भाभी-देवर को प्रेम प्रसंग के शक में दी गई अपमानजनक सजा, जूतों की माला पहनाकर गांव में घुमाया

Jun 10, 2026 - 21:12
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भाभी-देवर को प्रेम प्रसंग के शक में दी गई अपमानजनक सजा, जूतों की माला पहनाकर गांव में घुमाया

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भाभी-देवर को प्रेम प्रसंग के शक में दी गई अपमानजनक सजा, जूतों की माला पहनाकर गांव में घुमाया

नवाबगंज/फर्रुखाबाद/ जिले के नवाबगंज थाना क्षेत्र के एक गांव में कथित प्रेम प्रसंग के शक में एक महिला और युवक को अमानवीय तरीके से सार्वजनिक रूप से अपमानित किए जाने का मामला सामने आया है। घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल होने के बाद पूरे इलाके में चर्चा का विषय बना हुआ है। वीडियो में एक युवक और महिला ग्रामीणों के बीच खड़े दिखाई दे रहे हैं, जबकि उनके गले में जूतों की माला डाली गई है और कथित रूप से उन्हें गांव में घुमाया गया। जानकारी के अनुसार, ग्रामीणों का आरोप है कि महिला और युवक के बीच लंबे समय से प्रेम प्रसंग चल रहा था। बताया जा रहा है कि दोनों को संदिग्ध परिस्थितियों में देखे जाने के बाद परिजनों और कुछ ग्रामीणों ने पकड़ लिया। इसके बाद मामला पंचायत तक पहुंचा, जहां दोनों को कथित तौर पर जूतों की माला पहनाकर पूरे गांव में घुमाने जैसी अपमानजनक सजा दी गई।

 प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, घटना के दौरान बड़ी संख्या में ग्रामीण मौके पर मौजूद रहे। किसी ने इस पूरे घटनाक्रम का वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर वायरल कर दिया, जिसके बाद मामला सुर्खियों में आ गया। वीडियो सामने आने के बाद लोगों ने पंचायत के इस कथित फैसले पर सवाल उठाने शुरू कर दिए हैं। सामाजिक संगठनों और जागरूक नागरिकों का कहना है कि किसी भी व्यक्ति को कानून अपने हाथ में लेने का अधिकार नहीं है और दोषी होने या न होने का फैसला केवल न्यायिक प्रक्रिया के तहत ही होना चाहिए। ग्रामीण क्षेत्र में हुई इस घटना ने कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी व्यक्ति को सार्वजनिक रूप से अपमानित करना, सामाजिक बहिष्कार करना या भीड़ के दबाव में सजा देना कानूनन गलत है। ऐसे मामलों में पुलिस और प्रशासन को निष्पक्ष जांच कर कार्रवाई करनी चाहिए। वायरल वीडियो के बाद पुलिस प्रशासन भी हरकत में आ गया है। सूत्रों के मुताबिक पुलिस मामले की जांच कर रही है और वीडियो की सत्यता के साथ-साथ पूरे घटनाक्रम की पड़ताल की जा रही है। हालांकि आधिकारिक स्तर पर अभी तक किसी की गिरफ्तारी या कार्रवाई की पुष्टि नहीं की गई है। घटना ने एक बार फिर यह बहस छेड़ दी है कि क्या गांवों में कुछ स्थानों पर आज भी सामाजिक पंचायतें कानून से ऊपर खुद को समझकर फैसले सुना रही हैं। मानवाधिकार कार्यकर्ताओं का कहना है कि यदि वीडियो में दिखाई गई घटना सही पाई जाती है तो यह न केवल व्यक्तिगत स्वतंत्रता का उल्लंघन है, बल्कि कानून व्यवस्था और संवैधानिक अधिकारों के लिए भी गंभीर चुनौती है। फिलहाल वायरल वीडियो और ग्रामीणों के दावों के बीच पुलिस जांच का इंतजार किया जा रहा है। जांच के बाद ही पूरे मामले की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

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SuragBureau

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