बुद्ध पूर्णिमा पर फर्रुखाबाद में आस्था का महासैलाब, गंगा घाटों पर उमड़ी हजारों श्रद्धालुओं की भीड़

May 1, 2026 - 21:10
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बुद्ध पूर्णिमा पर फर्रुखाबाद में आस्था का महासैलाब, गंगा घाटों पर उमड़ी हजारों श्रद्धालुओं की भीड़
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बुद्ध पूर्णिमा पर फर्रुखाबाद में आस्था का महासैलाब, गंगा घाटों पर उमड़ी हजारों श्रद्धालुओं की भीड़

फर्रुखाबाद। पवित्र पर्व बुद्ध पूर्णिमा के अवसर पर शुक्रवार को फर्रुखाबाद जनपद पूरी तरह भक्ति और आस्था में डूबा नजर आया। जनपद के प्रसिद्ध पांचाल घाट सहित विभिन्न गंगा घाटों पर श्रद्धालुओं का जनसैलाब उमड़ पड़ा। तड़के सुबह चार बजे से ही श्रद्धालु गंगा तट पर पहुंचने लगे और पवित्र गंगा नदी में आस्था की डुबकी लगाकर पुण्य अर्जित किया। सुबह 4 बजे से लेकर करीब 9:30 बजे तक ही तीन हजार से अधिक श्रद्धालु गंगा स्नान कर चुके थे, जबकि दिन चढ़ने के साथ यह संख्या लगातार बढ़ती रही। जनपद के प्रमुख घाट—पांचाल घाट, ढाई घाट, श्रृंगीरामपुर घाट, बरगदिया घाट और अटेना घाट—पर कदम रखने की भी जगह नहीं थी। स्थानीय लोगों के साथ-साथ मैनपुरी, इटावा, औरैया, कन्नौज, हरदोई, शाहजहांपुर और यहां तक कि मध्य प्रदेश के विभिन्न जिलों से भी श्रद्धालु बड़ी संख्या में पहुंचे।

 सुरक्षा के कड़े इंतजाम, प्रशासन रहा अलर्ट भारी भीड़ को देखते हुए पुलिस-प्रशासन पूरी तरह मुस्तैद रहा। घाटों पर सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए थे। किसी भी अनहोनी से बचाव के लिए पुलिस बल के साथ गोताखोरों की तैनाती की गई। गहरे पानी में जाने से रोकने के लिए बैरिकेडिंग की गई और लाउडस्पीकर के माध्यम से लगातार श्रद्धालुओं को सतर्क किया जाता रहा। स्नान के बाद पूजन-अर्चन और दान-पुण्य गंगा स्नान के बाद श्रद्धालुओं ने विधि-विधान से पूजा-अर्चना की। कई स्थानों पर श्री सत्यनारायण भगवान की कथा का आयोजन हुआ, वहीं श्रद्धालुओं ने अपनी श्रद्धा अनुसार दान-पुण्य भी किया। गंगा का विशेष श्रृंगार और ‘पहनावा’ कर भक्तों ने धार्मिक परंपराओं का निर्वहन किया। यातायात व्यवस्था भी रही सुचारूभीड़ के बावजूद यातायात व्यवस्था सुचारू बनाए रखने के लिए प्रशासन ने व्यापक इंतजाम किए थे। पांचाल घाट चौराहा, गंगा पुल और दुर्वासा ऋषि आश्रम मार्ग पर पुलिसकर्मियों की तैनाती रही, जिससे कहीं भी जाम की स्थिति उत्पन्न नहीं हुई और श्रद्धालुओं को आवागमन में सुविधा मिली। आस्था, श्रद्धा और व्यवस्थाओं के समन्वय के बीच फर्रुखाबाद में बुद्ध पूर्णिमा का यह पर्व शांतिपूर्ण और भव्य तरीके से संपन्न हुआ।