दुनिया की थाली में परोसा जाएगा फर्रुखाबाद का आलू! डीएम ने बनाई एक्सपोर्ट की नई रणनीति, किसानों की आय बढ़ाने की तैयारी
दुनिया की थाली में परोसा जाएगा फर्रुखाबाद का आलू! डीएम ने बनाई एक्सपोर्ट की नई रणनीति, किसानों की आय बढ़ाने की तैयारी
फर्रुखाबाद/आलू उत्पादन के लिए प्रदेश भर में अपनी अलग पहचान रखने वाला फर्रुखाबाद अब अंतरराष्ट्रीय बाजार में और मजबूत जगह बनाने की तैयारी में है। किसानों को उनकी फसल का बेहतर दाम दिलाने और जिले से सीधे विदेशों तक आलू की सप्लाई बढ़ाने के उद्देश्य से जिलाधिकारी डॉ. अंकुर लाठर ने बड़ी पहल शुरू कर दी है। बुधवार को कलेक्ट्रेट सभागार, फतेहगढ़ में आयोजित बैठक में कृषि एवं प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (एपीडा) के अधिकारियों के साथ आलू के बेहतर विपणन, गुणवत्ता सुधार और निर्यात को लेकर विस्तृत मंथन किया गया। बैठक में जिलाधिकारी ने स्पष्ट कहा कि फर्रुखाबाद के कृषि उत्पादों को राष्ट्रीय ही नहीं बल्कि अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंचाने के लिए सभी जरूरी व्यवस्थाएं तय समय में पूरी की जाएं।
उन्होंने ई-जीएम पोर्टल पर जिले का डाटा शीघ्र अपलोड कराने, उच्च गुणवत्ता वाले बीज उपलब्ध कराने और निर्यात योग्य आलू के उत्पादन को बढ़ावा देने के निर्देश दिए। डीएम ने जिले में केवल आलू उत्पादन, गुणवत्ता संवर्धन और विपणन के लिए एक विशेष किसान उत्पादक संगठन (एफपीओ) गठित करने पर जोर दिया। साथ ही आधुनिक ग्रेडिंग, सॉर्टिंग और पैकेजिंग की व्यवस्था विकसित करने तथा किसानों और व्यापारियों को तकनीकी सहायता उपलब्ध कराने के निर्देश दिए। बैठक में आम उत्पादकों के हित में जिले में मैंगो पल्प यूनिट स्थापित करने की संभावनाओं पर भी चर्चा हुई। अधिकारियों ने बताया कि फर्रुखाबाद में करीब 43,400 हेक्टेयर क्षेत्र में आलू की खेती होती है और हर वर्ष लगभग 15.53 लाख मीट्रिक टन उत्पादन होता है। यही वजह है कि जनपद प्रदेश के प्रमुख आलू उत्पादक जिलों में गिना जाता है। वहीं करीब 16.75 हेक्टेयर क्षेत्र में आम की खेती भी की जा रही है। एपीडा के अधिकारियों ने किसानों को बताया कि विदेशों में 45 से 80 मिलीमीटर आकार के साफ, चिकने, बिना दाग और बिना कटे-फटे आलू की सबसे अधिक मांग रहती है। निर्यातकों को परिवहन भाड़े पर 25 प्रतिशत तक सब्सिडी का लाभ भी मिलता है, जिससे विदेशी बाजार में प्रतिस्पर्धा और मजबूत होती है। बैठक में आलू विकास अधिकारी ने किसानों को वैज्ञानिक खेती अपनाने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों का संतुलित प्रयोग किया जाए तथा वर्मी कम्पोस्ट, गोबर की खाद और ढैंचा जैसी हरित खादों के उपयोग को बढ़ावा दिया जाए। स्प्रिंकलर सिंचाई प्रणाली अपनाने से पानी की बचत के साथ उत्पादन और गुणवत्ता दोनों में सुधार संभव है। जिलाधिकारी ने मिट्टी परीक्षण की रिपोर्ट समय पर किसानों तक पहुंचाने के भी निर्देश दिए। बैठक में यह जानकारी भी दी गई कि फर्रुखाबाद का आलू पहले से ही सऊदी अरब, नेपाल, ओमान, इंडोनेशिया, संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) और श्रीलंका जैसे देशों में निर्यात किया जा रहा है। हाल ही में रूस से 'कुफरी बहार' किस्म के आलू की मांग आई है, जबकि इराक ने भी भारत से आलू आयात को मंजूरी दे दी है। इससे जिले के किसानों के लिए निर्यात के नए अवसर खुलने की उम्मीद बढ़ गई है। एपीडा अधिकारियों ने बताया कि उत्तर प्रदेश में एपीडा से अनुमोदित छह पैकिंग सेंटर संचालित हैं और वाराणसी कार्यालय के माध्यम से किसानों एवं निर्यातकों को तकनीकी मार्गदर्शन, प्रशिक्षण, बाजार विश्लेषण और विपणन संबंधी सहायता उपलब्ध कराई जाती है। उन्होंने जिले का डाटा नियमित रूप से अपडेट करने और तकनीकी टीम को और सक्रिय बनाने पर भी जोर दिया। बैठक में मुख्य विकास अधिकारी सहित कृषि, उद्यान और अन्य संबंधित विभागों के जिला स्तरीय अधिकारी मौजूद रहे। किसानों का मानना है कि यदि बैठक में लिए गए निर्णय धरातल पर लागू होते हैं तो फर्रुखाबाद का आलू अंतरराष्ट्रीय बाजार में नई पहचान बनाएगा और किसानों की आय में उल्लेखनीय वृद्धि होगी।
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