फर्रुखाबाद में भीषण गर्मी और बिजली कटौती से बेहाल जनता, क्या है राहत की उम्मीद?
फर्रुखाबाद में अघोषित बिजली कटौती से जनजीवन अस्त-व्यस्त। भीषण गर्मी में बिजली विभाग की लचर व्यवस्था और राहत की उम्मीदों पर एक विस्तृत रिपोर्ट।
फर्रुखाबाद में इन दिनों भीषण गर्मी का प्रकोप जारी है, और इस चिलचिलाती धूप के बीच अघोषित बिजली कटौती ने आम जनजीवन को पूरी तरह से अस्त-व्यस्त कर दिया है। पिछले करीब 15 दिनों से जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में बिजली की आंख-मिचौली ने लोगों का जीना मुहाल कर दिया है। रात के समय घंटों बिजली गुल रहने के कारण लोग चैन की नींद नहीं सो पा रहे हैं, जिससे बच्चों, बुजुर्गों और बीमार व्यक्तियों की सेहत पर भी बुरा असर पड़ रहा है।
बिजली व्यवस्था पर उठते सवाल
ग्रामीण उपभोक्ताओं का कहना है कि भीषण गर्मी के मौसम में बिजली की मांग सबसे अधिक होती है, लेकिन विभाग की ओर से की जा रही कटौती ने उनकी मुश्किलें दोगुनी कर दी हैं। उपभोक्ताओं के अनुसार, रात में चार से पांच घंटे तक बिजली आपूर्ति बाधित रहती है। इसके अलावा दिन में भी बार-बार बिजली जाने के कारण घर के पंखे, कूलर और अन्य उपकरण ठप हो जाते हैं। घरों के अंदर उमस और गर्मी से लोगों का बुरा हाल है। सरकारी दावों के अनुसार ग्रामीण क्षेत्रों में 18 घंटे और शहरी क्षेत्रों में 24 घंटे बिजली आपूर्ति का लक्ष्य निर्धारित है, लेकिन जमीनी हकीकत इन दावों से बिल्कुल विपरीत नजर आ रही है।
व्यापार पर भी पड़ा असर
सिर्फ घरेलू उपभोक्ताओं ही नहीं, बल्कि ग्रामीण बाजारों में छोटे कारोबारियों का काम भी बिजली कटौती की भेंट चढ़ गया है। बिजली पर निर्भर रहने वाले दुकानदारों का कहना है कि दिन में लंबे समय तक बिजली न रहने से कामकाज पूरी तरह प्रभावित होता है। दुकानदारों को ग्राहकों को वापस लौटाना पड़ रहा है, जिससे उनकी आय पर भी सीधा असर पड़ रहा है। एक स्थानीय दुकानदार के अनुसार, यदि यही स्थिति बनी रही तो छोटे व्यवसाय पूरी तरह से ठप हो जाएंगे।
तकनीकी खामियों और फीडर की समस्या
उपभोक्ताओं का आरोप है कि पनकी से कोड मिलते ही संबंधित उपकेंद्रों की बिजली आपूर्ति प्रभावित हो जाती है। कई बार फीडर बंद किए जाने से एक साथ कई क्षेत्रों की बिजली गुल कर दी जाती है, जिससे स्थानीय स्तर पर आक्रोश बढ़ रहा है। लोगों का स्पष्ट मानना है कि विभाग को फीडर प्रबंधन में सुधार करने की आवश्यकता है ताकि भीषण गर्मी के दौरान उपभोक्ताओं को बेवजह परेशानी न झेलनी पड़े।
प्रशासनिक प्रतिक्रिया और आगे की राह
इस गंभीर स्थिति पर संज्ञान लेते हुए अधीक्षण अभियंता यादवेंद्र सिंह ने जानकारी दी है कि विभाग अब ग्रामीण क्षेत्रों में घोषित कटौती पर रोक लगाने की योजना बना रहा है। उन्होंने स्वीकार किया कि इमरजेंसी कटौती को पूरी तरह रोकना तकनीकी कारणों से संभव नहीं है, लेकिन घोषित कटौती को नियंत्रित कर उपभोक्ताओं को बेहतर बिजली आपूर्ति देने का प्रयास किया जाएगा।
- मुख्य समस्याएं: रात में लंबी कटौती, फीडर की तकनीकी खामियां और दिन में बार-बार बिजली गुल होना।
- प्रभावित वर्ग: ग्रामीण उपभोक्ता, स्कूली बच्चे, बुजुर्ग और छोटे दुकानदार।
- अपेक्षित सुधार: घोषित कटौती पर रोक और बेहतर फीडर मैनेजमेंट।
फिलहाल, फर्रुखाबाद के निवासी बिजली विभाग की इस प्रस्तावित योजना पर नजर टिकाए हुए हैं। लोगों को उम्मीद है कि यदि घोषित कटौती पर वाकई रोक लगती है, तो उन्हें इस भीषण गर्मी में कुछ हद तक राहत मिल सकेगी। अब देखना यह है कि विभाग अपने वादों को धरातल पर कितनी जल्दी उतार पाता है।
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