फर्रुखाबाद: दीवानी न्यायालय कर्मचारी संघ का आंदोलन, जानें क्या हैं मांगें
फर्रुखाबाद में दीवानी न्यायालय कर्मचारियों ने लंबित मांगों को लेकर आंदोलन का ऐलान किया है। मुख्यमंत्री को ज्ञापन सौंपकर चरणबद्ध आंदोलन की चेतावनी दी गई है।
फर्रुखाबाद के दीवानी न्यायालय परिसर में इन दिनों कर्मचारियों की नाराजगी साफ देखी जा सकती है। लंबे समय से अपनी लंबित मांगों को लेकर संघर्षरत दीवानी न्यायालय कर्मचारी संघ ने अब आर-पार की लड़ाई का मन बना लिया है। संघ के पदाधिकारियों ने स्थानीय विधायक नागेंद्र सिंह राठौर के माध्यम से मुख्यमंत्री को एक ज्ञापन प्रेषित किया है, जिसमें अपनी समस्याओं के त्वरित समाधान की पुरजोर अपील की गई है। कर्मचारियों का कहना है कि उनकी अनदेखी अब और अधिक समय तक बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
मांगों की फेहरिस्त और कर्मचारियों का तर्क
न्यायालयों की कार्यप्रणाली को सुचारू बनाए रखने में कर्मचारियों की भूमिका आधारभूत होती है। संघ का तर्क है कि अदालतों पर बढ़ते कार्यभार के अनुपात में कर्मचारियों को सुविधाएं और अधिकार नहीं मिल रहे हैं। ज्ञापन में वेतन विसंगतियों को दूर करने, नए पदों के सृजन और सेवा नियमितीकरण जैसे गंभीर मुद्दों को प्रमुखता से उठाया गया है।
संघ की प्रमुख मांगों में निम्नलिखित बिंदु शामिल हैं:
- एफटीसी (FTC) न्यायालयों में कार्यरत कर्मचारियों के वेतन में प्रतिवर्ष 10 प्रतिशत की वृद्धि सुनिश्चित करना।
- 4600 रुपये ग्रेड पे वाले क्लर्क पदों को राजपत्रित दर्जा प्रदान करना।
- क्लर्क पद के लिए न्यूनतम शैक्षणिक योग्यता स्नातक अनिवार्य करना और 2800 रुपये ग्रेड पे (लेवल-5) लागू करना।
- समाप्त किए गए वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी के पद को पुन: बहाल करना।
इसके अतिरिक्त, कर्मचारियों ने मांग की है कि जब तक रिक्त पदों पर नई भर्तियां नहीं हो जातीं, तब तक अतिरिक्त कार्यभार के लिए उन्हें उचित भत्ता दिया जाए।
आंदोलन की रूपरेखा और सरकार पर दबाव
संघ के कार्यवाहक अध्यक्ष ऋषि यादव ने स्पष्ट किया है कि यह आंदोलन केवल कागजी नहीं है। उन्होंने कहा कि न्यायिक व्यवस्था की रीढ़ कहे जाने वाले कर्मचारियों की उपेक्षा का खामियाजा अंततः व्यवस्था को ही भुगतना पड़ता है। यदि सरकार समय रहते इन मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं लेती है, तो आंदोलन को और अधिक तीव्र किया जाएगा।
संघ ने अपनी आगामी गतिविधियों का खाका भी तैयार कर लिया है: 2 अक्टूबर को गांधी जयंती के अवसर पर जिले भर में शांतिपूर्ण तिरंगा रैली निकाली जाएगी। इसके बाद, 25 अक्टूबर को लखनऊ में प्रांतीय संघ के आह्वान पर प्रदेश भर के कर्मचारी सत्याग्रह करेंगे।
फिलहाल, पूरा मामला शासन स्तर पर विचाराधीन है। कर्मचारियों की निगाहें अब सरकार के अगले कदम पर टिकी हैं। क्या सरकार उनकी मांगों को मानकर न्यायिक कामकाज की गति को निर्बाध रखेगी या फिर यह आंदोलन आने वाले दिनों में और विकराल रूप लेगा, यह देखना दिलचस्प होगा। फिलहाल न्यायालय परिसर में तनावपूर्ण शांति बनी हुई है और कर्मचारी अपनी एकता के प्रदर्शन के लिए पूरी तरह तैयार नजर आ रहे हैं।
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