बेटे का मृत्यु प्रमाण पत्र बनवाने गए पूर्व प्रधान, सिस्टम ने उन्हें ही ‘मृत’ बना दिया

Jun 04, 2026 - 07:10
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बेटे का मृत्यु प्रमाण पत्र बनवाने गए  पूर्व प्रधान, सिस्टम ने उन्हें ही ‘मृत’ बना दिया

बेटे का मृत्यु प्रमाण पत्र बनवाने गए पूर्व प्रधान, सिस्टम ने उन्हें ही ‘मृत’ बना दिया

आधार निष्क्रिय, बैंक खाता बंद, किसान सम्मान निधि और राशन जैसी सुविधाएं भी हुईं प्रभावित

 कायमगंज (फर्रुखाबाद)। सरकारी तंत्र की एक बड़ी लापरवाही ने फर्रुखाबाद के एक पूर्व ग्राम प्रधान की जिंदगी को मुश्किलों में डाल दिया है। कायमगंज ब्लॉक क्षेत्र के ग्राम मुड़ौल निवासी पूर्व प्रधान रामभजन को सरकारी अभिलेखों में मृत घोषित कर दिया गया, जबकि वह पूरी तरह जीवित हैं। विडंबना यह है कि पिछले करीब छह महीनों से वह विभिन्न सरकारी कार्यालयों के चक्कर काटकर खुद को जीवित साबित करने की कोशिश कर रहे हैं। रामभजन के अनुसार उनके पुत्र का कुछ समय पूर्व निधन हो गया था। बेटे का मृत्यु प्रमाण पत्र बनवाने के लिए उन्होंने निर्धारित प्रक्रिया के तहत आवेदन किया। लेकिन जब प्रमाण पत्र जारी हुआ तो उसमें उनके बेटे की जगह स्वयं रामभजन का नाम दर्ज था और उन्हें मृत दर्शाते हुए प्रमाण पत्र जारी कर दिया गया।

बाद में दो दिन पश्चात उनके बेटे का सही मृत्यु प्रमाण पत्र भी जारी कर दिया गया, लेकिन तब तक बड़ी प्रशासनिक गड़बड़ी हो चुकी थी। सरकारी दस्तावेजों में मृत घोषित किए जाने का असर रामभजन के जीवन पर व्यापक रूप से पड़ा। उनका आधार कार्ड निष्क्रिय हो गया, बैंक खाता बंद कर दिया गया और प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना के अंतर्गत मिलने वाली आर्थिक सहायता रुक गई। इसके अलावा सार्वजनिक वितरण प्रणाली के तहत मिलने वाला राशन, खाद और अन्य सरकारी योजनाओं का लाभ भी प्रभावित हो गया। पीड़ित का कहना है कि उन्हें हर जगह यह साबित करना पड़ रहा है कि वह जीवित हैं। कई बार अधिकारियों के सामने स्वयं उपस्थित होने के बावजूद रिकॉर्ड में सुधार नहीं हो सका है। रामभजन ने इस पूरे मामले को महज तकनीकी गलती मानने से इनकार किया है। उनका आरोप है कि कुछ स्थानीय लोगों और संबंधित कर्मचारियों की मिलीभगत से जानबूझकर उनके नाम का फर्जी मृत्यु प्रमाण पत्र जारी कराया गया। उन्होंने बताया कि वह वर्ष 2000 में ग्राम प्रधान रह चुके हैं और पिछले पंचायत चुनाव में भी उम्मीदवार थे, जहां उन्हें मात्र 38 वोटों से हार का सामना करना पड़ा था। उनका दावा है कि इसी राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता के कारण उन्हें निशाना बनाया गया है। मामले के सामने आने के बाद ग्राम सचिव हृदेश पाण्डेय तथा एडीओ पंचायत ने त्रुटि स्वीकार की है। ग्राम सचिव का कहना है कि कार्यभार अधिक होने के कारण मानवीय भूल हुई। वहीं एडीओ पंचायत ने बताया कि रिकॉर्ड में सुधार और मृत्यु प्रमाण पत्र निरस्त कराने की प्रक्रिया उच्च स्तर पर होगी, जिसके लिए संबंधित अभिलेखों को संशोधित कराया जाएगा।

पूर्व प्रधान ने जिलाधिकारी से शिकायत कर दोषी कर्मचारियोंके खिलाफ कार्रवाई तथा अपने सभी सरकारी अभिलेखों को तत्काल सही कराने की मांग की है। उनका कहना है कि एक प्रशासनिक गलती ने उन्हें सरकारी सुविधाओं से वंचित कर दिया है और उनकी सामाजिक तथा आर्थिक स्थिति पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है। यह मामला सरकारी रिकॉर्ड के रखरखाव और सत्यापन प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े करता है। एक जीवित व्यक्ति का सरकारी दस्तावेजों में मृत दर्ज हो जाना न केवल प्रशासनिक लापरवाही को दर्शाता है, बल्कि आम नागरिकों के अधिकारों और सुविधाओं पर पड़ने वाले उसके गंभीर प्रभाव को भी उजागर करता है। नोट: समाचार के साथ प्रकाशित फोटो प्रतीकात्मक है तथा एआई तकनीक की सहायता से तैयार की गई है। इसका वास्तविक घटना या संबंधित व्यक्ति से प्रत्यक्ष संबंध नहीं है।

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