प्रेमी की हत्या में दंपति सहित तीन को उम्र कैद: अदालत ने 1.80 लाख रुपये जुर्माना भी लगाया; अदा न करने पर अतिरिक्त कारावास

Nov 28, 2025 - 18:37
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प्रेमी की हत्या में दंपति सहित तीन को उम्र कैद: अदालत ने 1.80 लाख रुपये जुर्माना भी लगाया; अदा न करने पर अतिरिक्त कारावास

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प्रेमी की हत्या में दंपति सहित तीन को उम्र कैद: अदालत ने 1.80 लाख रुपये जुर्माना भी लगाया; अदा न करने पर अतिरिक्त कारावास

फर्रुखाबाद । फर्रुखाबाद में प्रेमी की हत्या कर सबूत मिटाने के मामले में विशेष दस्यु प्रभावित क्षेत्र न्यायाधीश शैलेंद्र सचान ने प्रेमिका के माता-पिता और एक साथी को दोषी करार दिया है। अदालत ने प्रेमिका के पिता धर्मेंद्र चौहान, मां उमा चौहान और साथी सच्चिदानंद उर्फ मनोज को उम्रकैद की सज़ा सुनाई है। दोषियों पर 1.80 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है। यह मामला चार साल पुराना है। फतेहगढ़ के ग्राम सरह निवासी कन्हैयालाल अवस्थी पुत्र श्रीराम अवस्थी ने पुलिस को दी गई तहरीर में बताया था कि उनका पुत्र अंकित अवस्थी नोएडा में काम करता था। अंकित का धर्मेंद्र चौहान की पुत्री से प्रेम प्रसंग चल रहा था, जिसे लेकर यह घटना हुई। भाईदूज के दिन 6 नवंबर 2021 को अंकित घर आया।

 अगले दिन वह गांव के कुछ अन्य लड़कों के साथ नोएडा जाने के लिए निकला। पांचाल घाट चौराहे पर वह टेंपो से उतरकर धर्मेंद्र चौहान के भागुआ नंगला गांव में है चला गया। गांव के अन्य लड़के टेंपो से फर्रुखाबाद की ओर चले गए। शाम को अंकित ने अपने पिता से फोन पर बात की बताया वह धर्मेंद्र चौहान के मकान पर है। इसके बाद उसका फोन स्विच ऑफ हो गया। अगली सुबह जब गांव के लड़कों से पता किया गया, तो उन्होंने बताया कि अंकित उनके साथ नहीं आया। कन्हैयालाल ने धर्मेंद्र चौहान को फोन किया, तो उनकी पत्नी उमा चौहान ने फोन उठाया, लेकिन कोई संतोषजनक जवाब नहीं दिया। इसके बाद कन्हैयालाल धर्मेंद्र चौहान के घर पहुँचे देखा कि मकान पर ताला लगा था और उसके बगल में ताज़ी मिट्टी खुदी पड़ी थी।

उन्हें बाद में पता चला कि धर्मेंद्र चौहान, उमा चौहान और प्रशांत ने मिलकर उनके बेटे अंकित की हत्या कर दी है। पुलिस ने तहरीर के आधार पर मुकदमा दर्ज किया। विवेचना के दौरान साक्ष्य और गवाहों के आधार पर प्रशांत का नाम अलग कर दिया गया। विवेचक ने धर्मेंद्र चौहान, उमा चौहान और सच्चिदानंद उर्फ मनोज के खिलाफ न्यायालय में आरोप पत्र दाखिल किया। मामले की सुनवाई करते हुए विशेष न्यायाधीश शैलेंद्र सचान ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनीं और गवाहों व सबूतों को मद्देनजर रखते हुए तीनों को हत्या और सबूत मिटाने का दोषी ठहराया।

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SuragBureau

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