विभिन्न देशों द्वारा अपनाए गए ऊर्जा संरक्षण के कड़े उपाय
विभिन्न देशों द्वारा अपनाए गए ऊर्जा संरक्षण के कड़े उपाय
मध्य पूर्व में गहराते सैन्य तनाव ने वैश्विक ऊर्जा बाजारों में एक अभूतपूर्व संकट खड़ा कर दिया है। इस स्थिति ने दुनिया भर के देशों को मजबूर किया है कि वे ईंधन संरक्षण के लिए न केवल कड़े कदम उठाएं, बल्कि अनिवार्य क्षेत्रों को प्राथमिकता देते हुए अपनी जनता के लिए ऊर्जा की निरंतर आपूर्ति सुनिश्चित करें। एशिया से लेकर अफ्रीका और यूरोप तक, सरकारों ने ऊर्जा संकट से निपटने के लिए कई असाधारण कदम उठाए हैं। सीमित ईंधन भंडार का अधिकतम उपयोग सुनिश्चित करने के लिए अतिरिक्त सार्वजनिक अवकाश, वर्क-फ्रॉम-होम की अनिवार्यता, ईंधन की राशनिंग और औद्योगिक इकाइयों को बंद करने जैसे कठोर प्रयास किए जा रहे हैं। इस विवरण के माध्यम से इन कदमों की एक रूपरेखा प्रस्तुत की गई है। I.
एशिया 1. श्रीलंका • स्कूलों, विश्वविद्यालयों और गैर-जरूरी सेवाओं से जुड़े सरकारी कर्मचारी के लिए बुधवार को अनिवार्य सार्वजनिक अवकाश घोषित किया गया। • नेशनल फ्यूल पास (QR-आधारित राशनिंग) को पुनः लागू किया गया। निजी वाहनों के लिए ईंधन की सीमा 15 लीटर प्रति सप्ताह और सार्वजनिक परिवहन के लिए 200 लीटर निर्धारित की गई। 2. बांग्लादेश • ऊर्जा संकट के प्रबंधन हेतु शैक्षणिक संस्थानों, विशेषकर विदेशी पाठ्यक्रम आधारित स्कूलों और कोचिंग केंद्रों को बंद कर, शिक्षण कार्य को ऑनलाइन माध्यम से संचालित करने का निर्णय लिया गया है। • ऊर्जा संकट के प्रबंधन हेतु 8 मार्च से देश भर में ईंधन की राशनिंग प्रणाली प्रभावी हो गई है। • ऊर्जा संकट के प्रबंधन हेतु घरेलू उपभोक्ताओं के लिए 5 घंटे की बारी-बारी से बिजली कटौती का प्रावधान किया गया है, ताकि देश के महत्वपूर्ण परिधान निर्यात उद्योग को निर्बाध बिजली आपूर्ति सुनिश्चित की जा सके। • महत्वपूर्ण तेल भंडारों की सुरक्षा और किसी भी प्रकार की क्षति या तोड़फोड़ को रोकने के लिए सैन्य बलों की तैनाती की गई है।
• गैस की भारी किल्लत के कारण सरकार द्वारा संचालित 5 में से 4 उर्वरक संयंत्रों को मजबूरन बंद करना पड़ा है। 3. भूटान • जमाखोरी रोकने के लिए जेरीकैन (डिब्बों) में ईंधन की बिक्री पर प्रतिबंध लगाया गया है। • 'वर्क-फ्रॉम-होम' व्यवस्था लागू। • अनिवार्य एवं आपातकालीन सेवाओं हेतु ईंधन की आपूर्ति को प्राथमिकता के आधार पर सुरक्षित किया गया है। 4. पाकिस्तान • सरकारी कर्मचारियों के लिए चार दिवसीय कार्य सप्ताह और 50 प्रतिशत 'वर्क-फ्रॉम-होम' की व्यवस्था लागू की गई।
• स्कूलों और कॉलेजों को दो सप्ताह के लिए बंद कर दिया गया है। • सरकारी विभागों के लिए ईंधन के आवंटन में 50 प्रतिशत की कटौती की गई। • गैर-जरूरी सेवाओं से जुड़े सरकारी वाहनों को सड़कों से हटा लिया गया है। 5. फिलीपींस • सरकारी कर्मचारियों के लिए चार दिवसीय कार्य सप्ताह की व्यवस्था लागू की गई। • निजी क्षेत्र को 'वर्क-फ्रॉम-होम' अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया गया है। • सार्वजनिक क्षेत्र में गैर-जरूरी यात्राओं पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगा दिया गया है। 6. वियतनाम • निजी संस्थानों से 'वर्क-फ्रॉम-होम' देने का आग्रह किया गया है। • सार्वजनिक परिवहन, साइकिलिंग और कारपूलिंग के उपयोग को प्रोत्साहित किया गया है।
