डॉ. जितेंद्र सिंह ने सीएसआईआर-एनबीआरआई का प्रकृति ज्ञान धाम राष्ट्र को समर्पित किया
केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने लखनऊ में सीएसआईआर-एनबीआरआई के अनूठे इको-एजुकेशनल हब 'प्रकृति ज्ञान धाम' का उद्घाटन कर विज्ञान को समाज से जोड़ने का आह्वान किया।
पर्यावरण शिक्षा और जैव विविधता संरक्षण की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम उठाते हुए, केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. जितेंद्र सिंह ने लखनऊ के बन्थरा स्थित महर्षि पराशर बायोरिसोर्स सेंटर में विकसित 'प्रकृति ज्ञान धाम' को राष्ट्र को समर्पित किया। यह केंद्र सीएसआईआर-राष्ट्रीय वनस्पति अनुसंधान संस्थान (सीएसआईआर-एनबीआरआई) का एक महत्वाकांक्षी उपक्रम है, जो वैज्ञानिक अनुसंधान और जन-जागरूकता को एक मंच पर लाता है।
उद्घाटन समारोह में डॉ. जितेंद्र सिंह ने इस बात पर जोर दिया कि आधुनिक भारतीय वैज्ञानिक संस्थान अब केवल चारदीवारी और प्रयोगशालाओं तक सीमित नहीं हैं। वे समाज की वास्तविक जरूरतों के लिए समाधान तैयार कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि प्रकृति ज्ञान धाम माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के उस दृष्टिकोण को मूर्तरूप देता है, जिसमें विज्ञान, सतत विकास और जनभागीदारी का संगम भारत की वानस्पतिक विरासत को संरक्षित करने के लिए आवश्यक है। यह केंद्र विद्यार्थियों, शोधकर्ताओं और प्रकृति प्रेमियों के लिए अनुभवात्मक अधिगम का एक अनूठा केंद्र सिद्ध होगा।
वैज्ञानिक अनुसंधान और नवाचार का अनूठा संगम
संस्थान के निदेशक डॉ. ज़बीर अहमद ने बताया कि इस इको-एजुकेशनल हब को भारत की समृद्ध वनस्पति विविधता के एक जीवंत भंडार के रूप में तैयार किया गया है। यहाँ आगंतुक इंटरैक्टिव माध्यमों से देश की प्राकृतिक संपदा को करीब से देख और समझ सकते हैं। इस परिसर में कई विशेष आकर्षण शामिल हैं:
- भारतीय विरासत उद्यान: देश की सांस्कृतिक और पारंपरिक वनस्पति संपदा का प्रदर्शन।
- पावन पथ: आध्यात्मिक और औषधीय महत्व के पौधों का एक अनूठा संग्रह।
- विशेष वाटिकाएं: नवग्रह वाटिका, नक्षत्र वाटिका और दुर्लभ पौधों के विशेष उद्यान।
- बाँस उद्यान: बाँस की 43 विविध प्रजातियों का संरक्षण।
डिजिटल युग के साथ तालमेल बिठाते हुए, संस्थान ने क्यूआर-कोड आधारित सूचना तंत्र भी स्थापित किया है। इसके माध्यम से आगंतुक अपने स्मार्टफोन से पौधों के वैज्ञानिक, ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्व की जानकारी तुरंत प्राप्त कर सकते हैं। इसके अतिरिक्त, पर्यावरण-अनुकूल विद्युत वाहन परिवहन और प्रस्तावित मियावाकी शहरी वन इस परिसर को सतत पर्यटन का एक आदर्श उदाहरण बनाते हैं।
सामाजिक लाभ और महिला उद्यमिता को बढ़ावा
कार्यक्रम के दौरान वैज्ञानिक अनुसंधान को सामाजिक लाभों में बदलने की प्रतिबद्धता भी स्पष्ट दिखी। संस्थान द्वारा विकसित पुरुष प्रजनन स्वास्थ्य संबंधी हर्बल उत्पाद को हिमालया वैलनेस कंपनी द्वारा जारी किया गया। इसके साथ ही, महिला-नेतृत्व वाली उद्यमिता को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से चार प्रमुख पादप-आधारित प्रौद्योगिकियाँ, जिनमें हर्बल हेयर केयर ऑयल और विशेष इत्र शामिल हैं, केरल के कुडुम्बश्री समूह को हस्तांतरित की गईं।
औद्योगिक सहयोग को और मजबूत करते हुए, लखनऊ की विटवेक सॉल्यूशंस प्राइवेट लिमिटेड को कम लागत वाले प्रकाश-संश्लेषी जैव-रिएक्टर की प्रौद्योगिकी सौंपी गई। यह कदम किफायती और टिकाऊ तकनीकी नवाचारों को बढ़ावा देने की सीएसआईआर-एनबीआरआई की निरंतर कोशिशों को रेखांकित करता है। इस अवसर पर भारत के विरासत उद्यानों पर आधारित एक फिल्म टीज़र भी जारी किया गया, जो देश की वनस्पति विविधता के पारिस्थितिक महत्व को रेखांकित करता है। यह केंद्र आने वाली पीढ़ियों में प्रकृति संरक्षण के प्रति जिम्मेदारी का भाव विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
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