एमएसएमई को मजबूत करने के लिए सुधारों का अगला चरण
एमएसएमई को मजबूत करने के लिए सुधारों का अगला चरण
सुश्री शोभा करंदलाजे
1 संसद के दोनों सदन में हाल ही में पारित किया गया सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम विकास संसोधन विधेयक, 2026 एक बहुत ही महत्वपूर्ण बदलाव है। एमएसएमई राष्ट्र के विकास में महत्वपूर्ण योगदान देते हैं। पिछले कुछ वर्षों में, एमएसएमई क्षेत्र ने विकास के नए आयाम स्थापित किए हैं। आज 'उद्यम पंजीकरण पोर्टल' पर 9 करोड़ से अधिक एमएसएमई पंजीकृत हैं, जो 40 करोड़ लोगों को रोजगार प्रदान करते हैं। एमएसएमई हमारी आर्थिकी में 31% तथा निर्यात में 50% योगदान देते हैं। माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के विकसित भारत के संकल्प को साकार करने में एमएसएमई क्षेत्र की प्रमुख भागीदारी है। एमएसएमई भारत के विकास के सूत्रधार हैं।
हाल के वर्षों में एमएसएमई क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति हुई है जो 'उद्यम' पर पंजीकृत उद्यमों की संख्या से ही स्पष्ट दिखती है, जो 1 अप्रैल 2023 को 1 करोड़ 65 लाख से बढ़कर 9 करोड़ से अधिक हो गए हैं। 2. वर्ष 2020 में, सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों के वर्गीकरण को, विनिर्माण और सेवा क्षेत्र के बीच के अंतर को समाप्त करके, अधिक व्यापक और समावेशी बनाया गया था। इसके तहत टर्नओवर और निवेश दोनों पर आधारित एक समग्र मानदंड विकसित किया गया। इसके पश्चात वर्ष 2025 में सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों की निवेश सीमा ढ़ाई गुना बढ़ाकर क्रमश: ढ़ाई करोड़, पच्चीस करोड़ और एक सौ पच्चीस करोड़ की गई है एवं टर्नओवर को दो गुना बढ़ाकर क्रमश: दस करोड़, सौ करोड़ और पांच सौ करोड़ किया गया, जिसने इन उद्यमों को पूंजी निवेश बढ़ाने, विकास और तकनीकी को अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया। 3. वित्त की उपलब्धता एमएसएमई क्षेत्र के विकास का सबसे महत्वपूर्ण घटक है।
मंत्रालय एमएसएमई क्षेत्र के लिए बैंक ऋण की उपलब्धता बढ़ाने के लिए लगातार प्रयासरत रहा है और इसके उल्लेखनीय परिणाम दिख रहे हैं। एमएसएमई को प्रदान किया गया बकाया ऋण, वर्ष 2014-15 में 10 लाख करोड़ रुपये था, जो कि अब बढ़कर 38 लाख 35 हजार करोड़ रुपये से अधिक हो गया है। क्रेडिट गारंटी ट्रस्ट फॉर माइक्रो एंड स्मॉल एंटरप्राइजेज' (सीजीटीएमएसई), सूक्ष्म एवं लघु उद्यमों को दिए जाने वाले ऋण पर गारंटी उपलब्ध कराता है। इसके ज़रिए वर्ष 2000 से 2022 के बीच, सूक्ष्म और लघु उद्यमों को दी गई क्रेडिट गारंटी 3 लाख 14 हजार करोड़ रुपये थी, जो पिछले चार वर्षों में अर्थात् 2022-23 से 2025-26 तक बढ़कर 10 लाख 43 हजार करोड़ रुपये से अधिक हो गई। प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम (पीएमईजीपी) के तहत, वित्त वर्ष 2014-15 से अब तक लगभग 8 लाख 34 हजार सूक्ष्म उद्यमों को 24 हजार 903 करोड़ रुपये की मार्जिन मनी सब्सिडी दी गई है, जिससे अनुमानित 75 लाख लोगों के लिए रोजगार के अवसर पैदा हुए हैं। 