7. म्यांमार • ईंधन की खपत कम करने के उद्देश्य से निजी वाहनों के परिचालन हेतु ऑड-इवन नीति लागू की गई है, जिसके तहत वाहन के पंजीकरण नंबर के आधार पर वैकल्पिक दिनों में ही सड़क पर निकलने की अनुमति होगी। • ईंधन की भारी कमी के चलते स्थिति गंभीर हो गई है, जिसके परिणामस्वरूप कई स्थानीय पेट्रोल स्टेशनों को परिचालन बंद करने के लिए मजबूर होना पड़ा है। 8. कंबोडिया • ईंधन की कीमतों पर संघर्ष के संभावित प्रभावों को लेकर अनिश्चितता के चलते, मार्च के मध्य तक देश के लगभग 6,300 पेट्रोल पंपों में से एक-तिहाई बंद हो गए। 9. लाओस • लोक सेवकों के लिए वर्क-फ्रॉम-होम की व्यवस्था अनिवार्य कर दी गई है। • वर्चुअल मीटिंग्स और इलेक्ट्रिक वाहनों के उपयोग को बढ़ावा दिया जा रहा है। • पेट्रोल पंपों के व्यापक रूप से बंद होने के बाद, आवागमन को कम करने और आपूर्ति श्रृंखला पर दबाव घटाने के लिए रोटेशनल वर्क शिफ्ट की शुरुआत की गई है। II. अफ्रीका 1. मिस्र • 28 मार्च से, शॉपिंग मॉल, रेस्तरां और खुदरा दुकानों को कार्यदिवसों पर रात 9 बजे तक बंद करने का निर्देश दिया गया है। सरकारी भवनों को शाम 6 बजे तक बंद किया जाएगा। • बिजली की खपत कम करने के लिए रोशनी वाले विज्ञापनों(बिलबोर्ड) को बंद कर दिया गया है। 2. केन्या • ईंधन की राशनिंग (नियंत्रित वितरण) और निर्यात पर प्रभावी प्रतिबंध की घोषणा की गई है।
ऊर्जा नियामक ने चेतावनी दी है कि इन कड़े प्रतिबंधों के बावजूद, मौजूद स्टॉक केवल अप्रैल तक ही चल पाएगा। 3. दक्षिण अफ्रीका • खनिज एवं पेट्रोलियम संसाधन विभाग ने स्थिति को नियंत्रित करने के लिए औद्योगिक स्तर पर कोटा प्रणाली लागू कर दी है। इन उपायों का मुख्य लक्ष्य बाजार में ईंधन के समान वितरण को बनाए रखना और घबराहट में की जाने वाली खरीदारी को रोकना है। III. ओशिनिया 1. न्यूज़ीलैंड • सरकार 1979 के दौर की "कार-लेस डे" नीति को फिर से शुरू करने पर विचार कर रही है, जिसके तहत वाहन चालकों को सप्ताह में एक दिन नो-ड्राइविंग डे निर्धारित करना होगा। • ईंधन भंडार की निगरानी के लिए "एम्बर अलर्ट" प्रोटोकॉल सक्रिय कर दिए गए हैं और भंडार से 15.7 मिलियन बैरल तेल जारी किया गया है। • जेट ईंधन की आसमान छूती कीमतों के कारण एयर न्यूजीलैंड की लगभग 1,100 उड़ानें रद्द कर दी गई हैं, जिससे 44,000 यात्री प्रभावित हुए हैं।
IV. यूरोप 1. स्लोवाकिया • स्लोवाकिया सरकार ने डीजल खरीद की सीमा तय कर दी है। इस कदम का मुख्य उद्देश्य जमाखोरी पर अंकुश लगाना और बाजार में डीजल की किल्लत को पैदा होने से रोकना है। 2. स्लोवेनिया • स्लोवेनिया की दूसरी सबसे बड़ी ईंधन खुदरा विक्रेता कंपनी, एमओएल स्लोवेनिया ने अपने स्टेशनों पर ईंधन की राशनिंग लागू कर दी है। इसके तहत कारों के लिए 30 लीटर और ट्रकों के लिए 200 लीटर की सीमा तय की गई है, ताकि भारी मांग के बीच स्थानीय आपूर्ति सुनिश्चित की जा सके और किल्लत को रोका जा सके।