कलेक्टर देंगे भारतीय नागरिकता! राजस्थान से लेकर बंगाल तक, 8 राज्यों में बदले नियम
केंद्र सरकार ने नागरिकता देने की प्रक्रिया में बड़ा बदलाव किया है। गृह मंत्रालय ने नागरिकता नियमों में संशोधन करते हुए छह सीमावर्ती राज्यों और दो केंद्र शासित प्रदेशों के जिला कलेक्टरों को नागरिकता देने का अधिकार दिया है। नए नियमों के तहत संबंधित जिला कलेक्टर नागरिकता के लिए आने वाले आवेदनों को प्राप्त करने, उनकी जांच करने और उन पर फैसला लेने के साथ नागरिकता देने की प्रक्रिया पूरी कर सकेंगे। यह बदलाव पाकिस्तान, अफगानिस्तान और बांग्लादेश के गैर-मुस्लिम अल्पसंख्यकों को नागरिकता देने की प्रक्रिया में होने वाली देरी को कम करने के उद्देश्य से किया गया है। नए प्रावधान नागरिकता अधिनियम की धारा 6बी के तहत पंजीकरण या प्राकृतिककरण के लिए किए जाने वाले आवेदनों पर लागू होंगे। किन राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में लागू होगा नया नियम? ट्रिब्यून की रिपोर्ट के मुताबिक, गृह मंत्रालय की ओर से जारी नागरिकता (तीसरा संशोधन) नियम, 2026 के तहत यह व्यवस्था इन क्षेत्रों में लागू होगी। हालांकि असम और त्रिपुरा के जनजातीय क्षेत्रों को इस व्यवस्था से बाहर रखा गया है। गुजरात राजस्थान पंजाब पश्चिम बंगाल असम त्रिपुरा जम्मू-कश्मीर लद्दाख अब कलेक्टर के पास होगी नागरिकता देने की अहम जिम्मेदारी नियमों में बदलाव के बाद संबंधित जिला कलेक्टर को नागरिकता प्रक्रिया में महत्वपूर्ण अधिकार मिल गया है। आवेदन मिलने के बाद इलेक्ट्रॉनिक तरीके से फॉर्म IX में पावती जारी की जाएगी। कलेक्टर आवेदक की ओर से जमा कराए गए दस्तावेजों की जांच करेंगे। जरूरत पड़ने पर आवेदक की पात्रता और उपयुक्तता तय करने के लिए आवश्यक जांच भी कर सकेंगे। नागरिकता अधिनियम की दूसरी अनुसूची में निर्धारित निष्ठा की शपथ दिलाएंगे। धारा 6बी के तहत आवेदक की पात्रता तय करेंगे। आवेदन और जांच से संतुष्ट होने पर भारतीय नागरिकता प्रदान करेंगे। यदि आवेदक को उचित अवसर दिए जाने के बावजूद व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होकर आवेदन पर हस्ताक्षर करने और निष्ठा की शपथ लेने के लिए उपस्थित नहीं होता है, तो उसका आवेदन खारिज किया जा सकता है। अब तक सीएए के तहत नागरिकता देने का अधिकार सशक्त समिति और जिला-स्तरीय समिति के पास था। नए नियमों के मुताबिक गुजरात, राजस्थान, पंजाब, पश्चिम बंगाल, असम, त्रिपुरा, जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में इन समितियों के पास लंबित धारा 6बी के सभी आवेदन संबंधित कलेक्टर को ट्रांसफर किए जाएंगे। आवेदकों को भी धारा 6बी के तहत पंजीकरण या प्राकृतिककरण के लिए अपने आवेदन इलेक्ट्रॉनिक तरीके से संबंधित क्षेत्र के कलेक्टर के पास जमा करने होंगे। केंद्र सरकार ने नागरिकता नियमों के कई प्रावधानों और फॉर्म में भी जरूरी बदलाव किए हैं। नियम 14 और 15 में सशक्त समिति के संदर्भ के साथ जरूरत के मुताबिक कलेक्टर को भी शामिल किया गया है। नियम 38 में भी नामित अधिकारी के साथ कलेक्टर का उल्लेख किया गया है। इसके अलावा अनुसूची-1 में दिए गए Forms IIA, IIIA, IVA, VA, VIA, VIIA और VIIIA में भी बदलाव किए गए हैं। निर्धारित राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में सामान्य रूप से रहने वाले आवेदकों के लिए अब पूरे किए गए फॉर्म संबंधित कलेक्टर को जमा किए जाएंगे। कलेक्टर नियम 11ए के तहत इन आवेदनों पर प्रक्रिया पूरी करेंगे और फैसला लेंगे। अनुसूची IC में भी बदलाव करते हुए संबंधित प्रावधान में सीनियर सुपरिटेंडेंट ऑफ पोस्ट या सुपरिटेंडेंट ऑफ पोस्ट के साथ कलेक्टर को शामिल किया गया है। गृह मंत्रालय ने यह अधिसूचना नागरिकता अधिनियम, 1955 की धारा 18 के तहत मिले अधिकारों का इस्तेमाल करते हुए जारी की है। नागरिकता के मूल नियम फरवरी 2009 में अधिसूचित किए गए थे। इन्हें लेटेस्ट बदलाव से पहले 18 मई 2026 को संशोधित किया गया था। इसके अलावा गृह मंत्रालय ने 19 अगस्त को एक अलग आदेश भी जारी किया था। इसके तहत निर्धारित राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में सशक्त समिति और जिला-स्तरीय समिति के पास लंबित धारा 6बी के आवेदनों को संबंधित कलेक्टरों को ट्रांसफर किया जाना है।
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