कायमगंज: नाले की बदहाली से बढ़ रहा बीमारियों और खतरों का साया
कायमगंज में नाले के किनारे उगी झाड़ियों और नगर पालिका की लापरवाही से स्थानीय निवासियों का जीना दूभर, बीमारियों का खतरा बढ़ा।
कायमगंज के विभिन्न वार्डों और फूलमती मंदिर के पास से गुजरने वाले मुख्य नाले की वर्तमान स्थिति प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़ा कर रही है। लंबे समय से सफाई न होने के कारण नाले के दोनों ओर बड़ी-बड़ी और घनी घास तथा झाड़ियाँ उग आई हैं, जिसने पूरे क्षेत्र को एक खतरनाक स्थिति में धकेल दिया है। इन अनियंत्रित झाड़ियों ने न केवल नाले की चौड़ाई को सीमित कर दिया है, बल्कि पानी के प्राकृतिक बहाव में भी रुकावट पैदा कर दी है, जिससे जलभराव की समस्या विकराल हो गई है।
बढ़ता स्वास्थ्य संकट और जहरीले जीवों का डर
स्थानीय निवासियों का कहना है कि नाले के किनारों पर जमी यह गंदगी अब बीमारियों का केंद्र बन चुकी है। झाड़ियों के बीच मच्छर, जहरीले कीड़े-मकोड़े और सांप-बिच्छू जैसे खतरनाक जीवों का बसेरा बन गया है। शाम ढलते ही इन जीवों की सक्रियता बढ़ जाती है, जिससे आसपास रहने वाले छोटे बच्चों और बुजुर्गों का घर से बाहर निकलना भी जोखिम भरा हो गया है। क्षेत्र में डेंगू, मलेरिया और अन्य संक्रामक बीमारियों के फैलने का डर बना हुआ है, जिससे जनमानस में भारी आक्रोश है।
नगर पालिका की उदासीनता पर सवाल
क्षेत्रवासियों का आरोप है कि नगर पालिका परिषद इस समस्या से पूरी तरह अवगत है, फिर भी स्थिति जस की तस बनी हुई है। बारिश के मौसम में जब नाला उफान पर होता है, तो गंदा पानी लोगों के घरों के भीतर तक घुस जाता है। इससे पूरे इलाके में बदबू और गंदगी का साम्राज्य फैल जाता है। स्थानीय लोगों ने कई बार लिखित और मौखिक रूप से नगर पालिका के जिम्मेदार अधिकारियों को शिकायत दर्ज कराई है, लेकिन हर बार केवल कोरा आश्वासन ही हाथ लगता है। जमीनी स्तर पर न तो झाड़ियों की छंटाई की गई और न ही नाले की तलहटी की सफाई का कोई पुख्ता इंतजाम किया गया।
नागरिकों की चेतावनी और भविष्य की राह
अपनी उपेक्षा से नाराज निवासियों ने अब आर-पार की लड़ाई का मन बना लिया है। क्षेत्रवासियों ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि नगर पालिका परिषद ने तत्काल प्रभाव से विशेष अभियान चलाकर नाले के किनारे से इन झाड़ियों को नहीं हटाया और साफ-सफाई की व्यवस्था दुरुस्त नहीं की, तो वे चुप नहीं बैठेंगे। नागरिकों ने नगर पालिका कार्यालय का घेराव करने और उग्र आंदोलन करने की बात कही है।
यह स्थिति स्पष्ट करती है कि प्रशासनिक लापरवाही किस तरह आम जनजीवन को प्रभावित कर रही है। नगर पालिका को चाहिए कि वह जनता के स्वास्थ्य और सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए तत्काल सफाई कार्य को अंजाम दे। यदि समय रहते ध्यान नहीं दिया गया, तो किसी बड़ी दुर्घटना या महामारी के फैलने की जिम्मेदारी पूरी तरह से स्थानीय प्रशासन की होगी। अब देखना यह है कि क्या प्रशासन नींद से जागता है या फिर जनता को अपनी मांगों के लिए सड़कों पर उतरना पड़ेगा।
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