फर्रुखाबाद: राशन घोटाले में कोटेदार पर एफआईआर, 140 कुंतल खाद्यान्न गायब
फर्रुखाबाद के अहमदपुर देवरिया में राशन वितरण में 140 कुंतल की हेराफेरी पर कोटेदार और उसके बेटे पर मुकदमा दर्ज, लाइसेंस निरस्त।
फर्रुखाबाद जिले में गरीब और जरूरतमंद परिवारों के राशन में कथित तौर पर बड़े पैमाने पर की गई हेराफेरी का मामला सामने आया है। कमालगंज विकासखंड की ग्राम पंचायत अहमदपुर देवरिया में उचित दर की दुकान पर की गई औचक जांच के बाद जिला प्रशासन ने सख्त कदम उठाते हुए कोटेदार का अनुबंध निरस्त कर दिया है। इस मामले में कोटेदार मीना देवी और उनके पुत्र अंकित कटियार के खिलाफ आवश्यक वस्तु अधिनियम-1955 की धारा 3/7 के तहत थाना कोतवाली जहानगंज में एफआईआर दर्ज की गई है।
जांच में सामने आई खाद्यान्न की भारी कमी
राशन वितरण में अनियमितताओं की लगातार मिल रही शिकायतों के बाद पूर्ति निरीक्षक सदर ने स्थानीय स्तर पर गहन जांच की। इस दौरान दुकान के अभिलेखों और वास्तविक स्टॉक का मिलान किया गया, जिससे सरकारी वितरण व्यवस्था में बड़ी सेंध का खुलासा हुआ। रिपोर्ट के मुताबिक, स्टॉक में 40.611 कुंतल गेहूं, 65.149 कुंतल चावल और 34.400 कुंतल बाजरा की भारी कमी पाई गई। इसके साथ ही 29 किलोग्राम चीनी भी गायब मिली। कुल मिलाकर 140.160 कुंतल खाद्यान्न का स्टॉक कम पाया जाना विभागीय अधिकारियों के लिए चिंता का विषय बना हुआ है।
प्रशासन की सख्त कार्रवाई
जांच रिपोर्ट को जिलाधिकारी के समक्ष पेश किया गया, जिसके बाद 22 सितंबर 2026 को मीना देवी की दुकान का अनुबंध तत्काल प्रभाव से निरस्त करने का आदेश जारी हुआ। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) का मुख्य उद्देश्य समाज के अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति तक रियायती दरों पर अनाज पहुंचाना है, और इसमें किसी भी प्रकार की कोताही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
अन्य विक्रेताओं के लिए चेतावनी
इस घटना के बाद जिले के अन्य राशन विक्रेताओं में भी हड़कंप मच गया है। जिला पूर्ति अधिकारी ने सभी उचित दर विक्रेताओं को सख्त निर्देश जारी किए हैं कि वे निर्धारित नियमों का पालन करें और पात्र राशनकार्ड धारकों को उनके हक का पूरा राशन उपलब्ध कराएं। अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि यदि भविष्य में राशन वितरण में कटौती, कालाबाजारी या हेराफेरी की शिकायत मिलती है, तो संबंधित विक्रेता के खिलाफ न केवल विभागीय कार्रवाई की जाएगी, बल्कि उन पर कठोर कानूनी मुकदमा भी दर्ज कराया जाएगा।
पारदर्शिता और निगरानी की आवश्यकता
अहमदपुर देवरिया की इस कार्रवाई ने यह साबित कर दिया है कि जिला प्रशासन राशन वितरण व्यवस्था में पारदर्शिता लाने के लिए पूरी तरह गंभीर है। हालांकि, कोटेदार और उनके बेटे पर लगे आरोपों का अंतिम निर्णय कानूनी प्रक्रिया के बाद ही स्पष्ट होगा, लेकिन इस घटना ने सार्वजनिक वितरण प्रणाली की निगरानी व्यवस्था पर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। मुख्य बिंदु जो इस मामले को गंभीर बनाते हैं:
- सार्वजनिक वितरण प्रणाली के तहत आवंटित 140 कुंतल से अधिक अनाज का गायब होना।
- अभिलेखों और वास्तविक स्टॉक में बड़ा अंतर मिलना।
- कोटेदार के पारिवारिक सदस्यों की संलिप्तता की पुष्टि।
- प्रशासन द्वारा लाइसेंस निरस्तीकरण और कानूनी प्राथमिकी दर्ज करना।
फिलहाल, प्रशासन ने वितरण केंद्रों पर निगरानी बढ़ाने और राशन वितरण के दौरान पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए अतिरिक्त उपाय करने की बात कही है। स्थानीय निवासियों का कहना है कि यदि समय रहते ऐसी अनियमितताओं पर लगाम नहीं लगाई गई, तो इसका सीधा असर गरीब परिवारों के चूल्हों पर पड़ता है।
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