फर्रुखाबाद: गंगा का रौद्र रूप, समैचीपुर चितार में 15 मकान एक दिन में समाए
फर्रुखाबाद के समैचीपुर चितार गांव में गंगा के कटान से भारी तबाही। एक दिन में 15 मकान गंगा में विलीन, बेघर परिवारों के सामने भोजन और छत का गंभीर संकट।
फर्रुखाबाद के कायमगंज और शमसाबाद क्षेत्र में गंगा की बाढ़ ने विकराल रूप धारण कर लिया है। समैचीपुर चितार गांव में स्थिति अत्यंत चिंताजनक बनी हुई है, जहां गंगा का कटान लगातार जारी है। रविवार का दिन गांव के लिए बेहद दुखद रहा, जब महज 24 घंटों के भीतर 15 पक्के मकान गंगा की तेज धार में समा गए। ग्रामीणों और स्थानीय लेखपाल के आंकड़ों के अनुसार, 16 अगस्त से अब तक कुल 35 पक्के मकान और 25 झोपड़ियां पूरी तरह से नष्ट हो चुकी हैं।
गंभीर संकट में ग्रामीण
गांव के प्रधान पुत्र सिजवान के अनुसार, अचानक घरों के कटने से ग्रामीणों में दहशत का माहौल है। जिन परिवारों ने अपनी जीवन भर की कमाई से आशियाने बनाए थे, वे अब बेघर हो चुके हैं और रिश्तेदारों या पड़ोसियों के यहां शरण लेने को मजबूर हैं। प्रभावित परिवारों में नौशाद, कुश मोहम्मद, हसीना बेगम और इबरान जैसे कई लोग शामिल हैं, जिन्होंने सब कुछ अपनी आंखों के सामने बहते हुए देखा है।
बाढ़ के कारण केवल छत ही नहीं छिनी, बल्कि दैनिक जीवन की मूलभूत सुविधाएं भी समाप्त हो गई हैं। राशन और ईंधन की भारी किल्लत है। प्रशासन द्वारा एक महीने पहले उपलब्ध कराया गया राशन समाप्त हो चुका है और लगातार बारिश के कारण लकड़ियां गीली होने से भोजन पकाना एक बड़ी चुनौती बन गया है।
स्वास्थ्य और सुरक्षा पर चिंता
गांव चारों ओर से जलमग्न है, जिससे गर्भवती महिलाओं और बच्चों के लिए स्वास्थ्य सुविधाएं पूरी तरह बाधित हैं। स्वास्थ्य विभाग की टीम के दोबारा न आने से ग्रामीणों में रोष और चिंता है। यद्यपि जिला प्रशासन ने शमसाबाद मंडी में एक बाढ़ शरणालय की व्यवस्था की है, लेकिन अधिकांश ग्रामीण अपना गांव और शेष बची संपत्ति को छोड़कर वहां जाने को तैयार नहीं हैं।
प्रशासनिक कदम और चुनौतियां
जिलाधिकारी अंकुर लाठर ने स्पष्ट किया है कि प्रभावित परिवारों को नियमानुसार भूमि पट्टा, आर्थिक सहायता और राहत सामग्री तत्काल उपलब्ध कराई जाएगी। उन्होंने मेडिकल कैंप और राहत सामग्री पुनः भेजने के निर्देश दिए हैं। दूसरी ओर, एसडीएम अभिषेक वर्मा ने बताया कि शरणालय में रहने, खाने और बच्चों की शिक्षा की पूरी व्यवस्था है।
सिंचाई विभाग की ओर से कटान रोकने के प्रयासों की बात कही गई है, हालांकि विभाग के अधिकारियों को 15 मकानों के ताजा नुकसान की जानकारी देरी से मिलने की बात सामने आई है। वर्तमान में ग्रामीणों की प्रमुख मांग तत्काल सर्वे कराकर राहत राशि दिलाने और गंगा के कटान को रोकने के लिए ठोस सुरक्षात्मक कदम उठाने की है, ताकि गांव के बाकी बचे मकानों को बचाया जा सके।
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