4. एमएसएमई मंत्रालय की सूक्ष्म और लघु उद्यमों के लिए सार्वजनिक खरीद नीति 2012 के अंतर्गत केंद्रीय मंत्रालय/विभाग/केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र उद्यमों (सीपीएसई) के लिए सूक्ष्म और लघु उद्यमों से सालाना 25% खरीद करना अनिवार्य है; इसमें महिला उद्यमियों के स्वामित्व वाली सूक्ष्म और लघु उद्यमों से 3% और एससी/एसटी उद्यमियों के स्वामित्व वाले सूक्ष्म और लघु उद्यमों से 4% खरीद शामिल है। विगत वर्षों में सूक्ष्म और लघु उद्यमों से खरीद में लगातार वृद्धि हुई है। वित्तीय-वर्ष 2020-21 में, सूक्ष्म और लघु उद्यमों से सार्वजनिक खरीद का मूल्य 40,717 करोड़ रुपये था जो कि वित्तीय-वर्ष 2025-26 में बढ़कर 1,15,801 करोड़ रुपये हो गया है, जो सीपीएसई द्वारा खरीद के लिए लक्षित 25 प्रतिशत की तुलना में 49 प्रतिशत से अधिक है। इसमें एससी/एसटी उद्यमियों के स्वामित्व वाले उद्यमों से 3,984 करोड़ रुपये की खरीद हुई और महिला उद्यमियों के स्वामित्व वाली उद्यमों से 9,059 करोड़ रुपये की खरीद हुई है।
5. एमएसएमई को उनका भुगतान समय पर दिलाने हेतु मंत्रालय ने कई सार्थक प्रयास किए हैं, ट्रेड्स इनमें से एक है। यह भारतीय रिज़र्व बैंक (आरबीआई) द्वारा विनियमित एक डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म है, जिसे भारत में एमएसएमई की लिक्विडिटी (नकदी) संबंधी चुनौतियों तथा कार्यशील पूंजी की आवश्यकताओं को पूरा करने के उद्देश्य से वर्ष 2017 में शुरु किया गया था। ट्रेड्स प्लेटफ़ॉर्म ने एमएसएमई क्षेत्र को मार्च 2026 तक 8,71,000 करोड़ रुपये की इनवॉइस डिसकाउंटिंग के माध्यम से समय पर भुगतान दिलवाया है। ट्रेड्स प्लेटफ़ॉर्म से जुड़े एमएसएमई की संख्या अप्रैल 2022 में 34,430 थी, जो मार्च 2026 तक बढ़कर 2,55,000 से अधिक हो गई है। वहीं, एमएसएमई की इनवॉइस डिसकाउंटिंग की राशि वर्ष 2021-22 में 40,000 करोड़ रुपये से बढ़कर, वित्त वर्ष 2025-26 में 3,47,000 करोड़ रुपये से अधिक हो गई है। ट्रेड्स पर इनवॉइस डिसकाउंटिंग का बढ़ता चलन, भारत सरकार के एमएसएमई के समयबद्ध भुगतान के प्रति संकल्प को दर्शाता है।
6. इसी दिशा में विलंबित भुगतान और उससे जुड़े विवादों के निपटारे हेतु पूरे देश में 161 सूक्ष्म और लघु उद्यम सुविधा परिषद (एमएसईएफसी) स्थापित किए गए हैं। संशोधन में राज्यों को एमएसईएफसी की संरचना तय करने के लिए सक्षम बनाने के लिये प्रावधान लाए गए हैं जिससे आवश्यकतानुसार एमएसईएफसी का गठन किया जा सके। संबंधित पक्षों में समझौते के साथ विवाद सामाधान के पर्याप्त उपाय किए गए हैं। यह संशोधन विधेयक ऑनलाइन विवाद समाधान (ओडीआर) को सक्षम एवं सशक्त बनाता है, ताकि संबंधित पक्षों द्वारा अपने विवादों का समयबद्ध और किफायती तरीके से हल सुनिश्चित किया जा सके। 7. एमएसएमई मंत्रालय महिला उद्यमियों के विकास को बढ़ावा देने के लिए पूर्ण रूप से प्रतिबद्ध है। मंत्रालय की अनेक योजनाओं में महिलाओं के लिए विशेष प्रावधान है। आज उद्यम पोर्टल पर 39% से अधिक एमएसएमई महिलाओं के स्वामित्व में हैं, यानि 3.38 करोड़ के लगभग एमएसएमई महिला स्वामित्व में हैं और जिनकी संख्या में निरंतर वृद्धि हो रही है। क्रेडिट गारंटी योजना के तहत, महिलाओं के लिए 90% तक गारंटी कवरेज है और सालाना गारंटी फीस में 10% तक की छूट प्रदान की जाती है। खरीद और विपणन सहायता योजना के तहत ट्रेड फेयर में महिला उद्यमियों की भागीदारी पर 100% सब्सिडी दी जाती है, जबकि दूसरे उद्यमियों के लिए यह 80% है। पीएमईजीपी में ग्रामीण क्षेत्र की महिलाओं को 35 प्रतिशत व शहरी क्षेत्र की महिलाओं को 25 प्रतिशत की सब्सिडी देने का प्रावधान है। अनुसूचित जाति-अनुसूचित जनजाति का विकास, मंत्रालय की प्राथमिकता है।
