गुरु पूर्णिमा पर दुर्वासा ऋषि आश्रम में उमड़ा आस्था का सैलाब, अभिषेक गुप्ता ने संतों का लिया आशीर्वाद
गुरु पूर्णिमा पर दुर्वासा ऋषि आश्रम में उमड़ा आस्था का सैलाब, अभिषेक गुप्ता ने संतों का लिया आशीर्वाद
फर्रुखाबाद। गुरु पूर्णिमा के पावन अवसर पर गंगा तट स्थित प्राचीन श्री दुर्वासा ऋषि आश्रम, पांचाल घाट श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक ऊर्जा का केंद्र बना रहा। सुबह से ही आश्रम में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी और भक्तों ने गुरु पूजन कर संतों का आशीर्वाद प्राप्त किया। पूरे आश्रम परिसर में वैदिक मंत्रोच्चार, भजन-कीर्तन और गुरु वंदना से भक्तिमय वातावरण बना रहा। गुरु पूर्णिमा के अवसर पर महाराणा प्रताप सेना (वीर शिरोमणि) के जिला अध्यक्ष एवं सुराग ब्यूरो के विज्ञापन प्रभारी अभिषेक गुप्ता ने श्री दुर्वासा ऋषि आश्रम पहुंचकर परम पूज्य 1008 श्री ब्रह्मचारी जी महाराज एवं महंत श्री ईश्वर दास जी ब्रह्मचारी महाराज का विधिवत पूजन-अर्चन कर आशीर्वाद प्राप्त किया।
उन्होंने संतों को पुष्पमाला अर्पित कर गुरु परंपरा के प्रति अपनी श्रद्धा व्यक्त की। इस अवसर पर अभिषेक गुप्ता ने कहा कि भारतीय संस्कृति में गुरु का स्थान सर्वोच्च है। गुरु ही मनुष्य को अज्ञान के अंधकार से निकालकर ज्ञान, सत्य, धर्म और मानवता के मार्ग पर आगे बढ़ने की प्रेरणा देते हैं। उन्होंने कहा कि गुरु पूर्णिमा गुरु के प्रति श्रद्धा, सम्मान और कृतज्ञता व्यक्त करने का पावन पर्व है। गुरु के मार्गदर्शन से ही व्यक्ति का चरित्र निर्माण होता है और समाज को सही दिशा मिलती है। परम पूज्य संतों ने अपने आशीर्वचन में कहा कि गुरु केवल ज्ञान देने वाला नहीं, बल्कि जीवन को सही दिशा प्रदान करने वाला मार्गदर्शक होता है। गुरु के बताए मार्ग पर चलकर मनुष्य अपने जीवन को संस्कारित, सफल और समाजोपयोगी बना सकता है।
उन्होंने श्रद्धालुओं से धर्म, सेवा, सद्भाव, संस्कार और मानवता के मार्ग पर चलने का आह्वान किया। आश्रम परिसर में पूरे दिन श्रद्धालुओं ने गुरु चरणों में पुष्प अर्पित किए, आशीर्वाद लिया और गुरु महिमा का गुणगान किया। इस अवसर पर भंडारे का भी आयोजन किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण किया। कार्यक्रम के दौरान श्रद्धालुओं ने गुरु महिमा का स्मरण करते हुए कबीरदास का प्रसिद्ध दोहा दोहराया— "गुरु गोविंद दोऊ खड़े, काके लागू पाय। बलिहारी गुरु आपने, गोविंद दियो बताय॥" गुरु पूर्णिमा का यह आयोजन श्रद्धा, सेवा और सनातन संस्कृति के प्रति समर्पण का प्रतीक बना। दुर्वासा ऋषि आश्रम में दिनभर भक्तों की आस्था और उत्साह का अद्भुत संगम देखने को मिला। श्रद्धालुओं ने गुरु के बताए मार्ग पर चलने तथा धर्म एवं समाज सेवा के कार्यों में योगदान देने का संकल्प लिया।
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