एटा: विकास परियोजनाओं की बाधाएं दूर करने के लिए डीएम सख्त
एटा जिलाधिकारी अरविन्द सिंह ने विकास कार्यों में वन और विद्युत विभाग की एनओसी से जुड़ी अड़चनों को दूर करने और परियोजनाओं को समयबद्ध पूरा करने के निर्देश दिए हैं।
एटा जनपद में चल रही विकास परियोजनाओं को गति देने के लिए प्रशासनिक स्तर पर सक्रियता बढ़ा दी गई है। जिलाधिकारी अरविन्द सिंह ने हाल ही में आयोजित एक महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक में स्पष्ट किया है कि निर्माण कार्यों में आ रही बाधाओं को प्राथमिकता के आधार पर दूर किया जाना चाहिए। विशेष रूप से वन और विद्युत विभाग से संबंधित एनओसी और उपयोगिता शिफ्टिंग के मामलों में अब और देरी बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
बैठक का मुख्य केंद्र शिकोहाबाद रोड से निधौली खुर्द और सकीट रोड होते हुए एनएच-34 तक बनने वाला बाईपास था। यह परियोजना क्षेत्र के यातायात को सुगम बनाने की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है। जिलाधिकारी ने इस प्रोजेक्ट के संदर्भ में आ रही वन विभाग की औपचारिकताओं और विद्युत लाइनों को हटाने (यूटिलिटी शिफ्टिंग) की प्रक्रिया की विस्तृत समीक्षा की। उन्होंने विभागीय अधिकारियों को निर्देशित किया कि वे केवल कागजी पत्राचार पर निर्भर न रहें, बल्कि सक्रिय समन्वय स्थापित कर स्वीकृतियां सुनिश्चित करें।
प्रभावी समन्वय और शासन स्तर पर पैरवी
जिलाधिकारी ने यह स्पष्ट किया कि जिन प्रकरणों का निस्तारण जनपद स्तर पर संभव नहीं है, उनमें लखनऊ स्थित उच्च अधिकारियों और शासन के संबंधित विभागों से निरंतर संपर्क किया जाए। उन्होंने कहा कि विकास कार्य जन-आकांक्षाओं से सीधे जुड़े होते हैं, इसलिए इसमें किसी भी प्रकार की शिथिलता लोकहित में नहीं है। अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे लंबित फाइलों की स्वयं मॉनीटरिंग करें और आवश्यकता पड़ने पर शासन स्तर पर प्रभावी पैरवी सुनिश्चित करें ताकि परियोजनाओं की लागत और समय न बढ़े।
विभागों के बीच सामंजस्य की आवश्यकता
विकास कार्यों के सफल क्रियान्वयन में विभिन्न विभागों के बीच तालमेल की भूमिका पर जोर देते हुए जिलाधिकारी ने कहा कि भूमि अधिग्रहण, वृक्षों के पातन की अनुमति और विद्युत आपूर्ति से संबंधित कार्यों में आपसी सहयोग अनिवार्य है। जब तक सभी विभाग एक साझा उद्देश्य के साथ काम नहीं करेंगे, तब तक निर्माण कार्यों को समय सीमा के भीतर पूरा करना चुनौतीपूर्ण बना रहेगा। उन्होंने जोर दिया कि किसी भी कार्य में आने वाली हर छोटी-बड़ी बाधा को चिन्हित किया जाए और उसके समाधान के लिए तत्काल धरातलीय प्रयास किए जाएं।
बैठक में उपस्थित प्रमुख अधिकारियों में प्रभागीय निदेशक सामाजिक वानिकी प्रभाग एटा विपिन वर्मा, अधीक्षण अभियंता विद्युत सुभाष चंद्र और अधिशासी अभियंता पीडब्ल्यूडी ललित अग्रवाल शामिल थे। इन सभी विभागों को निर्देशित किया गया है कि वे अपनी प्रगति रिपोर्ट नियमित रूप से प्रस्तुत करें। जिलाधिकारी ने चेतावनी दी है कि विकास कार्यों में अनावश्यक विलंब होने पर संबंधित अधिकारी की जवाबदेही तय की जाएगी।
यह प्रशासनिक सख्ती एटा के बुनियादी ढांचे के विकास के लिए एक सकारात्मक कदम है। यदि संबंधित विभाग इन निर्देशों का अक्षरशः पालन करते हैं, तो न केवल बाईपास निर्माण का कार्य तेजी से आगे बढ़ेगा, बल्कि अन्य लंबित विकास परियोजनाएं भी निर्धारित समय सीमा में जनता को समर्पित की जा सकेंगी। जिलाधिकारी का स्पष्ट संदेश है कि विकास की गति को बनाए रखना अब सर्वोच्च प्राथमिकता है।
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