खबर का असर: समैचीपुर चितार में पहुंची राहत, रेस्क्यू अभियान पूरा

Sep 07, 2026 - 21:11
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खबर का असर: समैचीपुर चितार में पहुंची राहत, रेस्क्यू अभियान पूरा

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खबर का असर: समैचीपुर चितार में पहुंची राहत, रेस्क्यू अभियान पूरा

एक दिन में 15 पक्के मकान गंगा में समाने के बाद प्रशासन ने संभाला मोर्चा, प्रभावित परिवारों को बांटी राहत व भोजन सामग्री

कायमगंज/शमसाबाद। गंगा की बाढ़ और तेज कटान से प्रभावित समैचीपुर चितार गांव में सोमवार को जिला प्रशासन ने राहत एवं रेस्क्यू अभियान चलाया। एक दिन पहले कटान में 15 पक्के मकानों के गंगा में समा जाने और कई परिवारों के बेघर होने की खबर सामने आने के बाद प्रशासन ने गांव में पहुंचकर स्थिति का जायजा लिया। अधिकारियों की मौजूदगी में रेस्क्यू अभियान पूरा कराया गया और प्रभावित परिवारों को राहत व भोजन सामग्री वितरित की गई। राहत वितरण के दौरान अपर जिलाधिकारी फर्रुखाबाद अरुण कुमार, क्षेत्राधिकारी मोहम्मदाबाद अजय वर्मा और नायब तहसीलदार मोहम्मद हसीन मौके पर मौजूद रहे। अधिकारियों ने बाढ़ प्रभावित ग्रामीणों से उनकी समस्याओं की जानकारी ली और जरूरतमंद परिवारों तक राहत सामग्री पहुंचाई। राहत सामग्री मिलने से ग्रामीणों को तत्काल कुछ राहत मिली है।

समैचीपुर चितार में गंगा का कटान लगातार गंभीर होता जा रहा है। रविवार को एक ही दिन में करीब 15 पक्के मकान गंगा की धारा में समा गए थे। इससे पहले शनिवार को भी तीन मकान कटान की चपेट में आए थे। लेखपाल के अनुसार 16 अगस्त से अब तक करीब 35 पक्के मकान और 25 झोपड़ियां कटान से प्रभावित हो चुकी हैं। मकानों के गंगा में समाने से कई परिवार बेघर हो गए हैं। प्रभावित ग्रामीण पड़ोसियों, परिचितों और रिश्तेदारों के यहां शरण लेने को मजबूर हैं। गांव चारों ओर से बाढ़ के पानी से घिरा होने के कारण भोजन, पेयजल, ईंधन और स्वास्थ्य सुविधाओं को लेकर भी ग्रामीणों की परेशानी बढ़ गई थी। ग्रामीणों ने बताया कि करीब एक माह पहले प्रशासन की ओर से गांव में 414 पैकेट राशन सामग्री उपलब्ध कराई गई थी, जो कुछ ही दिनों में समाप्त हो गई। इसके बाद पर्याप्त राहत सामग्री नहीं पहुंचने से प्रभावित परिवारों के सामने भोजन का संकट खड़ा हो गया था। लगातार बारिश के कारण ईंधन गीला होने से खाना पकाने में भी दिक्कत हो रही थी। ग्रामीणों ने गर्भवती महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गों की सुरक्षा को लेकर भी चिंता जताई। उनका कहना था कि स्वास्थ्य शिविर लगाए जाने के बाद दोबारा मेडिकल टीम नहीं पहुंची। ग्रामीणों की समस्याओं और लगातार हो रहे कटान की जानकारी मिलने के बाद जिला प्रशासन ने सोमवार को तत्काल कार्रवाई की। अधिकारियों की निगरानी में रेस्क्यू अभियान पूरा कराया गया और प्रभावित परिवारों को राहत व भोजन सामग्री उपलब्ध कराई गई। हालांकि, गंगा का कटान अब भी ग्रामीणों के लिए सबसे बड़ी चिंता बना हुआ है।

ग्रामीणों ने राहत सामग्री की नियमित व्यवस्था करने के साथ ही कटान रोकने के लिए प्रभावी और स्थायी उपाय किए जाने की मांग की है, ताकि बचे हुए मकानों और परिवारों को उजड़ने से बचाया जा सके।

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SuragBureau

Surag Bureau पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं और स्थानीय व राष्ट्रीय मुद्दों पर समाचार लेखन करते हैं। हमारा उद्देश्य पाठकों तक सटीक, निष्पक्ष और विश्वसनीय जानकारी पहुंचाना हैं।

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