एटा में खाद्य सुरक्षा विभाग द्वारा मिलावट खोरों से कार्यवाही के नाम पर खुलेआम डकैती

Aug 27, 2026 - 19:29
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एटा में खाद्य सुरक्षा विभाग द्वारा मिलावट खोरों से कार्यवाही के नाम पर खुलेआम डकैती

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एटा में खाद्य सुरक्षा विभाग द्वारा मिलावट खोरों से कार्यवाही के नाम पर खुलेआम डकैती

एटा। रक्षाबंधन के पावन पर्व से पहले एटा जनपद में खाद्य सुरक्षा विभाग के कुछ निरीक्षकों पर खाद्य कारोबारियों से कथित रूप से अवैध वसूली कराए जाने के गंभीर आरोप सामने आए हैं। आरोप है कि निरीक्षक अपने-अपने क्षेत्रों में खाद्य पदार्थों की दुकानों, प्रतिष्ठानों, मिठाई की दुकानों और खोया की आढ़तों पर पहुंचकर छोटे दुकानदारों से कथित तौर पर एक हजार से पांच हजार रुपये तथा थोक सप्लायरों से 10 हजार से 50 हजार रुपये तक की रकम की मांग कर रहे हैं। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि कथित वसूली के लिए विभागीय कर्मचारियों के साथ निजी लोगों का भी इस्तेमाल किया जा रहा है।

इनमें सुरेश चन्द्र उर्फ पजामा नाम के व्यक्ति का उल्लेख किया गया है। आरोप लगाने वालों का कहना है कि दुकानदारों और कारोबारियों को फोन करके भी रकम मांगे जाने की बात सामने आ रही है। जलेसर क्षेत्र को लेकर भी शिकायत में गंभीर आरोप लगाए गए हैं। इसमें मुकेश जादौन नाम के व्यक्ति का उल्लेख करते हुए दावा किया गया है कि संबंधित निरीक्षक उसे अपनी गाड़ी में बैठाकर क्षेत्र में भ्रमण कर रहे हैं। यही मुकेश जादौन पूर्व में भी मालती खाद्य सुरक्षा निरीक्षक के साथ मे रहता था अब जलेसर प्रभारी अपने साथ लेकर चल रहे हैं।

सबूत के तौर पर सीसी टीवी कैमरे में साफ देखा ज सकता है। आखिर विभाग के कर्मचारी अपने रास्ते से भटक कर लूट खसोट पर क्यों उतरे है। जबकि खाद्य सुरक्षा विभाग का मूल उद्देश्य मिलावटी और असुरक्षित खाद्य पदार्थों की बिक्री पर रोक लगाना तथा आम उपभोक्ताओं के स्वास्थ्य की रक्षा करना है। ऐसे में यदि विभागीय कार्रवाई के नाम पर किसी कारोबारी से अवैध वसूली के आरोप सही पाए जाते हैं तो यह विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करता है। मिली जानकारी के अनुसार एक गांव से दूध का पाउडर बेचने वाले से 50 हजार की उगाही की है। शिकायतकर्ताओं का कहना है कि त्योहारों के दौरान खाद्य पदार्थों और मिठाइयों की बिक्री बढ़ जाती है। इसी दौरान विभागीय निरीक्षण के नाम पर छोटे कारोबारियों पर कथित दबाव बनाए जाने से उनमें भय और आक्रोश का माहौल है। आरोप लगाने वालों ने उच्चाधिकारियों से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने, कथित वसूली में शामिल लोगों की भूमिका की जांच करने और दोषी पाए जाने पर कड़ी कार्रवाई की मांग की है।

मामले में यह भी महत्वपूर्ण है कि खाद्य सुरक्षा विभाग की ओर से लगाए गए आरोपों पर क्या आधिकारिक स्पष्टीकरण दिया जाता है। लेकिन एटा विभाग मुखिया ने फोन उठाना उचित नहीं समझा। यदि विभागीय अधिकारियों का पक्ष प्राप्त होता है तो उसे भी खबर में प्रमुखता से शामिल किया जाना चाहिए। ‘बेचने वाले जहर बेच रहे, अधिकारी जेब भर रहे’—आरोप लगाने वालों का कहना है कि खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता की जांच और मिलावट पर कार्रवाई के बजाय कथित तौर पर वसूली पर ध्यान दिया जा रहा है। अब निगाहें विभागीय उच्चाधिकारियों की जांच और कार्रवाई पर टिकी हैं।

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SuragBureau

Surag Bureau पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं और स्थानीय व राष्ट्रीय मुद्दों पर समाचार लेखन करते हैं। हमारा उद्देश्य पाठकों तक सटीक, निष्पक्ष और विश्वसनीय जानकारी पहुंचाना हैं।

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