गंगा एक्सप्रेसवे शुभारंभ से पहले फर्रुखाबाद में बसों का संकट, 70 बसें पीएम की जनसभा में जाएंगी, आम यात्रियों की बढ़ेगी परेशानी
गंगा एक्सप्रेसवे शुभारंभ से पहले फर्रुखाबाद में बसों का संकट, 70 बसें पीएम की जनसभा में जाएंगी, आम यात्रियों की बढ़ेगी परेशानी
फर्रुखाबाद/हरदोई,/प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 29 अप्रैल को प्रस्तावित हरदोई दौरे और बहुप्रतीक्षित गंगा एक्सप्रेसवे के शुभारंभ को लेकर प्रशासन ने पूरी तैयारी कर ली है। इस बड़े आयोजन के लिए फर्रुखाबाद डिपो से 70 रोडवेज बसों को जनसभा ड्यूटी में लगाया गया है। लेकिन इस फैसले का सीधा असर आम यात्रियों पर पड़ने वाला है। आज रात ही रवाना होंगी 70 बसें जानकारी के अनुसार, सभी बसों को 28 अप्रैल की रात ही हरदोई और कन्नौज के ग्रामीण इलाकों में भेज दिया जाएगा। इन बसों का मुख्य काम गांव-गांव से लोगों को जनसभा स्थल तक लाना और कार्यक्रम के बाद सुरक्षित वापस पहुंचाना होगा। दिल्ली-कानपुर रूट पर बढ़ेगी मुसीबत बसों की भारी कमी के चलते फर्रुखाबाद डिपो में सिर्फ 11 बसें ही बचेंगी।
ऐसे में दिल्ली, आगरा और कानपुर जैसे प्रमुख रूटों पर यात्रियों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है। नियमित सेवाएं प्रभावित होंगी यात्रियों को लंबा इंतजार करना पड़ेगा कई रूटों पर बसें न मिलने की स्थिति बन सकती है डग्गामार वाहनों का सहारा रोडवेज बसों की कमी के कारण यात्रियों को मजबूरन निजी और अवैध (डग्गामार) वाहनों का सहारा लेना पड़ सकता है। इससे जहां जेब पर अतिरिक्त बोझ पड़ेगा, वहीं सुरक्षा को लेकर भी सवाल खड़े होंगे। पहले से ही खराब है डिपो की हालत फर्रुखाबाद डिपो की स्थिति पहले से कमजोर है: कुल बसें: 94 अनुबंधित बसें: 24 कंडम बसें: 13 (नीलामी के लिए खड़ी) गंगा एक्सप्रेसवे का महत्व मेरठ से प्रयागराज को जोड़ने वाला गंगा एक्सप्रेसवे प्रदेश का एक महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट है। इसके शुरू होने से 12 जिलों को सीधा फायदा मिलेगा और प्रदेश में कनेक्टिविटी को नया आयाम मिलेगा। अधिकारियों का दावा—व्यवस्था संभालेंगे एआरएम राजेश कुमार ने कहा कि पीएम कार्यक्रम शासन की प्राथमिकता है, इसलिए बसें भेजना जरूरी है।
हालांकि, आम यात्रियों की परेशानी को देखते हुए अनुबंधित बसों को प्रमुख रूटों पर लगाकर व्यवस्था संभालने का प्रयास किया जाएगा। निष्कर्ष: एक तरफ गंगा एक्सप्रेसवे के शुभारंभ को लेकर उत्साह है, तो दूसरी तरफ फर्रुखाबाद में बसों की भारी कमी ने आम यात्रियों की चिंता बढ़ा दी है। आने वाले 1-2 दिन परिवहन व्यवस्था के लिहाज से बेहद चुनौतीपूर्ण रहने वाले हैं।