फर्रुखाबाद: जिलाधिकारी की अध्यक्षता में जिला स्तरीय पंच सम्मेलन आयोजित
फर्रुखाबाद में 'विकसित भारत-रोजगार एवं आजीविका मिशन' पर आयोजित पंच सम्मेलन में पंचायतों की जवाबदेही, पारदर्शिता और सामाजिक ऑडिट पर विशेष प्रशिक्षण दिया गया।
फर्रुखाबाद के विकास भवन सभागार में ग्राम्य विकास विभाग के निर्देशानुसार 'विकसित भारत-रोजगार एवं आजीविका मिशन (ग्रामीण) अधिनियम-2025' के क्रियान्वयन हेतु एक महत्वपूर्ण जिला स्तरीय पंच सम्मेलन का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में त्रिस्तरीय पंचायत राज संस्थाओं के निर्वाचित प्रतिनिधियों, प्रशासनिक अधिकारियों और मैदानी स्तर के कर्मचारियों ने सक्रिय भागीदारी निभाई। सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण विकास योजनाओं को अधिक प्रभावी, पारदर्शी और जवाबदेह बनाना था।
प्रशिक्षण के मुख्य बिंदु और अधिनियम की विशेषताएं
जिलाधिकारी मेधा रूपम की अध्यक्षता में दो चरणों में संपन्न हुए इस सम्मेलन में अधिनियम के विभिन्न आयामों पर गहन चर्चा की गई। विशेषज्ञों ने प्रतिभागियों को बताया कि इस मिशन का मूल विजन ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ करना है। प्रशिक्षण के दौरान प्रमुख रूप से निम्नलिखित विषयों पर प्रकाश डाला गया:
- पंचायत राज संस्थाओं की भूमिका और उनके वैधानिक दायित्व।
- विकसित ग्राम पंचायत विकास योजनाओं (GPDP) की तैयारी और उनके अनुमोदन की प्रक्रिया।
- परिवारों का पंजीकरण और ग्रामीण रोजगार कार्ड जारी करने की कार्यप्रणाली।
- परिसंपत्तियों का निर्माण, उनका रखरखाव और निगरानी।
जिलाधिकारी ने स्पष्ट किया कि विकास योजनाओं का उद्देश्य केवल कागजी औपचारिकता पूरी करना नहीं, बल्कि धरातल पर बदलाव लाना है। उन्होंने विशेष रूप से राजस्व विभाग के सहयोग से चकमार्गों और सार्वजनिक तालाबों से अतिक्रमण हटाने के निर्देश दिए, ताकि ग्रामीण बुनियादी ढांचे का सुदृढ़ीकरण हो सके।
रोजगार गारंटी में वृद्धि और मजदूरी में संशोधन
मुख्य विकास अधिकारी ने मिशन के तहत किए गए महत्वपूर्ण बदलावों की जानकारी देते हुए बताया कि अब श्रमिक परिवारों को प्रति वित्तीय वर्ष में 100 दिनों के स्थान पर 125 दिनों का रोजगार सुनिश्चित किया जाएगा। साथ ही, श्रमिकों की दैनिक मजदूरी को बढ़ाकर 300 रुपये निर्धारित किया गया है। योजना के अंतर्गत कुल 118 प्रकार के कार्यों को अनुमन्य किया गया है, जिनमें जल संरक्षण, ग्रामीण अवस्थापना और आजीविका संवर्धन से जुड़ी परियोजनाएं शामिल हैं। अधिकारियों को निर्देशित किया गया है कि स्थानीय आवश्यकताओं के अनुसार ही कार्यों का चयन करें ताकि स्थायी परिसंपत्तियों का निर्माण हो सके।
पारदर्शिता और सामाजिक जवाबदेही
सम्मेलन में कार्य की गुणवत्ता और पारदर्शिता पर विशेष जोर दिया गया। जिला विकास अधिकारी ने प्रतिभागियों को 'सोशल ऑडिट' की प्रक्रिया और उसकी अनिवार्यता के बारे में विस्तार से समझाया। उन्होंने कहा कि ग्राम पंचायतों में होने वाले हर कार्य का लेखा-जोखा पारदर्शी होना चाहिए और आम जनता की शिकायतों का समयबद्ध निवारण सुनिश्चित करना संबंधित सचिवों और तकनीकी सहायकों की जिम्मेदारी है।
उपायुक्त (श्रम रोजगार) ने अधिनियम के प्रावधानों को दोहराते हुए कहा कि यह मिशन न केवल रोजगार के अवसर पैदा करेगा, बल्कि ग्रामीण भारत को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक मील का पत्थर साबित होगा। सम्मेलन का समापन इस संकल्प के साथ हुआ कि सभी अधिकारी और जनप्रतिनिधि मिलकर ग्रामीण विकास की गति को और अधिक तीव्र करेंगे, जिससे सरकारी योजनाओं का सीधा लाभ अंतिम छोर पर बैठे व्यक्ति तक पहुंच सके।
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