फर्रुखाबाद सभासद पति की पिटाई से आक्रोशित सभासदों ने खोला मोर्चा, दरोगा के निलंबन की मांग पर अड़े
सभासद पति की पिटाई से आक्रोशित सभासदों ने खोला मोर्चा, दरोगा के निलंबन की मांग पर अड़े
फर्रुखाबाद/ शहर में एक सभासद पति के साथ दरोगा द्वारा की गई मारपीट का मामला अब तूल पकड़ता जा रहा है। पुलिस अधीक्षक (एसपी) द्वारा आरोपी दरोगा को 'लाइन हाजिर' किए जाने की कार्रवाई से असंतुष्ट सभासदों ने पुलिस प्रशासन के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। शाम शहर की एक धर्मशाला में उत्तर प्रदेश सभासद एसोसिएशन के बैनर तले आयोजित प्रेस वार्ता में सभासदों ने दो टूक चेतावनी दी है कि यदि आरोपी दरोगा को निलंबित नहीं किया गया, तो वे पुलिस का पूर्ण बहिष्कार करेंगे। लाइन हाजिर करना सजा नहीं, दरोगा का इतिहास भी दागदार' प्रेस वार्ता के दौरान सभासदों ने एसपी की कार्रवाई को अपर्याप्त और महज़ एक खानापूर्ति करार दिया। उनका साफ कहना था कि 'लाइन हाजिर' करना कोई सजा नहीं होती।
सभासदों ने शमशाबाद की एक पिछली घटना का हवाला देते हुए कहा कि यदि पूर्व में दरोगा को निलंबित किया गया होता, तो आज वह किसी जनप्रतिनिधि के साथ ऐसा दुर्व्यवहार करने की हिम्मत नहीं जुटा पाता। सभासदों ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि पैसे न मिलने की वजह से सभासद साथी के साथ यह हाथापाई की गई। उन्होंने यह भी दावा किया कि उक्त उपनिरीक्षक (दरोगा) का पिछला इतिहास भी दागदार रहा है।महिला थाने में हुई थी अभद्रता, एकतरफा हुई कार्रवाई संगठन के प्रदेश अध्यक्ष अतुल शंकर दुबे ने घटना की कड़े शब्दों में निंदा करते हुए बताया कि सभासद प्रतिनिधि के साथ महिला थाने में अभद्रतापूर्ण व्यवहार किया गया। पिटाई के बाद पुलिस ने उल्टे एकतरफा कार्रवाई करते हुए धारा 151 के तहत चालान कर दिया। उन्होंने बताया कि तीन दिन पूर्व एसपी से मिलकर ज्ञापन सौंपा गया था, जिसमें विधिक कार्रवाई का आश्वासन मिला था, लेकिन नतीजा केवल लाइन हाजिर के रूप में निकला। वहीं, जिलाध्यक्ष अनिल तिवारी ने कहा कि दरोगा ने सरेआम सभासद पति को पकड़कर थप्पड़ जड़े। उन्होंने जोर देते हुए कहा, "पुलिस को कानूनी कार्रवाई करने का पूरा अधिकार है, लेकिन किसी भी जनप्रतिनिधि या उसके प्रतिनिधि को पीटने का हक कानून किसी को नहीं देता।" पुलिस सत्यापन का करेंगे पूर्ण बहिष्कार आक्रोशित सभासदों ने सर्वसम्मति से यह सख्त फैसला लिया है कि जब तक आरोपी दरोगा का निलंबन नहीं हो जाता, तब तक वे पुलिस प्रशासन का किसी भी स्तर पर कोई सहयोग नहीं करेंगे।
इसके तहत पुलिस की किसी भी प्रकार की सत्यापन आख्या (वेरिफिकेशन रिपोर्ट) पर कोई भी सभासद अपनी रिपोर्ट या हस्ताक्षर नहीं करेगा। इस विरोध प्रदर्शन और प्रेस वार्ता में मुख्य रूप से संतराम बाथम, संजीव बाजपेई, प्रशांत कटिहार, रफी अंसारी, असलम अंसारी, उमेश गौतम, विश्वनाथ राजपूत, अनिल यादव, मृदुल कटिहार, धर्मेंद्र कनौजिया, नन्हे पंडित, सुबोध यादव, आनंद वर्मा, प्रवल त्रिपाठी और अवधेश अग्निहोत्री समेत बड़ी संख्या में अन्य सभासद मौजूद रहे।