फर्रुखाबाद बिजली विभाग: स्टोर से 4 कंट्रोल पैनल गायब, जांच के आदेश
फर्रुखाबाद बिजली विभाग के स्टोर से 4 कंट्रोल पैनल गायब होने के मामले ने हड़कंप मचा दिया है। मुख्य अभियंता ने जांच के आदेश दिए हैं। विस्तृत रिपोर्ट पढ़ें।
फर्रुखाबाद में बिजली विभाग के स्टोर से चार महत्वपूर्ण कंट्रोल पैनलों के गायब होने की घटना ने विभागीय महकमे में खलबली मचा दी है। यह गंभीर मामला तब प्रकाश में आया जब मुख्य अभियंता राहुल नंदा विभाग के कामकाज की समीक्षा करने के लिए फर्रुखाबाद पहुंचे थे। समीक्षा बैठक के दौरान राजस्व वसूली और लाइनलॉस जैसे अहम मुद्दों पर चर्चा हो रही थी, लेकिन स्टोर के रिकॉर्ड की जांच ने पूरे मामले को एक नया मोड़ दे दिया।
गड़बड़ी का खुलासा कैसे हुआ?
दरअसल, विभाग को नवनिर्मित जसमई सबस्टेशन को चालू करने के लिए 33 केवी कंट्रोल पैनल की तत्काल आवश्यकता थी। जब मुख्य अभियंता ने स्टोर प्रभारी से इन पैनलों की उपलब्धता के बारे में जानकारी मांगी, तो रिकॉर्ड में बड़ा विरोधाभास सामने आया। फाइलों के अनुसार, इन पैनलों के लिए गेटपास काफी समय पहले ही काटा जा चुका था। हालांकि, जब भौतिक स्थिति की जांच की गई, तो पता चला कि पैनल न तो सबस्टेशन तक पहुंचे हैं और न ही स्टोर में मौजूद हैं।
इस विसंगति ने विभागीय अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। जांच में यह तथ्य भी सामने आया है कि दो अलग-अलग ठेकेदारों के पैनलों को एक ही ठेकेदार के नाम पर गेटपास जारी कर दिया गया था। इसके अलावा, रिकॉर्ड में दर्ज जानकारी के अनुसार, अक्टूबर 2025 में ये पैनल कानपुर की एक फर्म को आवंटित किए गए थे, जबकि गेटपास फर्रुखाबाद की एक स्थानीय फर्म के नाम पर काटा गया। यह प्रक्रिया पूरी तरह से संदिग्ध प्रतीत हो रही है, जिससे भ्रष्टाचार की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता है।
जांच के सख्त निर्देश
मुख्य अभियंता राहुल नंदा ने इस गंभीर लापरवाही को देखते हुए पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच के निर्देश दिए हैं। जांच टीम को विशेष रूप से निम्नलिखित बिंदुओं पर ध्यान केंद्रित करने को कहा गया है:
- स्टोर के पिछले सभी रिकॉर्ड और स्टॉक रजिस्टर का मिलान करना।
- जारी किए गए सभी गेटपास की सत्यता की जांच करना।
- पैनलों की वास्तविक डिलीवरी लोकेशन का पता लगाना।
- संबंधित ठेकेदारों और विभागीय कर्मचारियों की भूमिका की समीक्षा करना।
यह जांच न केवल गायब पैनलों तक सीमित रहेगी, बल्कि विभाग में सामानों की खरीद और वितरण प्रणाली की पारदर्शिता पर भी सवाल उठाएगी।
राजस्व वसूली पर भी जोर
स्टोर की इस घटना के बीच, मुख्य अभियंता ने विभागीय अधिकारियों को अपने नियमित कार्यों में तेजी लाने के निर्देश भी दिए हैं। शहर के पांच ऐसे फीडरों की पहचान की गई है जहां लाइनलॉस का स्तर बहुत अधिक है। इन फीडरों की विशेष जांच की जाएगी ताकि बिजली चोरी और तकनीकी खामियों को पकड़ा जा सके।
इसके साथ ही, 30 सितंबर तक राजस्व वसूली के निर्धारित लक्ष्यों को हर हाल में पूरा करने का दबाव बनाया गया है। बड़े बकायेदारों के खिलाफ अभियान चलाकर वसूली तेज करने के लिए सख्त निर्देश दिए गए हैं। बिजली विभाग का मानना है कि इस तरह की प्रशासनिक सख्ती से न केवल राजस्व में सुधार होगा, बल्कि विभागीय कामकाज में भी अनुशासन आएगा। फिलहाल, पूरे जिले में इस चोरी के मामले की चर्चा जोरों पर है और हर कोई जांच के नतीजों का इंतजार कर रहा है।
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