सूफियाना रंग में डूबा उर्स: चादर पेश होते ही गूंजी दुआएं, कव्वाली पर झूमे हजारों जायरीन
सूफियाना रंग में डूबा उर्स: चादर पेश होते ही गूंजी दुआएं, कव्वाली पर झूमे हजारों जायरीन
फतेहगढ़। ऐतिहासिक खानकाह हज़रत मखदूम शाह सैय्यद शहाबुद्दीन औलिया अलैहिर्रहमा में चल रहे सालाना उर्स का माहौल गुरुवार को पूरी तरह सूफियाना रंग में रंग गया। दूसरी रात आयोजित भव्य महफिल-ए-कव्वाली में देश के अलग-अलग शहरों से आए मशहूर कव्वालों ने ऐसा समां बांधा कि देर रात तक जायरीन इश्क-ए-रसूल और सूफियाना कलाम में झूमते रहे। महफिल की शुरुआत मौलाना शोएब अतीर मदारी ने कुरआन पाक की तिलावत से की। इसके बाद बाराबंकी के मशहूर कव्वाल कोनेन वारसी समेत कई नामचीन कव्वालों ने एक से बढ़कर एक सूफियाना कलाम पेश किए।
दरगाह परिसर "हक़... हक़..." और "या गौस-ए-आज़म" के नारों से गूंज उठा, जबकि जायरीन ने पूरे जोश और अकीदत के साथ महफिल का लुत्फ उठाया। उर्स के तीसरे दिन सुबह कुरआनखानी के साथ कार्यक्रमों की शुरुआत हुई। दोपहर में भुल्लन शाह की मजार से फूलों और चादर-गागर का भव्य जुलूस निकाला गया, जो विभिन्न इलाकों से होता हुआ दरगाह पहुंचा। रास्ते भर अकीदतमंदों ने चादर पर फूल बरसाए और दरगाह पहुंचकर अपनी श्रद्धा अर्पित की। दरगाह के सज्जादा नशीन शाह मोहम्मद वसीम उर्फ मोहम्मद मियां ने सभी जायरीनों और चादर-गागर लेकर आने वाले अकीदतमंदों का गर्मजोशी से स्वागत किया। उन्होंने बताया कि 31 जुलाई (शुक्रवार) को सुबह 10 बजे से कव्वाली की महफिल शुरू होगी, जबकि दोपहर 2 बजकर 2 मिनट पर कुल शरीफ की रस्म अदा की जाएगी। जुमे की नमाज का खुत्बा दोपहर 12:40 बजे होगा। इस दौरान तिलहर दरगाह शरीफ से सूफी इकबाल मियां, सज्जादा नशीन सूफी मोहम्मद फैजान मियां, कन्नौज से हाफिज फैसल मौदूदी, देवा शरीफ से जुड़े बाबा सैय्यद आले मुस्तफा, मकनपुर शरीफ के मौलाना नुरूल अरफात, कोटा के सूफी राजा मियां सहित कई सूफी संत और उलेमा मौजूद रहे।
चादर-गागर में मुंबई से हाजी शाहनवाज, शाह आलम, राजा, अंसार साबरी, इसरार साबरी, रफत हुसैन, मोहम्मद नियाज मीर, मोबीन साबरी, आफताब साबरी, फ़ज़ल लखनऊ साबरी, जसवंत सिंह, हरविंदर सिंह (पंजाब) सहित बड़ी संख्या में जायरीन ने शिरकत कर मुल्क में अमन, भाईचारे और खुशहाली की दुआ मांगी।
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