95 साल की दादी को कांवड़ में बैठाकर 80 किमी पैदल निकला पोता, बोला- मन्नत पूरी हुई तो दादी को कराऊंगा गंगाजल से अभिषेक
95 साल की दादी को कांवड़ में बैठाकर 80 किमी पैदल निकला पोता, बोला- मन्नत पूरी हुई तो दादी को कराऊंगा गंगाजल से अभिषेक
फर्रुखाबाद/अलीगंज। शिवभक्ति और बुजुर्ग दादी के प्रति पोते के प्रेम की अनोखी मिसाल इन दिनों चर्चा का विषय बनी हुई है। एटा जिले के अलीगंज थाना क्षेत्र के गांव नंदराला निवासी 20 वर्षीय शनि कुमार अपनी 95 वर्षीय दादी नन्ही देवी को कांवड़ में बैठाकर करीब 80 किलोमीटर की पैदल यात्रा पर निकल पड़े हैं। पोते का यह अनोखा संकल्प देखकर रास्ते में मिलने वाले लोग भी भावुक हो उठे और उसे ‘कलियुग का श्रवण कुमार’ कहकर सराहना कर रहे हैं। शनि कुमार ने बीते शनिवार को फर्रुखाबाद के पांचाल घाट पहुंचकर गंगा से जल भरा और इसके बाद अपनी दादी को कांवड़ के एक पलड़े में बैठाकर यात्रा शुरू कर दी। कांवड़ के दूसरे पलड़े में 51 लीटर गंगाजल रखा गया है। दादी को साथ लेकर पैदल चल रहे शनि का कहना है कि उन्होंने मन्नत पूरी होने पर अपनी दादी को कांवड़ में बैठाकर गंगाजल अर्पित कराने का संकल्प लिया था।
यात्रा पांचाल घाट से शुरू होकर फैजबाग और कायमगंज होते हुए अलीगंज क्षेत्र के नंदराला गांव तक पहुंचनी है। रविवार देर शाम तक शनि और उनके साथ चल रहा जत्था कायमगंज पहुंच चुका था। करीब 80 किलोमीटर की दूरी को लगभग 48 घंटे में पूरा करने का प्रयास किया जा रहा है। सोमवार को गांव के शिव मंदिर में गंगाजल चढ़ाकर पूजा-अर्चना की जाएगी। इस अनोखी कांवड़ यात्रा में शनि अकेले नहीं हैं। उनके भाई अजय और अर्जुन समेत गांव और रिश्तेदारी के करीब 40 लोग भी उनके साथ कदम से कदम मिलाकर चल रहे हैं। यात्रा के साथ चल रहे ट्रैक्टर पर डीजे लगा हुआ है, जिस पर लगातार शिव भजनों की गूंज से पूरा माहौल भक्तिमय बना हुआ है। कांवड़ में 95 वर्षीय दादी को सम्मानपूर्वक बैठाकर इतनी लंबी दूरी तय कर रहे शनि को देखकर रास्ते में लोगों की भीड़ जुट रही है। कई लोग रुककर इस अनोखी यात्रा को देखते और पोते-दादी के इस भावनात्मक रिश्ते की प्रशंसा करते नजर आए। शनि की यह यात्रा जहां आस्था और संकल्प की मिसाल बनी हुई है, वहीं दादी के प्रति उनके प्रेम ने इसे और खास बना दिया है।
उम्र के इस पड़ाव पर दादी को अपने साथ लेकर शिवधाम तक पहुंचाने का पोते का जज्बा लोगों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है। यात्रा में शामिल लोग लगातार ‘हर-हर महादेव’ और ‘बम-बम भोले’ के जयकारे लगाते हुए आगे बढ़ रहे हैं। शनि की इस अनोखी कांवड़ यात्रा ने साबित कर दिया कि आस्था के साथ जब परिवार का प्रेम जुड़ जाए तो कठिन से कठिन सफर भी संकल्प और हौसले के आगे छोटा पड़ जाता है।
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