एटा जिला कारागार का निरीक्षण: बंदियों की समस्याओं के समाधान के निर्देश

एटा जिला कारागार में जनपद न्यायाधीश व अधिकारियों की टीम ने औचक निरीक्षण किया। बंदियों की स्वास्थ्य और कानूनी सहायता संबंधी समस्याओं के निस्तारण के निर्देश दिए गए।

Sep 30, 2026 - 21:42
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एटा जिला कारागार का निरीक्षण: बंदियों की समस्याओं के समाधान के निर्देश

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माननीय उच्च न्यायालय, इलाहाबाद के दिशा-निर्देशों और उत्तर प्रदेश जेल मैनुअल के प्रस्तर-632 के अनुपालन में, जिला कारागार एटा में एक उच्च स्तरीय निरीक्षण दल द्वारा औचक जांच की गई। इस प्रक्रिया का मुख्य उद्देश्य जेल में बंदियों की स्थिति, उनके स्वास्थ्य, स्वच्छता और उन्हें मिलने वाली विधिक सहायता की समीक्षा करना था। जनपद न्यायाधीश एवं अध्यक्ष, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, एटा राकेश धर दुबे की अध्यक्षता में गठित बोर्ड ऑफ विजिटर्स की समिति ने कारागार परिसर का बारीकी से मुआयना किया।

इस निरीक्षण दल में मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट अनिल कुमार-XI, प्रभारी-सचिव युगल चन्द्र चौधरी, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक डॉ. इलामारन जी, अपर जिलाधिकारी अजय नारायण सिंह और मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. राजेन्द्र प्रसाद शामिल थे। निरीक्षण के दौरान समिति ने कारागार की प्रत्येक बैरक में जाकर बंदियों से सीधे संवाद किया। जनपद न्यायाधीश ने बंदियों से उनके मुकदमों की स्थिति के बारे में जानकारी ली और यह सुनिश्चित किया कि क्या उनके पास पैरवी के लिए अधिवक्ता उपलब्ध हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि जिन बंदियों के पास आर्थिक तंगी के कारण अधिवक्ता नहीं हैं, उन्हें जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के माध्यम से निःशुल्क कानूनी सहायता प्रदान की जाएगी।

बंदियों की समस्याओं का त्वरित निस्तारण

संवाद के दौरान कई बंदियों ने जमानत, पेशी की तारीखों और सरकारी अधिवक्ता की उपलब्धता से संबंधित अपनी समस्याएं साझा कीं। इन शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए, जनपद न्यायाधीश ने संबंधित अधिकारियों को तत्काल प्रभाव से समाधान खोजने के निर्देश दिए। विशेष रूप से, सचिव, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण और जिला प्रशासन को यह सुनिश्चित करने के लिए कहा गया है कि बंदियों के कानूनी अधिकारों का हनन न हो और उनके मामलों में अनावश्यक देरी न हो।

स्वास्थ्य और स्वच्छता पर विशेष जोर

बदलते मौसम और बीमारियों के खतरे को देखते हुए, जेल प्रशासन को कड़े निर्देश जारी किए गए। जनपद न्यायाधीश ने जेल अधीक्षक को निर्देशित किया कि बंदियों का नियमित स्वास्थ्य परीक्षण सुनिश्चित किया जाए। वर्तमान में डेंगू और मलेरिया जैसी बीमारियों के प्रकोप को देखते हुए, जेल परिसर में साफ-सफाई की व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ करने के निर्देश दिए गए। मच्छरों से बचाव के लिए सभी आवश्यक उपाय करने और अस्वस्थ बंदियों को तत्काल चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने के आदेश दिए गए।

निरीक्षण के दौरान महिला बैरक का भी विशेष जायजा लिया गया। प्रभारी-सचिव ने महिला बंदियों से उनकी समस्याओं पर विस्तार से चर्चा की। कारागार के सभी रजिस्टरों की जांच की गई, जिसमें किसी भी प्रकार की जाति आधारित भेदभाव या आपत्तिजनक शब्दों का उल्लेख नहीं पाया गया। यह निरीक्षण पारदर्शिता और मानवाधिकारों की रक्षा के प्रति न्यायिक प्रणाली की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

इस अवसर पर जेल अधीक्षक अंकेक्षिता श्रीवास्तव, जेलर प्रदीप कुमार कश्यप, कारागार चिकित्सक डॉ. उत्सव जैन, डिप्टी जेलरगण गौरव कुमार, शशिकला वर्मा, सत्यपाल सिंह सिसोदिया सहित कारागार के अन्य कर्मचारी और सुरक्षाकर्मी उपस्थित रहे। निरीक्षण दल ने जेल प्रशासन को निर्देश दिए कि कारागार के भीतर अनुशासित और स्वच्छ वातावरण बनाए रखने के लिए निरंतर निगरानी आवश्यक है, ताकि बंदियों को उनके बुनियादी अधिकारों से वंचित न होना पड़े।

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SuragBureau

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