एनटीपीसी उत्तरी क्षेत्र ने सशक्त प्रदर्शन एवं सतत विकास को किया प्रदर्शित
एनटीपीसी उत्तरी क्षेत्र ने सशक्त प्रदर्शन एवं सतत विकास को किया प्रदर्शित
एनटीपीसी उत्तरी क्षेत्र (एनआर) ने एनआर मुख्यालय, लखनऊ में आयोजित मीडिया संवाद के दौरान अपने उत्कृष्ट परिचालन प्रदर्शन, सतत विकास पहलों एवं भविष्य की योजनाओं को प्रस्तुत किया। मीडिया प्रतिनिधियों का स्वागत करते हुए श्री दिवाकर कौशिक, क्षेत्रीय कार्यकारी निदेशक (उत्तर), एनटीपीसी लिमिटेड ने श्री एस. एन. पाणिग्रही, मुख्य महाप्रबंधक (मानव संसाधन) एवं अन्य वरिष्ठ अधिकारियों की गरिमामयी उपस्थिति में बताया कि एनटीपीसी भारत के ऊर्जा क्षेत्र में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। कंपनी देश की कुल स्थापित क्षमता का लगभग 16.7% तथा कुल विद्युत उत्पादन का लगभग 24% योगदान देती है और इसकी कुल क्षमता 88 गीगावाट से अधिक है। कंपनी का लक्ष्य वर्ष 2032 तक 149 गीगावाट क्षमता प्राप्त करना है, जिसमें 60 गीगावाट गैर-जीवाश्म ईंधन आधारित क्षमता शामिल है।
29 मार्च 2026 तक, एनटीपीसी उत्तरी क्षेत्र ने 1,10,992 मिलियन यूनिट (एमयू) उत्पादन किया, जो कुल उत्पादन का 25.64% है, तथा 72.4% पीएलएफ प्राप्त किया। रिहंद, सिंगरौली और विंध्याचल जैसे स्टेशन उत्कृष्ट परिचालन प्रदर्शन कर रहे हैं। क्षेत्र ने पिछले तीन वर्षों में शून्य घातक दुर्घटनाओं के साथ उत्कृष्ट सुरक्षा रिकॉर्ड बनाए रखा है। उत्तर प्रदेश में एनटीपीसी अपनी क्षमता का विस्तार कर रहा है। सिंगरौली स्टेज-III (1600 मेगावाट) परियोजना वर्ष 2028 तक पूर्ण होने का लक्ष्य है, जिससे राज्य को महत्वपूर्ण लाभ मिलेगा। उत्तर प्रदेश सरकार ने इस परियोजना से उत्पन्न 100% विद्युत क्रय करने की इच्छा व्यक्त की है। इसके अतिरिक्त, एनटीपीसी ग्रीन एनर्जी लिमिटेड द्वारा उत्तर प्रदेश में 1000 मेगावाट सौर क्षमता विकसित की जा रही है, जिसमें 600 मेगावाट ललितपुर तथा 400 मेगावाट चित्रकूट में स्थापित किए जा रहे हैं। एनटीपीसी स्वच्छ ऊर्जा की दिशा में तेजी से अग्रसर है, जिसमें सौर, जल एवं पवन ऊर्जा का विस्तार, हरित हाइड्रोजन एवं ऊर्जा भंडारण प्रणालियों का विकास शामिल है। प्रमुख पहलों में विंध्याचल में भारत की पहली कार्बन कैप्चर परियोजना, वाराणसी में हरित कोयला परियोजना (नगर निगम अपशिष्ट आधारित) तथा ग्रेटर नोएडा में हाइड्रोजन फ्यूलिंग स्टेशन का विकास शामिल है।
इन पहलों से वाराणसी की स्वच्छता व्यवस्था में सुधार होगा तथा स्वच्छ भारत अभियान में इसकी रैंकिंग बेहतर होगी। कंपनी ने परमाणु ऊर्जा क्षेत्र में भी प्रवेश किया है, जिसमें राजस्थान के माही बांसवाड़ा (2800 मेगावाट) जैसे परियोजनाएँ शामिल हैं, जो स्वदेशी प्रेसराइज्ड हेवी वाटर रिएक्टर (PHWR) तकनीक पर आधारित हैं। डिजिटलीकरण एवं रीयल-टाइम डेटा एनालिटिक्स के माध्यम से परिचालन दक्षता को और सुदृढ़ किया जा रहा है। साथ ही, एनटीपीसी विभिन्न राज्य सरकारों, विशेषकर उत्तर प्रदेश, के साथ परमाणु परियोजनाओं हेतु भूमि, जल एवं आवश्यक स्वीकृतियों के लिए चर्चा कर रहा है। बायोमास उपयोग में उल्लेखनीय प्रगति हुई है, जिसमें एनटीपीसी दादरी एवं झज्जर ने वित्तीय वर्ष 2025-26 में देश के सभी तापीय विद्युत संयंत्रों में सर्वाधिक (5% से अधिक) बायोमास उपयोग दर्ज किया है। पर्यावरणीय अनुपालन के तहत, एनटीपीसी उत्तरी क्षेत्र ने अपने प्रमुख संयंत्रों में फ्लू गैस डी-सल्फराइजेशन (FGD) प्रणालियों का सफलतापूर्वक संचालन प्रारंभ किया है, जिससे सल्फर उत्सर्जन में उल्लेखनीय कमी आई है। कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (CSR) के अंतर्गत, एनटीपीसी उत्तरी क्षेत्र स्वास्थ्य, कौशल विकास, महिला सशक्तिकरण एवं खेलों को बढ़ावा देने के लिए कार्य कर रहा है। आर्चरी एसोसिएशन ऑफ इंडिया के साथ साझेदारी के माध्यम से राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं को सहयोग दिया जा रहा है, जिसमें लखनऊ में आयोजित एनटीपीसी खेलो इंडिया राष्ट्रीय महिला तीरंदाजी प्रतियोगिता शामिल है।
इसके अतिरिक्त, एनआर मुख्यालय द्वारा वन्यजीव संरक्षण हेतु चिड़ियाघरों में पशु गोद लेने एवं आधारभूत सुविधाओं के विकास जैसी पहलें की गई हैं। गर्ल एम्पावरमेंट मिशन (GEM) के अंतर्गत, एनटीपीसी ने अपने परियोजना क्षेत्रों के आसपास वंचित समुदायों की छात्राओं को सशक्त बनाने हेतु कार्य किया, जिससे वित्तीय वर्ष 2025-26 में 718 बालिकाएं लाभान्वित हुईं। एनटीपीसी उत्तरी क्षेत्र ऊर्जा सुरक्षा को सुदृढ़ करने, स्वच्छ ऊर्जा क्षमता बढ़ाने तथा सुरक्षा, स्थिरता और सामुदायिक विकास के उच्चतम मानकों को बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध है।