वाले दो कोटेदारों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की। जिलाधिकारी ने भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त चेतावनी दी है।
एटा जनपद में सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) के तहत गरीबों को मिलने वाले राशन में बड़े पैमाने पर अनियमितता सामने आने के बाद जिला प्रशासन ने सख्त रुख अख्तियार कर लिया है। जिलाधिकारी अरविन्द सिंह की 'जीरो टॉलरेंस' नीति के अंतर्गत स्थानीय प्रशासन ने दो कोटेदारों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करते हुए संबंधित थानों में एफआईआर दर्ज कराई है। यह कार्रवाई उन लोगों के लिए एक कड़ा संदेश है जो सरकारी योजनाओं का लाभ पात्र लाभार्थियों तक पहुँचने में बाधा उत्पन्न कर रहे हैं।
जांच में सामने आई गंभीर विसंगतियां
प्रशासनिक जांच के दौरान यह पाया गया कि जैथरा और अलीगंज क्षेत्र के उचित दर विक्रेताओं द्वारा सरकारी खाद्यान्न वितरण में भारी धांधली की जा रही थी। विकास खंड जैथरा की ग्राम पंचायत गैसिंहपुर के कोटेदार लालाराम पुत्र सुमेर सिंह और विकास खंड अलीगंज की ग्राम पंचायत जटौराभान के कोटेदार ताराचंद्र उर्फ बन्टू सिंह की दुकानों के औचक निरीक्षण के दौरान गंभीर अनियमितताएं पाई गईं। अधिकारियों ने जब स्टॉक और वितरण अभिलेखों का भौतिक सत्यापन किया, तो रिकॉर्ड और मौके पर मौजूद खाद्यान्न में भारी अंतर पाया गया।
जांच दल को मौके पर निर्धारित मात्रा के अनुसार गेहूं, चावल और बाजरे का स्टॉक नहीं मिला, जो सीधे तौर पर आवश्यक वस्तुओं के वितरण एवं नियंत्रण आदेश-2016 के प्रावधानों का खुला उल्लंघन है। इसके अतिरिक्त, वितरण रजिस्टर और वास्तविक वितरण में भी विसंगतियां पाई गईं, जिससे यह स्पष्ट होता है कि गरीब जनता के हक का राशन खुले बाजार में बेचा जा रहा था।
प्रशासन की सख्त कार्रवाई और भविष्य की रणनीति
जिलाधिकारी अरविन्द सिंह ने स्पष्ट किया है कि गरीबों के अधिकारों के साथ किसी भी प्रकार का समझौता नहीं किया जाएगा। दोनों कोटेदारों के विरुद्ध आवश्यक वस्तु अधिनियम की धारा 3/7 के तहत मुकदमा दर्ज कर लिया गया है। प्रशासन का मानना है कि ऐसे तत्वों के खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई से ही सार्वजनिक वितरण प्रणाली को पारदर्शी बनाया जा सकता है।
प्रशासन की ओर से निम्नलिखित कदम उठाए जा रहे हैं:
- सघन जांच अभियान: जिले की सभी राशन दुकानों पर औचक निरीक्षण की प्रक्रिया तेज कर दी गई है।
- पारदर्शिता सुनिश्चित करना: राशन वितरण के दौरान ई-पॉस मशीनों का शत-प्रतिशत उपयोग अनिवार्य कर दिया गया है।
- शिकायत निवारण: प्रशासन ने आम जनता से अपील की है कि यदि उन्हें अपने कोटेदार के खिलाफ कोई भी शिकायत हो, तो वे तत्काल संबंधित पूर्ति निरीक्षक या जिला मुख्यालय पर सूचना दें।
इस पूरी प्रक्रिया का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि सरकार द्वारा गरीबों के कल्याण के लिए भेजा गया राशन बिना किसी कटौती के उन तक पहुंचे। जिलाधिकारी ने चेतावनी दी है कि यदि भविष्य में किसी भी कोटेदार द्वारा कालाबाजारी, खाद्यान्न के दुरुपयोग या लाभार्थियों के साथ अभद्रता की शिकायत पाई जाती है, तो उनके खिलाफ न केवल एफआईआर दर्ज की जाएगी, बल्कि उनके लाइसेंस को भी स्थायी रूप से निरस्त कर दिया जाएगा।
एटा प्रशासन का यह कदम उन हजारों पात्र राशन कार्ड धारकों के लिए एक राहत की खबर है, जो लंबे समय से कोटेदारों की मनमानी से परेशान थे। प्रशासन की यह सक्रियता न केवल भ्रष्टाचार पर लगाम लगाएगी, बल्कि सरकारी योजनाओं के प्रति जनता का विश्वास भी बहाल करेगी। फिलहाल पुलिस मामले की जांच कर रही है और दोषियों को जल्द ही कानून के दायरे में सजा दिलाई जाएगी।
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