पराली जलाने पर सख्त कार्रवाई, किसानों से अपील—वैकल्पिक तरीकों को अपनाएं: उप कृषि निदेशक

Apr 28, 2026 - 20:34
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पराली जलाने पर सख्त कार्रवाई, किसानों से अपील—वैकल्पिक तरीकों को अपनाएं: उप कृषि निदेशक

पराली जलाने पर सख्त कार्रवाई, किसानों से अपील—वैकल्पिक तरीकों को अपनाएं: उप कृषि निदेशक

एटा। उप कृषि निदेशक सुमित कुमार ने आज एक महत्वपूर्ण बयान जारी करते हुए किसानों से अपील की है कि वे अपने खेतों में पराली या फसल अवशेष जलाने से बचें और इसके代 में पर्यावरण को बचाने के लिए वैकल्पिक उपाय अपनाएं। उन्होंने बताया कि 27 अप्रैल को सैटेलाइट के माध्यम से पराली जलाने की एक घटना की जानकारी मिली थी, जिसके बाद संबंधित क्षेत्रीय लेखपाल और कृषि कर्मियों ने मौके का निरीक्षण किया और विकास खंड अवागढ़ के एक गांव में पराली जलाने की पुष्टि की। उप कृषि निदेशक ने कहा कि इस मामले में किसान पर ₹5000 का जुर्माना लगाया गया है।

उन्होंने स्पष्ट किया कि पराली जलाना पर्यावरण के लिए हानिकारक है और शासन ने इसके खिलाफ सख्त प्रावधान तय किए हैं। यदि कोई किसान पराली जलाने का दोषी पाया जाता है, तो उस पर ₹5000 से ₹30000 तक का जुर्माना वसूला जाएगा। साथ ही, यदि कोई किसान बार-बार यह उल्लंघन करता है, तो उसके खिलाफ विधिक कार्रवाई की जाएगी। सुमित कुमार ने किसानों को प्रेरित किया कि वे पराली जलाने के बजाय दूसरे विकल्पों का इस्तेमाल करें, जैसे कि मिट्टी पलटने वाले हल से पराली को मिट्टी में दबाना या फिर उसे पशुओं के चारे के रूप में उपयोग करना। उन्होंने यह भी बताया कि पराली जलाने की घटनाओं की लगातार निगरानी सैटेलाइट के जरिए की जा रही है, जिससे कोई भी किसान इस अपराध से बच नहीं सकता। इस दौरान उन्होंने जिले के सभी किसानों से एक जिम्मेदार किसान की भूमिका निभाने की अपील की और पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ भूमि की उर्वरता बनाए रखने के लिए पराली जलाने से बचने की सलाह दी।

उप कृषि निदेशक ने यह भी कहा कि पर्यावरणीय संरक्षण के लिए सभी किसानों को मिलकर प्रयास करने की आवश्यकता है ताकि आने वाली पीढ़ी के लिए एक स्वस्थ और हरा-भरा वातावरण सुनिश्चित किया जा सके। कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि: पराली जलाना भूमि की उर्वरता को भी नुकसान पहुंचाता है और इससे वायु प्रदूषण में वृद्धि होती है, जो मनुष्य और पर्यावरण दोनों के लिए हानिकारक है। अत: किसान यदि वैकल्पिक उपाय अपनाते हैं, तो न केवल वे अपने खेतों की उर्वरता बनाए रख सकते हैं, बल्कि वे पर्यावरण संरक्षण में भी सहायक बन सकते हैं।

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