अमृतपुर में गंगा का रौद्र रूप: 21 हजार से अधिक लोग बाढ़ की चपेट में
फर्रुखाबाद के अमृतपुर में गंगा का जलस्तर चेतावनी निशान के ऊपर, 21 हजार से अधिक लोग प्रभावित। फसलों का नुकसान और बिजली आपूर्ति बाधित।
फर्रुखाबाद जिले की अमृतपुर तहसील इन दिनों गंगा नदी के विकराल रूप का सामना कर रही है। पिछले दस दिनों से जारी जलस्तर की वृद्धि ने स्थानीय निवासियों के जीवन को बुरी तरह प्रभावित कर दिया है। गंगा का जलस्तर वर्तमान में चेतावनी बिंदु से 25 सेंटीमीटर ऊपर 136.85 मीटर दर्ज किया गया है, जिसके कारण तटीय इलाकों में स्थिति चिंताजनक बनी हुई है। प्रशासन और स्थानीय लोग इस प्राकृतिक आपदा के बीच संघर्ष कर रहे हैं।
प्रभावित आबादी और जनजीवन पर असर
बाढ़ के कारण अब तक क्षेत्र के करीब दो दर्जन से अधिक गांव जलमग्न हो चुके हैं। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, कुल 5,456 परिवारों की 21,160 की आबादी सीधे तौर पर प्रभावित हुई है। आशा की मड़ैया, तीस राम की मड़ैया, माखन नगला, फकरपुर, करनपुर घाट और सबलपुर जैसे गांवों में पानी भरने से जनजीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त है। जलभराव के कारण सड़कों पर आवागमन बाधित है और ग्रामीणों को दैनिक आवश्यकताओं के लिए भी कड़ी मशक्कत करनी पड़ रही है।
कृषि और बुनियादी सुविधाओं को नुकसान
खेती-किसानी पर बाढ़ की मार सबसे अधिक पड़ी है। खेतों में पानी भरने से धान और गन्ने की खड़ी फसलें बर्बाद होने की कगार पर हैं। इसके अलावा, पशुओं के लिए चारे का संकट भी गहरा गया है। बुनियादी सुविधाओं की बात करें तो आठ से अधिक गांवों में बिजली आपूर्ति पूरी तरह से ठप है। बिजली न होने के कारण मोबाइल फोन चार्ज करने और पानी के पंप चलाने जैसी बुनियादी जरूरतों के लिए भी लोगों को भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। अंधेरा होने के बाद इन इलाकों में स्थिति और भी चुनौतीपूर्ण हो जाती है।
ग्रामीणों की स्वतः स्फूर्त पहल
प्रशासनिक मदद के इंतजार के बीच, ग्रामीणों ने अपनी सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए खुद ही कमर कस ली है। दारापुर पट्टी के पास ग्रामीण ट्रैक्टर-ट्रॉली के माध्यम से नावों का इंतजाम करते देखे गए। स्थानीय निवासियों का कहना है कि प्रशासन की ओर से राहत कार्यों की प्रतीक्षा करने के बजाय, आपात स्थिति में सुरक्षित स्थानों तक पहुंचने के लिए नाव ही एकमात्र सहारा है। वे अपने परिवारों और जरूरी सामान को सुरक्षित निकालने के लिए इन नावों का उपयोग कर रहे हैं।
यातायात और प्रशासनिक निगरानी
बाढ़ का पानी अब स्टेट हाईवे के दो प्रमुख स्थानों तक पहुंच चुका है, जिससे आवाजाही पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है। सड़क मार्ग के प्रभावित होने से दूरदराज के क्षेत्रों में राहत सामग्री पहुंचाना भी एक बड़ी चुनौती बन गया है। प्रशासन ने स्थिति पर पैनी नजर रखी हुई है और राजस्व विभाग की टीमें लगातार बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का दौरा कर रही हैं। अधिकारियों ने ग्रामीणों से अपील की है कि वे जलभराव वाले क्षेत्रों में अनावश्यक आवागमन न करें और प्रशासन द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का पालन करें। आने वाले दिनों में यदि जलस्तर में कमी नहीं आती है, तो प्रभावितों के लिए राहत शिविरों की संख्या बढ़ानी पड़ सकती है। स्थानीय प्रशासन ने सभी संबंधित विभागों को सतर्क रहने के निर्देश दिए हैं ताकि किसी भी आपातकालीन स्थिति से तुरंत निपटा जा सके।
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