आगरा: जुआ खेलने का विरोध करने पर युवक पर दो बार जानलेवा हमला
आगरा के शमशाबाद में जुआ खेलने का विरोध करने पर युवक पर दो बार हमला। पीड़ित ने सीसीटीवी सबूत होने के बावजूद पुलिस पर कार्रवाई न करने का लगाया आरोप।
आगरा के थाना शमशाबाद क्षेत्र के गांव मुक्तिपुरा में जुआ खेलने का विरोध करना एक स्थानीय युवक के लिए मुसीबत का सबब बन गया है। मामला उस समय गंभीर हो गया जब पीड़ित सौदान सिंह को मात्र विरोध करने के कारण दो बार शारीरिक हमले का सामना करना पड़ा। इस घटना ने क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था और स्थानीय पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
घटना की शुरुआत 25 अक्टूबर की रात करीब 8 बजे हुई, जब सौदान सिंह ने अपने खेत में कुछ लोगों को जुआ खेलते हुए देखा। पीड़ित ने जब उन्हें वहां से जाने के लिए कहा, तो आरोप है कि जीत, चरण, केशव और अर्जुन नामक व्यक्तियों ने उनके साथ अभद्र व्यवहार किया और मारपीट की। घटना की सूचना डायल 112 पर दी गई, जिसके बाद पुलिस ने दोनों पक्षों को थाने बुलाकर केवल धारा 151 के तहत मामूली कार्रवाई की। स्थानीय लोगों का कहना है कि यह कार्रवाई आरोपियों के हौसले पस्त करने के लिए नाकाफी थी।
ट्रैक्टर रोककर फिर हुआ हमला
अगले ही दिन, 26 अक्टूबर को विवाद ने एक बार फिर हिंसक रूप ले लिया। सौदान सिंह जब अपना ट्रैक्टर लेकर शमशाबाद की ओर जा रहे थे, तब आरोपियों ने रास्ते में उन्हें घेर लिया। ट्रैक्टर को जबरन रुकवाकर उन पर फिर से हमला किया गया। अपनी जान बचाने के लिए पीड़ित वहां से भागने पर मजबूर हो गया और पास ही स्थित एक रेस्टोरेंट में शरण ली। गनीमत रही कि रेस्टोरेंट के अंदर घुसने से उनकी जान बच सकी। इस पूरी घटना के वहां मौजूद सीसीटीवी कैमरों में कैद होने का दावा किया जा रहा है, जो मामले की गंभीरता को साबित करने के लिए एक अहम सबूत हो सकता है।
प्रशासन की चुप्पी पर सवाल
पीड़ित का आरोप है कि घटना के बाद उन्होंने 27 अक्टूबर को थाना प्रभारी को लिखित शिकायत दी, जिसमें आरोपियों के खिलाफ सख्त मुकदमा दर्ज करने और सीसीटीवी फुटेज की जांच करने की मांग की गई। इसके अलावा, उन्होंने अपने और अपने परिवार की सुरक्षा के लिए भी गुहार लगाई है। पीड़ित का कहना है कि वह न्याय पाने के लिए लगातार प्रशासन के चक्कर काट रहे हैं, लेकिन उनकी सुनवाई नहीं हो रही है।
- मुख्य मांगें:
- आरोपियों के खिलाफ तत्काल एफआईआर दर्ज की जाए।
- रेस्टोरेंट में लगे सीसीटीवी फुटेज को फॉरेंसिक जांच के लिए जब्त किया जाए।
- पीड़ित परिवार को सुरक्षा मुहैया कराई जाए।
फिलहाल, पूरे मामले में पुलिस की ओर से कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है। स्थानीय निवासी अब यह जानना चाहते हैं कि यदि सीसीटीवी साक्ष्य मौजूद हैं, तो पुलिस आरोपियों पर कार्रवाई करने में देरी क्यों कर रही है। यह मामला न केवल एक व्यक्तिगत विवाद है, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में जुए जैसी सामाजिक कुरीतियों के खिलाफ आवाज उठाने वाले नागरिकों की सुरक्षा का भी प्रश्न है। पीड़ित को अब भी न्याय की प्रतीक्षा है और प्रशासन की ओर से की जाने वाली अगली कार्रवाई पर सबकी निगाहें टिकी हुई हैं।
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