मैनपुरी: बिना विनियमन शुल्क जमा किए चल रहे 7 ईंट भट्टों पर प्रशासन सख्त
मैनपुरी में विनियमन शुल्क जमा न करने वाले 7 ईंट भट्टों पर प्रशासन ने कार्रवाई की चेतावनी दी है। नियमों का पालन न करने पर होगी सख्त विधिक कार्रवाई।
मैनपुरी जिले में ईंट भट्टा संचालकों के लिए प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया है। अपर जिलाधिकारी श्यामलता आनन्द ने स्पष्ट किया है कि भूतत्व एवं खनिकर्म विभाग द्वारा निर्धारित शासनादेशों का पालन करना प्रत्येक भट्टा संचालक के लिए अनिवार्य है। विशेष रूप से ईंट भट्टा सत्र 2025-26 के लिए विनियमन शुल्क का अग्रिम भुगतान करना नियमों की पहली प्राथमिकता है। प्रशासन के अनुसार, यदि कोई संचालक बिना शुल्क जमा किए अपने भट्टे का संचालन कर रहा है, तो इसे सीधे तौर पर नियमों का उल्लंघन माना जाएगा और उसके विरुद्ध कठोर कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
प्रशासनिक जांच के दौरान यह चौंकाने वाला तथ्य सामने आया है कि जिले में कम से कम 7 प्रमुख ईंट भट्टे ऐसे हैं, जिन्होंने अभी तक विनियमन शुल्क जमा नहीं किया है। इन भट्टा संचालकों ने नियमों को दरकिनार करते हुए उत्पादन कार्य शुरू कर दिया है, जो उत्तर प्रदेश खनिज परिहार नियमावली-2021 के अंतर्गत अवैध है। नियमों के अनुसार, आवेदन पत्र के साथ यह शपथ-पत्र देना भी आवश्यक है कि संबंधित संचालक पर कोई बकाया नहीं है। इन शर्तों की अनदेखी करने वाले संचालकों की सूची तैयार कर ली गई है।
सूचीबद्ध ईंट भट्टे और प्रशासनिक चेतावनी
जिन भट्टा संचालकों ने अभी तक शुल्क जमा नहीं किया है, उनमें प्रमुख रूप से निम्नलिखित नाम शामिल हैं:
- जय बालाजी ब्रिक फील्ड (नन्दुलिया)
- एस.एस. ब्रिक फील्ड (कुरारी)
- बालाजी ब्रिक फील्ड (सैदपुर पडुआ रोड)
- प्रयाग ब्रिक फील्ड (कुरसंण्डा)
- रमेश चन्द्र ईंट उद्योग (मकोया सोनासी)
- शिव शंकर ईंट उद्योग (इस्माइलपुर)
- यादव ब्रिक वर्क्स (जसवंतपुर घिटौली)
इन सभी प्रोपराइटरों को प्रशासन द्वारा चेतावनी दी गई है कि वे निर्धारित समय सीमा के भीतर अपना बकाया विनियमन शुल्क जमा करें। यदि वे ऐसा करने में विफल रहते हैं, तो उप खनिज (मिट्टी) के अवैध खनन और परिवहन के आरोप में उन पर मुकदमा दर्ज किया जा सकता है। प्रशासन ने यह भी स्पष्ट किया है कि वसूली न होने की स्थिति में इस राशि को भू-राजस्व की भांति वसूलने की प्रक्रिया अपनाई जाएगी, जिसके लिए संपत्ति की कुर्की या अन्य विधिक उपाय भी किए जा सकते हैं।
नियमों का पालन क्यों है अनिवार्य?
ईंट भट्टा उद्योग से जुड़े नियमों का उद्देश्य पर्यावरण संरक्षण और खनिजों के व्यवस्थित दोहन को सुनिश्चित करना है। विनियमन शुल्क के माध्यम से सरकार को राजस्व प्राप्त होता है, जिसका उपयोग जनहित और बुनियादी ढांचे के विकास में किया जाता है। साथ ही, शपथ-पत्र की अनिवार्यता यह सुनिश्चित करती है कि कोई भी संचालक अवैध गतिविधियों में लिप्त न हो।
मैनपुरी प्रशासन ने सभी संबंधित संचालकों को यह स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि वे तुरंत प्रभाव से अपने कागजात दुरुस्त करें और बकाया शुल्क जमा कर रसीद प्राप्त करें। प्रशासन की यह मुहिम भविष्य में भी जारी रहेगी ताकि जिले में किसी भी प्रकार के अवैध खनन या नियमों के उल्लंघन को रोका जा सके। अधिकारियों का मानना है कि पारदर्शी और नियमबद्ध कार्यप्रणाली से ही जिले में ईंट उद्योग को सुव्यवस्थित तरीके से संचालित किया जा सकता है। आम जनता से भी अपील की गई है कि यदि उन्हें अपने क्षेत्र में कोई अवैध गतिविधि दिखाई दे, तो वे तत्काल स्थानीय प्रशासन को सूचित करें।
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