आजादी के 79 साल बाद भी गगइयाँ में अंधेरा! 11000 की लाइन गांव के ऊपर से गुजरी, फिर भी घरों में बिजली नहीं—मोमबत्ती और डिब्बी के सहारे जिंदगी
आजादी के 79 साल बाद भी गगइयाँ में अंधेरा! 11000 की लाइन गांव के ऊपर से गुजरी, फिर भी घरों में बिजली नहीं—मोमबत्ती और डिब्बी के सहारे जिंदगी
न स्कूल, न घरों में रोशनी… विकास के दावों के बीच गगइयाँ के ग्रामीणों का सवाल—आखिर कब पहुंचेगी बिजली और शिक्षा?
सुराग ब्यूरो कवर स्टोरी
शमसाबाद/फर्रुखाबाद। देश 15 अगस्त को आजादी की 80वीं वर्षगांठ मनाने की तैयारी कर रहा है, लेकिन फर्रुखाबाद जिले के विकास खंड शमसाबाद की ग्राम पंचायत कुँआखेड़ा बजीर आलम के मजरा गगइयाँ में आज भी ग्रामीण मूलभूत सुविधाओं के लिए तरस रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि गांव में आज तक घरों तक बिजली पहुंचाने के लिए विद्युत पोल और आवश्यक व्यवस्था नहीं की गई है। शाम ढलते ही गांव में अंधेरा छा जाता है और लोग मोमबत्ती तथा डिब्बी जलाकर रात गुजारने को मजबूर हैं। ग्रामीणों के मुताबिक गांव में करीब 150 घर हैं और आबादी लगभग एक हजार है, जबकि करीब 450 मतदाता हैं। गांव में लोधी राजपूत, शाक्य और सक्सेना समाज सहित अन्य परिवार रहते हैं। ग्रामीणों का सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब देश के गांव-गांव तक बिजली पहुंचाने और हर घर को रोशन करने की योजनाएं संचालित की जा रही हैं, तो गगइयाँ के घर आज भी अंधेरे में क्यों हैं?
★ गांव के ऊपर से गुजर रही 11 हजार वोल्ट की लाइन, फिर भी घरों में नहीं पहुंची बिजली_
ग्रामीणों का कहना है कि क्षेत्र में 11 हजार वोल्ट की विद्युत लाइन मौजूद है, जो गंडुआ घाट की ओर जा रही है। इसके बावजूद गगइयाँ मजरे के घरों तक बिजली की सुविधा नहीं पहुंच सकी है। ग्रामीणों का आरोप है कि गांव में बिजली के पोल और घरेलू विद्युत कनेक्शन की व्यवस्था न होने के कारण उन्हें अंधेरे में जीवन बिताना पड़ रहा है।
★ बच्चों की पढ़ाई पर भी संकट, गांव में स्कूल तक नहीं_ गांव की समस्या केवल बिजली तक सीमित नहीं है। ग्रामीणों के अनुसार गगइयाँ में कोई स्कूल भी नहीं है। इससे गांव के बच्चों को पढ़ाई के लिए दूसरे स्थानों पर जाना पड़ता है। अंधेरे में रहने वाले बच्चों के लिए पढ़ाई करना और भी मुश्किल हो जाता है। ग्रामीणों का कहना है कि आज के दौर में शिक्षा और बिजली किसी भी गांव के विकास की बुनियादी जरूरत हैं। लेकिन गगइयाँ में दोनों सुविधाओं का अभाव ग्रामीणों के भविष्य पर सवाल खड़ा कर रहा है। अभिभावकों को चिंता है कि यदि गांव में शिक्षा और बिजली की व्यवस्था नहीं हुई तो आने वाली पीढ़ी भी मूलभूत सुविधाओं से वंचित रह सकती है।
★1076 और 1912 पर शिकायतों के बाद भी नहीं निकला समाधान_ ग्रामीणों का कहना है कि उन्होंने अपनी समस्या को लेकर मुख्यमंत्री हेल्पलाइन नंबर 1076 तथा बिजली विभाग के टोल फ्री नंबर 1912 पर कई बार शिकायतें दर्ज कराईं। ग्रामीणों का आरोप है कि शिकायतों के बावजूद समस्या का स्थायी समाधान नहीं हो सका और संबंधित अधिकारी मौके पर जांच करने नहीं पहुंचे। हालांकि शिकायतों और अधिकारियों के स्तर पर कार्रवाई की वास्तविक स्थिति का सत्यापन प्रशासन/विद्युत विभाग से किया जाना बाकी है। ग्रामीणों ने मांग की है कि उनकी शिकायतों की जांच कर यह स्पष्ट किया जाए कि अब तक गांव में विद्युत व्यवस्था क्यों नहीं पहुंच सकी।
★ग्रामीणों ने डीएम से लगाई गुहार—मौके पर जांच कराकर दिलाई जाए बिजली और स्कूल की सुविधा - गांव के लोगों ने जिलाधिकारी से मांग की है कि गगइयाँ मजरे का स्थलीय निरीक्षण कराया जाए और विद्युत विभाग के अधिकारियों से रिपोर्ट तलब की जाए। ग्रामीणों का कहना है कि यदि 11 हजार वोल्ट की लाइन क्षेत्र में मौजूद है तो तकनीकी और सुरक्षा मानकों के अनुसार आवश्यक प्रक्रिया पूरी कर गांव में घरेलू बिजली पहुंचाने की दिशा में तत्काल कार्रवाई की जाए। इसके साथ ही गांव में बच्चों की शिक्षा के लिए स्कूल अथवा नजदीकी विद्यालय तक सुरक्षित और सुविधाजनक पहुंच सुनिश्चित कराने की भी मांग की गई है।
★आजादी के जश्न के बीच बड़ा सवाल - 15 अगस्त को जब देश आजादी की 80वीं वर्षगांठ मनाएगा और गांव-गांव विकास की तस्वीर दिखाई जाएगी, तब गगइयाँ के ग्रामीणों की यह तस्वीर व्यवस्था के सामने एक बड़ा सवाल खड़ा करती है—क्या आजादी के 79 वर्ष बाद भी किसी गांव के घरों को रोशनी के लिए मोमबत्ती और डिब्बी का सहारा लेना पड़ेगा? ग्रामीणों ने जिलाधिकारी से मामले को गंभीरता से लेते हुए जिम्मेदार अधिकारियों से जवाब-तलब, शिकायतों की जांच और गांव में बिजली तथा शिक्षा की सुविधा उपलब्ध कराने के लिए समयबद्ध कार्रवाई की मांग की है।
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