बाढ़ और बारिश से फर्रुखाबाद में किसानों की बढ़ी मुसीबतें

फर्रुखाबाद में गंगा और रामगंगा का जलस्तर बढ़ने से तटीय क्षेत्रों में दोबारा बाढ़ का खतरा, धान व उड़द की फसलें बर्बाद, किसानों पर आर्थिक संकट।

Sep 30, 2026 - 21:30
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बाढ़ और बारिश से फर्रुखाबाद में किसानों की बढ़ी मुसीबतें

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पहाड़ी और मैदानी क्षेत्रों में पिछले कुछ दिनों से हो रही लगातार भारी बारिश ने उत्तर प्रदेश के फर्रुखाबाद जिले में जनजीवन को फिर से अस्त-व्यस्त कर दिया है। गंगा और रामगंगा नदियों का जलस्तर तेजी से बढ़ रहा है, जिससे तटीय इलाकों के ग्रामीणों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। करीब डेढ़ महीने पहले आई भीषण बाढ़ की विभीषिका से उबरने की कोशिश कर रहे लोगों के लिए यह स्थिति किसी नए संकट से कम नहीं है। नदियों के उफान पर होने के कारण निचले इलाकों में रहने वाले लोग एक बार फिर अपनी सुरक्षा को लेकर चिंतित हैं।

संपर्क मार्गों पर मंडराया खतरा

जलस्तर में हो रही निरंतर वृद्धि के कारण कई गांवों के मुख्य संपर्क मार्ग फिर से जलमग्न होने लगे हैं। अमैयापुर की पुलिया के ऊपर से पानी का बहाव शुरू हो चुका है, जो आसपास के कई गांवों को जोड़ने वाली मुख्य कड़ी है। स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि यदि पानी का यह स्तर इसी गति से बढ़ता रहा, तो आने वाले दिनों में आवागमन पूरी तरह बाधित हो सकता है। लोग अब पहले की तरह ही नदी के बढ़ते पानी पर बारीकी से नजर रख रहे हैं ताकि समय रहते सुरक्षित स्थानों की ओर प्रस्थान किया जा सके।

फसलों पर दोहरी मार

बाढ़ और बारिश की इस दोहरी मार ने किसानों की कमर तोड़ दी है। बाढ़ के दौरान तटीय इलाकों में खड़ी फसलें पहले ही नष्ट हो चुकी थीं, जिसके बाद किसानों ने ऊंचे स्थानों पर बची-खुची फसलों से कुछ उम्मीदें संजो रखी थीं। दुर्भाग्यवश, हालिया लगातार बारिश ने उन उम्मीदों पर भी पानी फेर दिया है। किसानों ने अपनी खून-पसीने की कमाई और कर्ज लेकर जो फसलें तैयार की थीं, वे अब खेतों में सड़ने की कगार पर हैं।

  • धान की फसल: लगभग तैयार धान की फसल खेतों में गिरकर पूरी तरह चौपट हो गई है।
  • उड़द और तिली: खेतों में लंबे समय तक जलभराव रहने के कारण उड़द और तिली की फसलें भी खराब हो गई हैं, जिससे किसानों को भारी नुकसान हुआ है।

इस नुकसान के चलते क्षेत्र के किसानों के सामने अब आर्थिक संकट गहराने लगा है। फसलें बर्बाद होने से उनकी साल भर की मेहनत बेकार हो गई है, जिसका सीधा असर उनके परिवार के भरण-पोषण पर पड़ेगा।

प्रशासनिक सतर्कता की आवश्यकता

ग्रामीणों की चिंता इस बात को लेकर भी है कि यदि ऊपरी बांधों या बैराजों से और पानी छोड़ा जाता है, तो निचले इलाकों में हालात दोबारा गंभीर हो सकते हैं। पहले ही बाढ़ की तबाही झेल चुके लोग अब अपने घरों, रास्तों और बची हुई फसलों को बचाने के लिए चिंतित हैं। ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि नदियों के जलस्तर और प्रभावित गांवों की स्थिति पर निरंतर निगरानी रखी जाए। उनका मानना है कि यदि प्रशासन समय रहते सतर्कता बरते और बचाव कार्यों की उचित व्यवस्था करे, तो संभावित बड़े नुकसान को टाला जा सकता है। वर्तमान में क्षेत्र के लोग एक बार फिर अनिश्चितता के माहौल में जीने को मजबूर हैं।

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SuragBureau

Surag Bureau पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं और स्थानीय व राष्ट्रीय मुद्दों पर समाचार लेखन करते हैं। हमारा उद्देश्य पाठकों तक सटीक, निष्पक्ष और विश्वसनीय जानकारी पहुंचाना हैं।

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