गंगा का बढ़ता जलस्तर, पांचाल घाट से पंडों ने सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया सामान

Jul 13, 2026 - 20:56
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गंगा का बढ़ता जलस्तर, पांचाल घाट से पंडों ने सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया सामान

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गंगा का बढ़ता जलस्तर, पांचाल घाट से पंडों ने सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया सामान

फर्रुखाबाद। जनपद में गंगा का जलस्तर लगातार बढ़ने से तटीय क्षेत्रों में चिंता का माहौल बनने लगा है। पहाड़ी क्षेत्रों में हो रही लगातार मूसलाधार बारिश और ऊपरी बांधों से छोड़े जा रहे पानी के कारण शाम तक गंगा का जलस्तर बढ़कर 136 सेंटीमीटर पहुंच गया। बढ़ते जलस्तर के चलते फर्रुखाबाद के ऐतिहासिक पांचाल घाट की सात सीढ़ियां पूरी तरह पानी में डूब गई हैं, जबकि घाट पर रखे पंडों के तख्तों तक भी पानी पहुंचने लगा है। स्थिति को देखते हुए घाट पर रहने वाले पंडों और गंगा सेवकों ने अपना सामान सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाना शुरू कर दिया है। जानकारी के अनुसार शाम तक पांचाल घाट पर गंगा का मीटर गेज 135.35 सेंटीमीटर दर्ज किया गया था, जो रविवार शाम बढ़कर 136 सेंटीमीटर हो गया। पिछले 48 घंटों में जलस्तर में तेज बढ़ोतरी दर्ज की गई है। गंगा की तेज होती धारा अब किनारों से टकराते हुए आगे बढ़ रही है, जिससे नदी किनारे स्थित खेतों में कटान का खतरा भी बढ़ गया है।

ग्रामीण और किसान नदी की बढ़ती रफ्तार को लेकर चिंतित नजर आ रहे हैं। सिंचाई विभाग के आंकड़ों के अनुसार गंगा के जलस्तर में वृद्धि का प्रमुख कारण नरौरा, बिजनौर और हरिद्वार बैराजों से छोड़ा गया भारी मात्रा में पानी है। नरौरा बैराज से 67,201 क्यूसेक, बिजनौर से 59,688 क्यूसेक तथा हरिद्वार से 53,403 क्यूसेक पानी छोड़ा गया, जिसका असर अब फर्रुखाबाद में दिखाई देने लगा है। पांचाल घाट पर स्नान स्थल जलमग्न होने के बाद गंगा सेवकों ने झोपड़ियां, तख्त और अन्य सामान ऊंचे स्थानों पर पहुंचाना शुरू कर दिया है। घाट पर मौजूद पंडों का कहना है कि यदि जलस्तर इसी गति से बढ़ता रहा तो आने वाले दिनों में घाट का बड़ा हिस्सा पानी में समा सकता है। पंडा गोपाल ने बताया कि पिछले चार दिनों से गंगा का जलस्तर लगातार बढ़ रहा है और अब तक घाट की सात सीढ़ियां पानी में डूब चुकी हैं। वहीं पंडा शोभित ने बताया कि पिछले तीन दिनों से पानी लगातार बढ़ रहा है। बीते दो दिनों में तेजी अधिक रही, जिसके चलते नीचे रखे तख्तों तक पानी पहुंच गया। इसके बाद उन्होंने अपना पूरा सामान सुरक्षित स्थान पर पहुंचा दिया। उधर, रामगंगा नदी में भी शनिवार शाम 10,375 क्यूसेक पानी छोड़ा गया है। हालांकि फिलहाल रामगंगा का जलस्तर अभी खतरे के निशान से नीचे है, लेकिन यदि ऊपरी क्षेत्रों में बारिश का सिलसिला जारी रहा तो आने वाले दिनों में वहां भी जलस्तर बढ़ने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। प्रशासन लगातार गंगा और रामगंगा के जलस्तर पर नजर बनाए हुए है। तटीय क्षेत्रों के लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी गई है, जबकि सिंचाई विभाग और स्थानीय प्रशासन हालात पर निगरानी रखे हुए हैं। यदि जलस्तर में इसी तरह बढ़ोतरी जारी रही तो निचले इलाकों में रहने वाले लोगों की मुश्किलें बढ़ सकती हैं।

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SuragBureau

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