ईमानदार चुनाव हुए तो अखिलेश, बेईमानी हुई तो योगी की सरकार बनेगी: राकेश टिकैत

Jun 13, 2026 - 20:55
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ईमानदार चुनाव हुए तो अखिलेश, बेईमानी हुई तो योगी की सरकार बनेगी: राकेश टिकैत

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ईमानदार चुनाव हुए तो अखिलेश, बेईमानी हुई तो योगी की सरकार बनेगी: राकेश टिकैत

फर्रुखाबाद/ भारतीय किसान यूनियन (टिकैत गुट) के राष्ट्रीय प्रवक्ता एवं वरिष्ठ किसान नेता राकेश टिकैत ने आगामी विधानसभा चुनावों को लेकर बड़ा राजनीतिक बयान देते हुए कहा कि यदि प्रदेश में चुनाव पूरी निष्पक्षता और ईमानदारी से कराए गए तो सत्ता परिवर्तन तय है, लेकिन यदि चुनावों में गड़बड़ी और बेईमानी हुई तो वर्तमान सरकार दोबारा सत्ता में लौट सकती है। उनके इस बयान के बाद जिले में राजनीतिक चर्चाओं का दौर तेज हो गया है। किसान नेता राकेश टिकैत भारतीय किसान यूनियन के जिलाध्यक्ष अजय कटियार की माता स्वर्गीय गंगा देवी कटियार के निधन के उपरांत आयोजित शांति पाठ एवं हवन कार्यक्रम में शामिल होने फर्रुखाबाद पहुंचे थे। कार्यक्रम में उन्होंने दिवंगत आत्मा को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए परिजनों को सांत्वना दी।

इसके बाद मीडिया से बातचीत में उन्होंने प्रदेश और देश की राजनीति से लेकर किसानों की समस्याओं तक कई मुद्दों पर खुलकर अपनी बात रखी। टिकैत ने चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता पर सवाल उठाते हुए कहा कि लोकतंत्र में सबसे बड़ा अपराध जनता के मताधिकार का हनन है। उन्होंने आरोप लगाया कि कई चुनावों में लोगों को वोट डालने तक का अवसर नहीं दिया जाता और हारे हुए प्रत्याशियों को विजयी घोषित कर दिया जाता है। उन्होंने कहा कि ऐसी परिस्थितियों में चुनाव की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े होना स्वाभाविक है। साथ ही उन्होंने दावा किया कि प्रदेश में विधानसभा चुनाव तय समय से पहले भी कराए जा सकते हैं। किसान नेता ने किसानों की समस्याओं का जिक्र करते हुए कहा कि प्रदेश में यूरिया और डीएपी जैसी आवश्यक खाद किसानों को सरकारी केंद्रों पर समय से उपलब्ध नहीं हो रही है, जबकि कालाबाजारी में वही खाद आसानी से मिल जाती है। उन्होंने कहा कि किसान खाद लेने, बिजली के लिए और अपनी फसल बेचने तक के लिए घंटों कतारों में खड़ा रहने को मजबूर है। यह स्थिति कृषि प्रधान प्रदेश के लिए बेहद चिंताजनक है।

फर्रुखाबाद और आसपास के क्षेत्र को आलू एवं मक्का उत्पादन का बड़ा केंद्र बताते हुए टिकैत ने कहा कि सरकार द्वारा किसानों की फसलों की खरीद सिर्फ कागजों तक सीमित रह गई है। उन्होंने आरोप लगाया कि बड़ी मात्रा में मक्का आयात किए जाने से स्थानीय किसानों की उपज के दाम गिर गए हैं। इसका सीधा नुकसान किसानों को उठाना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि कृषि क्षेत्र में उत्पादन और बाजार की जरूरतों का वैज्ञानिक आकलन नहीं होने से किसान लगातार घाटे का सामना कर रहा है। राकेश टिकैत ने कहा कि जिन किसानों की जमीनें विभिन्न विकास परियोजनाओं और लिंक एक्सप्रेस-वे के लिए अधिग्रहित की जा रही हैं, उन्हें उचित मुआवजा और अधिकार मिलना चाहिए। यदि किसानों के हितों की अनदेखी की गई तो भारतीय किसान यूनियन आंदोलन का रास्ता अपनाने से पीछे नहीं हटेगी। किसान नेता ने कहा कि देश के सामने रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य और कृषि जैसे गंभीर मुद्दे हैं, लेकिन राजनीतिक दल धार्मिक और सांप्रदायिक मुद्दों को ज्यादा महत्व दे रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि किसानों से किए गए कई वादे आज तक पूरे नहीं हुए। उन्होंने न्यूनतम समर्थन मूल्य को कानूनी गारंटी देने की मांग दोहराते हुए कहा कि किसानों को उनके उत्पाद का लाभकारी मूल्य सुनिश्चित करना सरकार की जिम्मेदारी है।

 कायमगंज क्षेत्र में किसान नेताओं पर दर्ज मुकदमों के सवाल पर टिकैत ने कहा कि वर्तमान समय में जो व्यक्ति खुलकर सच बोलता है, उसके खिलाफ मुकदमे दर्ज कर दिए जाते हैं। उन्होंने कहा कि किसान और पत्रकार दोनों लोकतंत्र के महत्वपूर्ण स्तंभ हैं और उन्हें अपनी बात कहने की स्वतंत्रता मिलनी चाहिए। मुकदमों और दबाव की राजनीति से किसानों का आंदोलन कमजोर नहीं होगा। कार्यक्रम में भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय महासचिव राजवीर सिंह जादौन, पश्चिमी उत्तर प्रदेश अध्यक्ष विजेंद्र यादव, जिलाध्यक्ष चौधरी अरब सिंह, सचिव उदयवीर सिंह समेत विभिन्न जिलों से आए किसान नेता और बड़ी संख्या में कार्यकर्ता मौजूद रहे। राकेश टिकैत के बयानों ने कार्यक्रम के बाद जिले की राजनीतिक और किसान राजनीति में नई बहस छेड़ दी है।

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SuragBureau

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