फर्रुखाबाद: आधी रात JCB से ढहाया मकान, सोते दंपती बाल-बाल बचे
फर्रुखाबाद के कम्पिल में संपत्ति विवाद के चलते आधी रात JCB से मकान की दीवार गिराने का मामला सामने आया है। दंपती ने पुलिस पर गंभीर आरोप लगाए हैं।
फर्रुखाबाद जिले के कम्पिल थाना क्षेत्र के मांझगांव पश्चिम, वार्ड संख्या छह में एक 35 साल पुराने पुश्तैनी मकान को लेकर उपजा विवाद अब एक गंभीर मोड़ पर पहुंच गया है। मकान के मालिकाना हक और कब्जे को लेकर चल रही कानूनी लड़ाई के बीच, बीती रात एक ऐसी घटना घटी जिसने पूरे इलाके में हड़कंप मचा दिया है। पीड़ित दंपती का आरोप है कि आधी रात को जेसीबी मशीन का इस्तेमाल कर उनके घर की दीवार गिरा दी गई, जबकि वे उसी के पास सो रहे थे।
न्यायालय में विचाराधीन है मामला
पीड़िता अनीता सक्सेना पत्नी राकेश कुमार सक्सेना ने पुलिस अधीक्षक को दिए प्रार्थना पत्र में बताया कि उनका परिवार दशकों से इस मकान में रह रहा है। उनके पास 1978-79 से नगर पंचायत द्वारा लगाए गए हाउस टैक्स और जलकर की रसीदें मौजूद हैं। वर्तमान में इस संपत्ति को लेकर दीवानी न्यायालय में मुकदमा संख्या 80/2025 विचाराधीन है। महिला का कहना है कि वे न्यायालय के हर आदेश का पालन करने के लिए तैयार हैं, लेकिन इसके बावजूद बलपूर्वक कार्रवाई की गई।
आधी रात को हुई घटना
महिला के अनुसार, 10 और 11 सितंबर की मध्यरात्रि करीब 2:30 से 2:45 बजे के बीच कुछ लोग जेसीबी और पुलिस की गाड़ी लेकर उनके दरवाजे पर पहुंचे। आरोप है कि पुलिस बल की मौजूदगी में जेसीबी मशीन से मकान की मुख्य दीवार गिरा दी गई। उस समय दंपती दीवार के ही करीब सो रहे थे। दीवार गिरने की तेज आवाज और मलबे के गिरने से उनकी नींद खुली और वे बाल-बाल बच गए। यदि वे थोड़ा और वहां रुके होते, तो एक बड़ा हादसा हो सकता था।
पुलिस की भूमिका पर उठे सवाल
पीड़िता ने आरोप लगाया है कि घटना के बाद मौके पर पहुंचे पुलिसकर्मी उन्हें और उनके पति को बातचीत में उलझाए रहे, जिसका लाभ उठाकर जेसीबी चालक वहां से फरार हो गया। उन्होंने स्थानीय पुलिस पर पक्षपातपूर्ण व्यवहार का आरोप लगाते हुए कहा कि 7 सितंबर को भी उनके पति को थाने बुलाकर मकान खाली करने का दबाव बनाया गया था। उन्होंने कम्पिल थाने के एक दरोगा पर भी गंभीर आरोप लगाए हैं।
सीसीटीवी फुटेज से खुलासे की उम्मीद
अनीता सक्सेना ने दावा किया है कि उनके पास इस पूरी घटना के सीसीटीवी फुटेज मौजूद हैं, जो पुलिस की कथित संलिप्तता और जेसीबी द्वारा की गई तोड़फोड़ की पुष्टि करते हैं। उन्होंने पुलिस अधीक्षक से मांग की है कि मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए, दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई हो और उनके परिवार की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए।
फिलहाल, यह मामला एक तरफ कानूनी दांव-पेच और दूसरी ओर पुलिस की कथित मनमानी के आरोपों के बीच उलझ गया है। हालांकि, पुलिस की ओर से इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। अब देखना यह होगा कि सीसीटीवी फुटेज और दस्तावेजों की जांच के बाद प्रशासन इस मामले में क्या रुख अपनाता है। स्थानीय प्रशासन ने इस पूरे घटनाक्रम को गंभीरता से लेते हुए जांच के आदेश देने की बात कही है, ताकि सत्य सामने आ सके और पीड़ित परिवार को न्याय मिल सके।
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