यूपीआई ट्रांजैक्शन शुल्क पर व्यापारियों का विरोध, डीएम को सौंपा ज्ञापन

यूपीआई लेनदेन पर प्रस्तावित 0.4% शुल्क के विरोध में व्यापारियों ने फर्रुखाबाद में डीएम को ज्ञापन सौंपा। जानिए क्या है व्यापारियों की प्रमुख चिंताएं।

Sep 18, 2026 - 21:55
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यूपीआई ट्रांजैक्शन शुल्क पर व्यापारियों का विरोध, डीएम को सौंपा ज्ञापन

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यूपीआई लेनदेन पर प्रस्तावित 0.4 प्रतिशत शुल्क लागू करने की चर्चाओं ने देशभर के व्यापारियों के बीच हड़कंप मचा दिया है। इसी कड़ी में फर्रुखाबाद जिले के व्यापारियों ने भी लामबंद होकर सरकार के इस निर्णय का विरोध दर्ज कराया है। अखिल भारतीय उद्योग व्यापार मंडल के बैनर तले शुक्रवार को बड़ी संख्या में व्यापारी फतेहगढ़ स्थित कलेक्ट्रेट पहुंचे और नगर मजिस्ट्रेट पारुल तरार के माध्यम से शासन को एक ज्ञापन सौंपा। व्यापारियों का स्पष्ट मानना है कि डिजिटल इंडिया के दौर में भुगतान की इस सुविधा पर शुल्क लगाना कारोबारियों की कमर तोड़ने जैसा है।

डिजिटल भुगतान और व्यापारियों की चुनौतियां

व्यापारियों का तर्क है कि पिछले कुछ वर्षों में सरकार ने डिजिटल लेनदेन को बढ़ावा देने के लिए बड़े स्तर पर अभियान चलाए हैं। इसका सकारात्मक असर भी देखने को मिला है और आज छोटे से लेकर बड़े व्यापारी तक यूपीआई का उपयोग कर रहे हैं। हालांकि, यदि इस पर 0.4 प्रतिशत का अतिरिक्त शुल्क लगाया जाता है, तो यह सीधे तौर पर व्यापारियों के मुनाफे को कम करेगा।

ज्ञापन सौंपने के दौरान व्यापार मंडल के पदाधिकारियों ने कहा कि, "डिजिटल भुगतान ने व्यापार को सरल बनाया है, लेकिन यदि इसमें अतिरिक्त वित्तीय बोझ जोड़ा जाएगा, तो छोटे दुकानदार इसे वहन करने में असमर्थ होंगे।" उन्होंने यह भी चिंता जताई कि शुल्क लगने से ग्राहकों का झुकाव पुनः नकद लेनदेन की ओर हो सकता है, जो सरकार की डिजिटल अर्थव्यवस्था की नीति के विपरीत है।

प्रशासन को दी गई चेतावनी और मांग

नगर मजिस्ट्रेट को सौंपे गए ज्ञापन में व्यापारियों ने मांग की है कि सरकार इस प्रस्ताव पर पुनर्विचार करे। व्यापारियों के प्रतिनिधिमंडल में जिला महामंत्री रविकांत गुप्ता, नगर महामंत्री विवेक कुमार गुप्ता, संगठन मंत्री अर्पित गुप्ता, युवा नगर अध्यक्ष सलमान खान, मीडिया प्रभारी अनवर पठान समेत करीब 50 से अधिक पदाधिकारी और सदस्य शामिल थे।

व्यापारियों ने अपनी मांगों के समर्थन में निम्नलिखित तर्क प्रस्तुत किए:

  • डिजिटल लेनदेन पर शुल्क लगने से छोटे कारोबारियों का मार्जिन प्रभावित होगा।
  • अतिरिक्त शुल्क से महंगाई बढ़ने की संभावना है, जिसका सीधा असर आम उपभोक्ता पर पड़ेगा।
  • व्यापारिक गतिविधियों में पारदर्शिता के बजाय प्रशासनिक बाधाएं उत्पन्न होंगी।

नगर मजिस्ट्रेट पारुल तरार ने व्यापारियों की समस्याओं को ध्यानपूर्वक सुना। उन्होंने आश्वासन दिया कि व्यापारियों की आपत्तियों और उनके द्वारा व्यक्त की गई चिंताओं को उच्च अधिकारियों और शासन तक पहुंचाया जाएगा। इस आश्वासन के बाद व्यापारियों ने संतोष जाहिर किया, लेकिन साथ ही यह भी स्पष्ट किया कि यदि शुल्क संबंधी निर्णय वापस नहीं लिया जाता, तो वे आगे भी विरोध प्रदर्शन करने के लिए मजबूर होंगे।

भविष्य की राह और व्यापारियों की उम्मीदें

यह मुद्दा अब केवल स्थानीय स्तर तक सीमित नहीं रहा है, बल्कि देश के विभिन्न हिस्सों में व्यापारिक संगठनों द्वारा इस पर चिंता जताई जा रही है। व्यापारियों का कहना है कि सरकार को शुल्क लगाने के बजाय डिजिटल भुगतान को और अधिक सुरक्षित और सस्ता बनाने पर ध्यान देना चाहिए।

फिलहाल, फर्रुखाबाद के व्यापारियों की नजरें अब शासन के अगले कदम पर टिकी हैं। क्या सरकार व्यापारियों के इस दबाव को देखते हुए अपने प्रस्ताव में कोई बदलाव करेगी, या फिर डिजिटल भुगतान के लिए शुल्क का यह नया प्रावधान लागू होगा, यह आने वाला समय ही बताएगा। फिलहाल, व्यापारिक समुदाय इस मुद्दे पर एकजुट है और अपनी मांगों के प्रति दृढ़ है।

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SuragBureau

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