फर्रुखाबाद: 35 किलो कीलों की सेज पर विशेष गुप्ता की 100 किमी दंडवत कांवड़
फर्रुखाबाद के शिवभक्त विशेष गुप्ता 35 किलो कीलों की सेज पर 100 किमी की दंडवत यात्रा कर रहे हैं। जानें इस कठिन तपस्या और अटूट आस्था की पूरी कहानी।
सावन के पवित्र महीने में उत्तर प्रदेश के फर्रुखाबाद में आस्था का एक ऐसा रूप देखने को मिल रहा है, जिसने हर किसी को अचंभित कर दिया है। पांचालघाट से शुरू हुई शिवभक्त विशेष गुप्ता की यह यात्रा सामान्य कांवड़ यात्राओं से बिल्कुल अलग है। उन्होंने भगवान शिव के प्रति अपनी अनन्य निष्ठा और रोग मुक्ति की मन्नत को पूरा करने के लिए अत्यंत कठिन मार्ग चुना है। वे करीब 35 किलोग्राम वजनी कीलों से जड़ी एक विशेष लकड़ी की सेज पर लेटकर दंडवत करते हुए त्रिलोकीनाथ धाम तक का सफर तय कर रहे हैं।
अनोखी तपस्या और कठिन संकल्प
विशेष गुप्ता द्वारा तैयार किया गया यह मंच इंजीनियरिंग और विश्वास का एक अनूठा संगम है। लकड़ी के एक मजबूत तख्ते पर सैंकड़ों कीलें इस प्रकार लगाई गई हैं कि वे शरीर को सहारा भी देती हैं और कष्ट भी पहुँचाती हैं। छह पहियों वाले इस मंच को एक रस्सी की मदद से उनका सहयोगी आगे खींचता है, जिसके बाद विशेष गुप्ता उस पर लेटकर दंडवत करते हैं। उनकी यात्रा के साथ गंगाजल से भरी मटकी भी एक अलग स्टैंड पर चल रही है, जिसका उद्देश्य त्रिलोकीनाथ धाम पहुँचकर भगवान भोलेनाथ का विधि-विधान से जलाभिषेक करना है।
प्रतिकूल मौसम भी नहीं डिगा सका हौसले
सावन के इस सफर में मौसम की मार और सड़कों की कठिनाइयां भी उनके संकल्प को कम नहीं कर पाई हैं। भारी बारिश के दौरान भी यह यात्रा अनवरत जारी है। विशेष गुप्ता का मानना है कि महादेव की कृपा से ही उन्हें इतनी सहनशक्ति मिल रही है। वे कहते हैं, 'यह कष्ट मेरे लिए गौण है, मेरी आस्था और मेरे भोलेनाथ के प्रति मेरा समर्पण सर्वोपरि है।' उनकी यह यात्रा फर्रुखाबाद से शाहजहांपुर स्थित त्रिलोकीनाथ धाम तक की लगभग 100 किलोमीटर की दूरी तय करेगी, जो शारीरिक सहनशक्ति की एक बड़ी परीक्षा है।
राहगीरों में कौतूहल और श्रद्धा
इस यात्रा को देखकर सड़क से गुजरने वाले आम लोग भी भावविभोर हो रहे हैं। जहाँ एक तरफ लोग उनकी इस कठिन तपस्या को देखकर हैरान हैं, वहीं दूसरी तरफ 'हर-हर महादेव' और 'बम-बम भोले' के जयकारों से पूरा वातावरण शिवमय हो गया है। स्थानीय लोग इस दृश्य को अपने मोबाइल में कैद कर रहे हैं और शिवभक्त की लंबी उम्र और उनकी मन्नत पूरी होने की कामना कर रहे हैं।
सावन की प्रेरणा
विशेष गुप्ता की यह दंडवत यात्रा न केवल एक धार्मिक अनुष्ठान है, बल्कि यह दृढ़ इच्छाशक्ति का भी प्रतीक है। यह यात्रा दर्शाती है कि जब कोई व्यक्ति पूरी निष्ठा के साथ अपने आराध्य की शरण में जाता है, तो भौतिक कष्ट और शारीरिक चुनौतियां गौण हो जाती हैं। फिलहाल, पूरा क्षेत्र इस अनोखी कांवड़ यात्रा पर अपनी नजरें जमाए हुए है और त्रिलोकीनाथ धाम पहुँचने पर उनके जलाभिषेक का बेसब्री से इंतजार किया जा रहा है। यह यात्रा निश्चित रूप से सावन के इस महीने में आस्था का एक नया अध्याय लिख रही है।
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