फर्रुखाबाद: चार साल से बीमार युवक की ट्रेन से कटकर मौत, परिवार में कोहराम
कायमगंज के सोतेपुर गांव में चार साल से बीमार उमेश चंद्र यादव की ट्रेन की चपेट में आने से दर्दनाक मौत। परिवार में मचा कोहराम, पुलिस ने शव पोस्टमार्टम भेजा।
कायमगंज कोतवाली क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले ग्राम सोतेपुर में सोमवार देर शाम एक हृदयविदारक घटना सामने आई, जिसने पूरे गांव को स्तब्ध कर दिया। करीब चार वर्षों से गंभीर बीमारी से जंग लड़ रहे 34 वर्षीय उमेश चंद्र यादव की ट्रेन की चपेट में आने से मौत हो गई। घर से अचानक लापता हुए उमेश की तलाश में जुटे परिजनों को जब उनके हादसे का शिकार होने की खबर मिली, तो घर में मातम पसर गया।
घटना का विवरण
प्राप्त जानकारी के अनुसार, उमेश चंद्र यादव पुत्र मातादीन यादव पिछले लंबे समय से अस्वस्थ चल रहे थे। उनकी पत्नी शशि यादव ने बताया कि बीमारी के इलाज के लिए उन्हें आगरा और कानपुर जैसे बड़े शहरों में ले जाया जाता था। परिवार उनकी देखभाल में पूरी सावधानी बरत रहा था, लेकिन सोमवार की शाम उमेश किसी को बिना बताए घर से निकल गए। परिजनों ने जब उन्हें घर पर नहीं पाया, तो उनकी खोजबीन शुरू कर दी। इसी दौरान नरैनामऊ रेलवे क्रॉसिंग के पास कासगंज-लखनऊ पैसेंजर ट्रेन की चपेट में एक व्यक्ति के आने की सूचना मिली। मौके पर पहुंचे परिजनों ने शव की पहचान उमेश के रूप में की।
पुलिस की कार्रवाई
सूचना मिलने के बाद रेलवे सुरक्षा बल (RPF) के एसआई सुशील कुमार और कायमगंज कोतवाली प्रभारी विनोद कुमार शुक्ला पुलिस बल के साथ घटनास्थल पर पहुंचे। पुलिस ने साक्ष्य जुटाने के बाद शव को कब्जे में ले लिया। कानूनी औपचारिकताओं और पंचनामा की कार्यवाही पूरी करने के बाद शव को पोस्टमार्टम के लिए फतेहगढ़ जिला अस्पताल भेजा गया है। पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच शुरू कर दी है।
परिजनों पर टूटा दुखों का पहाड़
उमेश की असमय मृत्यु ने उनके परिवार की नींव हिला दी है। उनके परिवार में पत्नी के अतिरिक्त एक बेटी और दो छोटे बेटे हैं। पिता के साये के छिन जाने से बच्चों के भविष्य पर संकट के बादल छा गए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि उमेश की बीमारी से परिवार पहले ही आर्थिक और मानसिक तनाव से गुजर रहा था, ऐसे में इस हादसे ने उन्हें पूरी तरह तोड़कर रख दिया है।
गांव में शोक की लहर
सोतेपुर गांव में इस घटना के बाद से सन्नाटा पसरा हुआ है। स्थानीय लोगों ने बताया कि उमेश एक मिलनसार व्यक्ति थे और अपनी बीमारी से लड़ने के लिए निरंतर प्रयास कर रहे थे। घटना की सूचना मिलते ही बड़ी संख्या में ग्रामीण उनके घर पहुंचे और शोक संतप्त परिवार को सांत्वना दी। वर्तमान में, स्थानीय प्रशासन और पुलिस मामले के हर पहलू की जांच कर रहे हैं ताकि यह स्पष्ट हो सके कि वे अचानक रेलवे ट्रैक तक कैसे पहुंचे। यह घटना एक बार फिर उन परिवारों के लिए चिंता का विषय है जहां सदस्य किसी लंबी बीमारी या मानसिक तनाव से जूझ रहे होते हैं, जिसके लिए निरंतर निगरानी और सामुदायिक सहयोग की अत्यंत आवश्यकता होती है।
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