पत्नी की नाक काटने के बाद सास ने ननद की काटी नाक
पत्नी की नाक काटने के बाद सास ने ननद की काटी नाक
लखीमपुर खीरी। उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी जिले में घरेलू विवाद ने ऐसा भयावह रूप ले लिया कि एक ही परिवार की दो महिलाओं की नाक काटे जाने की घटना ने पूरे इलाके को झकझोर दिया। मामूली पारिवारिक विवाद देखते ही देखते हिंसक संघर्ष में बदल गया। पहले पति ने कथित रूप से पत्नी की नाक दांतों से काट दी और बाद में बेटी की हालत देखकर गुस्साई मां ने दामाद की बहन की नाक काटकर बदला ले लिया। इस घटना ने घरेलू हिंसा, कानून व्यवस्था और महिलाओं की सुरक्षा को लेकर गंभीर प्रश्न खड़े कर दिए हैं। जानकारी के अनुसार, पडुआ थाना क्षेत्र के एक गांव में रहने वाले श्रवण कश्यप और उनकी पत्नी प्रीति के बीच मायके जाने को लेकर विवाद हो गया।
बताया जा रहा है कि प्रीति अपनी चचेरी बहन के विवाह में शामिल होने के लिए मायके जाना चाहती थीं, लेकिन पति इसके लिए तैयार नहीं था। इसी बात को लेकर दोनों के बीच कहासुनी हुई, जो देखते ही देखते मारपीट में बदल गई। आरोप है कि गुस्से में पति ने पत्नी की बेरहमी से पिटाई की और दांतों से उसकी नाक काट दी, जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गई। घटना के बाद घायल प्रीति ने फोन कर अपने मायके वालों को पूरी जानकारी दी। सूचना मिलते ही उसके पिता, मां और अन्य परिजन ससुराल पहुंच गए। बेटी को लहूलुहान हालत में देखकर उसकी मां का गुस्सा फूट पड़ा। दोनों पक्षों के बीच कहासुनी के बाद मारपीट शुरू हो गई। इसी दौरान बीच-बचाव करने पहुंची पति की बहन मोनी को प्रीति की मां ने पकड़ लिया और कथित रूप से उसकी भी नाक दांतों से काट दी।
इससे वह भी गंभीर रूप से घायल हो गई। घटना की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और दोनों पक्षों को शांत कराया। घायल महिलाओं को उपचार के लिए अस्पताल भेजा गया, जहां उनका मेडिकल परीक्षण कराया गया। दोनों परिवारों ने एक-दूसरे के खिलाफ पुलिस को तहरीर दी है। पुलिस का कहना है कि मामले की निष्पक्ष जांच की जा रही है और मेडिकल रिपोर्ट सहित अन्य साक्ष्यों के आधार पर विधिक कार्रवाई की जाएगी। प्रारंभिक जांच में यह मामला घरेलू विवाद से जुड़ा सामने आया है, लेकिन हिंसा का यह रूप बेहद गंभीर माना जा रहा है। यह घटना केवल दो परिवारों के बीच का विवाद नहीं, बल्कि समाज के लिए एक गंभीर चेतावनी है। छोटी-छोटी पारिवारिक कहासुनी यदि समय रहते नहीं सुलझाई जाए तो वह भयावह हिंसा का रूप ले सकती है। महिलाओं के खिलाफ हिंसा और कानून को अपने हाथ में लेने जैसी घटनाओं पर प्रभावी रोक लगाने के लिए प्रशासन, पुलिस और समाज—तीनों को संवेदनशील और सतर्क रहने की आवश्यकता है।
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