फर्रुखाबाद: बारिश से ढहे दो कच्चे मकान, बाल-बाल बचीं दो परिवारों की जान
फर्रुखाबाद के नवाबगंज में मूसलाधार बारिश ने मचाया कहर। कच्चे मकान गिरने से दो परिवार हुए बेघर, समय रहते बाहर निकलने से टला बड़ा हादसा।
फर्रुखाबाद जिले के नवाबगंज विकासखंड अंतर्गत ज्योना ग्राम पंचायत के नगला फार्म में मूसलाधार बारिश ने भारी तबाही मचाई है। लगातार हो रही बारिश के कारण ग्रामीण अंचल में दो कच्चे मकान अचानक भरभराकर ढह गए, जिससे दो गरीब परिवारों के सिर से छत छिन गई है। गनीमत यह रही कि मकानों के गिरने से पहले ही परिवारों ने खतरे को भांप लिया और बाहर निकलकर अपनी जान बचा ली। इस घटना के बाद से प्रभावित परिवारों में दहशत का माहौल है और उनके सामने रहने का गंभीर संकट खड़ा हो गया है।
समय रहते सतर्कता ने बचाई जान
पहला मामला धर्मेंद्र पुत्र रामवीर के घर का है। पेशे से मजदूर धर्मेंद्र अपने छह सदस्यीय परिवार के साथ कच्ची छत के नीचे रहने को मजबूर थे। बारिश के दौरान जब छत से पानी टपकना शुरू हुआ और दीवारों में दरारें उभरने लगीं, तो धर्मेंद्र ने अनहोनी की आशंका को भांप लिया। उन्होंने बिना देरी किए अपनी पत्नी प्रियंका और चार बच्चों को सुरक्षित स्थान पर बाहर निकाल लिया। उनके बाहर निकलते ही कुछ ही पलों में पूरा मकान मलबे में तब्दील हो गया। घर में मौजूद सारा गृहस्थी का सामान मलबे के नीचे दबकर नष्ट हो गया, जिससे परिवार के सामने रोजी-रोटी का भी संकट पैदा हो गया है।
इसी तरह की एक अन्य घटना में अहिवरन पुत्र लाहौरी का घर भी तेज बारिश की मार नहीं झेल सका। अहिवरन के परिवार में उनकी पत्नी पूनम और चार बच्चे आशीष, आशू, अयांश और अंशी शामिल हैं। मकान ढहने के बाद यह परिवार बेघर हो गया है और फिलहाल उन्हें विवश होकर पड़ोसियों के घर में शरण लेनी पड़ी है। इन परिवारों का कहना है कि उनकी मेहनत की कमाई से जुटाया गया थोड़ा बहुत सामान भी इस आपदा में मलबे में दफन हो गया है।
प्रशासन से मदद की गुहार
लगातार हो रही बारिश के कारण ग्रामीण इलाकों में कच्चे मकानों में रहने वाले अन्य परिवारों में भी डर का वातावरण बना हुआ है। प्रभावित परिवारों ने शासन-प्रशासन से गुहार लगाई है कि उन्हें उचित आर्थिक सहायता दी जाए ताकि वे दोबारा अपना आशियाना खड़ा कर सकें। वर्तमान में इन परिवारों के पास न तो रहने के लिए जगह है और न ही खाने-पीने का पर्याप्त साधन बचा है।
इस संबंध में ग्राम प्रधान के प्रतिनिधि जुगल किशोर ने बताया कि यह घटना अत्यंत दुखद है, लेकिन ईश्वर की कृपा रही कि किसी की जान नहीं गई। उन्होंने कहा कि प्रभावित परिवारों की सूची तैयार कर संबंधित राजस्व अधिकारियों को भेज दी गई है ताकि उन्हें सरकारी नियमों के अनुसार मुआवजा और राहत राशि मिल सके। प्रशासन की ओर से अब इन परिवारों को सुरक्षित स्थान पर बसाने के प्रयास किए जा रहे हैं।
सावधानी और सुरक्षा के उपाय
बारिश के मौसम में कच्चे और पुराने मकानों में रहने वाले लोगों के लिए यह घटना एक चेतावनी की तरह है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि घर की दीवारों में बड़ी दरारें दिखाई दें या छत से पानी का रिसाव असामान्य रूप से बढ़ जाए, तो तुरंत घर खाली कर देना चाहिए। आपदा के इस दौर में ग्रामीणों को सतर्क रहने की आवश्यकता है ताकि किसी भी अनहोनी से बचा जा सके। फिलहाल प्रभावित परिवारों को तत्काल सरकारी मदद मिलने की प्रतीक्षा है।
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