फर्रुखाबाद: बाढ़ के बाद बीमारियों का खतरा, स्वास्थ्य विभाग का अलर्ट

फर्रुखाबाद में बाढ़ के बाद वायरल फीवर और संक्रमण बढ़ा। स्वास्थ्य विभाग द्वारा एंटी लार्वा छिड़काव और विशेष मेडिकल कैंप के जरिए बचाव के प्रयास जारी हैं।

Sep 07, 2026 - 08:00
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फर्रुखाबाद: बाढ़ के बाद बीमारियों का खतरा, स्वास्थ्य विभाग का अलर्ट

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फर्रुखाबाद में बाढ़ और जलभराव की स्थिति ने जनजीवन को खासा प्रभावित किया है। बाढ़ के पानी के उतरने के साथ ही ग्रामीण क्षेत्रों में विभिन्न बीमारियों का प्रकोप तेजी से बढ़ रहा है। प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र अमृतपुर में इन दिनों मरीजों की भारी भीड़ देखी जा रही है। विशेष रूप से वायरल फीवर, सर्दी-खांसी और त्वचा संबंधी समस्याओं जैसे खुजली के मरीजों की संख्या में भारी उछाल आया है। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग पूरी तरह से अलर्ट मोड पर है।

स्वास्थ्य विभाग द्वारा चलाए जा रहे राहत अभियान

स्वास्थ्य केंद्र प्रभारी डॉ. गौरव वर्मा के नेतृत्व में एक विशेष मेडिकल टीम लगातार कार्य कर रही है। टीम द्वारा माखन नगला, किराचन, सुभानपुर, फखरपुर और बनारसीपुर सहित करीब 20 बाढ़ प्रभावित गांवों में स्वास्थ्य शिविर आयोजित किए गए हैं। इन शिविरों का मुख्य उद्देश्य दूरदराज के क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को उनके गांव के समीप ही चिकित्सीय परामर्श और आवश्यक दवाएं उपलब्ध कराना है। शिविरों में आने वाले ग्रामीणों को बाढ़ के बाद फैलने वाली संक्रामक बीमारियों से बचाव के लिए जागरूक भी किया जा रहा है।

मच्छरजनित रोगों की रोकथाम के लिए एंटी लार्वा छिड़काव

जलभराव के कारण मच्छरों का प्रजनन एक बड़ी समस्या बनकर उभरा है। मलेरिया और डेंगू जैसी जानलेवा बीमारियों के खतरे को कम करने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने फखरपुर, करनपुरघाट, अमृतपुर और किराचन समेत आठ प्रमुख गांवों में एंटी लार्वा का छिड़काव करवाया है। विभाग का मानना है कि मच्छरों के लार्वा को समय रहते नष्ट करना ही इन बीमारियों को फैलने से रोकने का एकमात्र प्रभावी तरीका है।

मरीजों की बढ़ती संख्या और स्वास्थ्य सुविधाएं

डॉ. गौरव वर्मा ने बताया कि स्वास्थ्य केंद्र पर रोजाना बड़ी संख्या में मरीज पहुंच रहे हैं। शनिवार को जहां 218 मरीजों का उपचार किया गया, वहीं रविवार को यह संख्या 250 के पार पहुंचने की संभावना है। स्वास्थ्य केंद्र पर एलटी पवन कुमार की देखरेख में मलेरिया, टाइफाइड, डेंगू, हेपेटाइटिस और शुगर जैसी गंभीर बीमारियों की जांच की सुविधा भी उपलब्ध कराई गई है। इससे मरीजों की सही पहचान कर उनका त्वरित इलाज सुनिश्चित किया जा रहा है।

सावधानी और बचाव के उपाय

चिकित्सकों ने ग्रामीणों को विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी है। स्वास्थ्य विभाग द्वारा दिए गए प्रमुख दिशा-निर्देश इस प्रकार हैं:

  • स्वच्छता: अपने घरों के आसपास पानी का जमाव न होने दें और साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखें।
  • खान-पान: हमेशा ताजा भोजन करें और बासी या खुला रखा हुआ भोजन न खाएं।
  • चिकित्सीय सलाह: बुखार या अन्य लक्षण महसूस होने पर स्वयं उपचार (सेल्फ-मेडिकेशन) करने के बजाय तुरंत नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र पर संपर्क करें।

बाढ़ के बाद फैली गंदगी और जलभराव से संक्रमण का खतरा अभी भी बना हुआ है। हालांकि, स्वास्थ्य विभाग की सक्रियता से ग्रामीणों को काफी राहत मिल रही है। टीम में श्यामू कुशवाह, मोहित, अखिल, राजन और फार्मासिस्ट अरविंद कुमार जैसे स्वास्थ्यकर्मी निरंतर सेवा दे रहे हैं। यह प्रयास न केवल बीमारियों के उपचार के लिए महत्वपूर्ण हैं, बल्कि एक बड़े स्तर पर महामारी को रोकने की दिशा में एक सशक्त कदम साबित हो रहे हैं।

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SuragBureau

Surag Bureau पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं और स्थानीय व राष्ट्रीय मुद्दों पर समाचार लेखन करते हैं। हमारा उद्देश्य पाठकों तक सटीक, निष्पक्ष और विश्वसनीय जानकारी पहुंचाना हैं।

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