फर्रुखाबाद कलक्ट्रेट में अधिवक्ता से फाइल दिखाने के नाम पर ₹500 लेने का आरोप
फर्रुखाबाद कलक्ट्रेट में अधिवक्ता से फाइल दिखाने के नाम पर ₹500 लेने का आरोप
फर्रुखाबाद/ जिले की कचहरी में भ्रष्टाचार का एक मामला सामने आने के बाद प्रशासनिक महकमे में हड़कंप मच गया है। सिटी मजिस्ट्रेट कार्यालय में तैनात एक लिपिक पर अधिवक्ता से फाइल दिखाने के एवज में रिश्वत लेने का आरोप लगा है। शिकायत को गंभीरता से लेते हुए जिलाधिकारी ने तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिए हैं, जिसके बाद आरोपी लिपिक के निलंबन की संस्तुति कर दी गई है। प्राप्त जानकारी के अनुसार, कचहरी के अधिवक्ता आजम जमा खां ने बुधवार को जिलाधिकारी को लिखित शिकायत देकर पूरे मामले से अवगत कराया।
अधिवक्ता का आरोप है कि वह 23 जून की शाम लगभग चार बजे एक महत्वपूर्ण पत्रावली का अवलोकन करने के लिए सिटी मजिस्ट्रेट कार्यालय पहुंचे थे। इस दौरान वहां तैनात लिपिक शिवशंकर ने बिना ‘खर्चा-पानी’ लिए फाइल दिखाने से इंकार कर दिया। अधिवक्ता का कहना है कि जरूरी कार्य प्रभावित होता देख उन्होंने मजबूरी में आरोपी लिपिक को ₹500 की राशि दी, जिसके बाद उन्हें पत्रावली दिखाई गई। शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया है कि संबंधित फाइलों में छेड़छाड़ किए जाने की आशंका है, जिसकी निष्पक्ष जांच कराए जाने की मांग की गई है। मामले की जानकारी मिलने के बाद जिलाधिकारी ने इसे गंभीर अनियमितता मानते हुए तत्काल कार्रवाई के आदेश जारी किए। जिलाधिकारी के निर्देश पर सिटी मजिस्ट्रेट ने आरोपी लिपिक के निलंबन की संस्तुति संबंधित विभाग को भेज दी है। इस संबंध में सिटी मजिस्ट्रेट पारुल तरार ने बताया कि आरोपी लिपिक शिवशंकर मूल रूप से चकबंदी विभाग का कर्मचारी है, जिसे उनके कार्यालय में संबद्ध किया गया था। उन्होंने बताया कि जिलाधिकारी के निर्देशानुसार निलंबन की संस्तुति एसओसी (सेटलमेंट ऑफिसर कंसोलिडेशन) को भेज दी गई है। अंतिम कार्रवाई संबंधित विभाग द्वारा की जाएगी। कचहरी परिसर में सामने आए इस मामले के बाद अधिवक्ताओं और आम लोगों के बीच चर्चा का माहौल है। वहीं प्रशासन ने स्पष्ट संकेत दिए हैं कि भ्रष्टाचार और रिश्वतखोरी के मामलों में किसी भी कर्मचारी को बख्शा नहीं जाएगा।
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