आज उद्यम पर 1.24 करोड़ से अधिक एमएसएमई, अनुसूचित जाति-अनुसूचित जनजाति के उद्यमी के स्वामित्व में हैं। राष्ट्रीय अनुसूचित जाति-अनुसूचित जनजाति हब योजना, एमएसएमई मंत्रालय की एक केंद्रीय क्षेत्र की योजना है, जिसे 2016 में माननीय प्रधानमंत्री ने शुरू किया था। इस योजना का उद्देश्य अनुसूचित जाति-अनुसूचित जनजाति के उद्यमियों की क्षमता बढ़ाना और उनके बीच "उद्यमिता संस्कृति" को बढ़ावा देना है। 8. मंत्रालय की इन निरंतर पहलों और प्रयासों को और सशक्त बनाने के लिए एमएसएमई विकास संशोधन विधेयक, 2026 पास किया गया है। इसका उद्देश्य है—एमएसएमई क्षेत्र की मौजूदा चुनौतियों का समाधान करना, प्रशासनिक ढांचे में सुधार करना, व्यापार करने में सुगमता (ईज ऑफ डूइंग बिजनेस) और नियमों का अनुपालन करने को बढ़ावा देना। इसके मुख्य घटक हैं: सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमो के निःशुल्क एवं स्वैच्छिक रजिस्ट्रेशन के लिए एक राष्ट्रीय डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म को अधिसूचित करने की व्यवस्था करना। टर्नओवर और निवेश आधारित एमएसएमई वर्गीकरण को वैधानिक रूप देना। एमएसएमई की लिक्विडिटी (नकदी) से जुड़ी समस्याओं को हल करना। सभी केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र के उद्यमों (सीपीएसई) के लिए यह अनिवार्य किया गया है कि वे एमएसएमई से खरीद के लिए इनवॉइस का निपटान ट्रेड्स के ज़रिए करें। साथ ही, राज्य सरकारों को भी अपने सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों के लिए इसी प्रकार के प्रावधान अपनाने हेतु सशक्त किया गया है; राज्य सरकारों को सूक्ष्म और लघु उद्यम सुविधा परिषद (एमएसईएफसी) की संरचना को युक्तिसंगत बनाकर और अधिक एमएसईएफसी की स्थापना करने की सुविधा प्रदान करना; सूक्ष्म और लघु उद्यमो के पेमेंट में देरी से जुड़े विवादों के तेज़ी से निपटारे के लिए समय-सीमा तय करना; मध्यस्थता से हुए समझौते या आरबिट्रल अवॉर्ड की वसूली 'भूमि राजस्व के बकाया' के रूप में वसूलने की व्यवस्था करना; अगर डिक्री, अवॉर्ड या आदेश को रद्द करने का आवेदन छह महीने से अधिक समय से लंबित है, तो अदालतों को यह आदेश देने का अधिकार देना कि सूक्ष्म और लघु उद्यम सप्लायर्स को अवॉर्ड की गई राशि का कम से कम पचास प्रतिशत भुगतान किया जाए; कुछ प्रावधानों के उल्लंघन को अपराध की श्रेणी से हटाना (डिक्रिमिनलाइज़ करना) और दोषसिद्धि-आधारित जुर्माने की जगह अलग-अलग स्तर के दंड लागू करना, जिसमें पहली बार उल्लंघन पर चेतावनी देना भी शामिल है।
यह संशोधन हितधारकों के साथ व्यापक विचार-विमर्श और संबंधित मुद्दों की सावधानीपूर्वक जांच के बाद किया गया है। समावेशी, टिकाऊ और रोज़गार-प्रधान आर्थिक विकास हासिल करने के लिए एक मज़बूत एमएसएमई सेक्टर ज़रूरी है। ये संशोधन 'विकसित भारत 2047' के विज़न के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता के अनुरूप हैं। इस से उद्यमों के औपचारिकीकरण को बढ़ावा मिलेगा, उनके विस्तार का मार्ग प्रशस्त होगा और वे विकास के 'चैंपियन' बन सकेंगे। (लेखिका केंद्रीय सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम तथा श्रम एवं रोजगार मंत्रालय में राज्य मंत्री हैं।)
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