डोनाल्ड ट्रंप का 'ग्राहम अधिनियम' पर बड़ा फैसला, रूस को मिली प्रतिबंधों से छूट
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ग्राहम अधिनियम के तहत रूस को प्रतिबंधों से छूट दी है। इस फैसले पर रिपब्लिकन और डेमोक्रेट सांसदों ने तीखी प्रतिक्रिया दी है।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में 'ग्राहम अधिनियम' के तहत रूस को व्यापक प्रतिबंधों से छूट देने का एक बड़ा निर्णय लिया है। इस फैसले के बाद दुनिया भर में आलोचनाओं का दौर शुरू हो गया है। ट्रंप ने इस कदम को 'अच्छा फैसला' करार देते हुए कहा कि लोगों को अभी इसकी दूरगामी सार्थकता का पूरी तरह से अंदाजा नहीं है। मियामी स्थित अपने मार-ए-लागो रिसॉर्ट में पत्रकारों से बात करते हुए उन्होंने विश्वास जताया कि आने वाले समय में यह निर्णय देश और दुनिया के लिए सकारात्मक साबित होगा।
इस आदेश की सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि इसके तहत रूस से तेल और गैस का आयात करने वाले दुनिया के पांच सबसे बड़े देशों, जिनमें चीन और भारत भी शामिल हैं, को 100 प्रतिशत शुल्क लगाने के प्रावधान से पूरी तरह मुक्त रखा गया है। व्हाइट हाउस के अनुसार, ये छूट तब तक प्रभावी रहेंगी जब तक कि राष्ट्रपति या विदेश मंत्री, वित्त मंत्री और व्यापार प्रतिनिधियों के परामर्श के बाद कोई नया ठोस निर्णय न ले लें।
राजनीतिक गलियारों में विरोध की लहर
ट्रंप के इस फैसले का अमेरिकी कांग्रेस में कड़ा विरोध हो रहा है। रिपब्लिकन और डेमोक्रेटिक दोनों दलों के सांसदों ने इसे कानून के मूल उद्देश्य के खिलाफ बताया है। पिछले महीने भारी बहुमत से पारित 'लिंडसे ओ ग्राहम सैंक्शनिंग रशिया एंड ईरान एक्ट' का मुख्य उद्देश्य रूस पर आर्थिक दबाव बनाना था। दक्षिण कैरोलाइना की सांसद डार्लिन ग्राहम ने अपने दिवंगत भाई लिंडसे ग्राहम द्वारा लाए गए इस कानून को कमजोर करने पर नाराजगी जताई। उन्होंने स्पष्ट कहा कि पुतिन और रूस पर भरोसा करना एक बड़ी भूल हो सकती है, और उन्हें युद्ध समाप्त करने के लिए रूस पर दबाव बनाए रखने की आवश्यकता थी।
'तानाशाह के सामने झुकने' के आरोप
कानून के उल्लंघन को लेकर रिपब्लिकन सांसद थॉम टिलिस ने ट्रंप प्रशासन की कड़ी आलोचना की है। उन्होंने सोशल मीडिया पर इस फैसले को 'अत्यंत गैर-जिम्मेदाराना' बताते हुए कहा कि सीनेट में जिसे भारी समर्थन मिला था, उसे दरकिनार करना अक्षम्य है। टिलिस ने आरोप लगाया कि ट्रंप प्रशासन रूसी तानाशाह के सामने झुक रहा है। उन्होंने तर्क दिया कि यदि ऊर्जा की कीमतें कम करना प्राथमिकता है, तो सरकार को ईरान के साथ चल रहे तनाव को सुलझाने पर ध्यान देना चाहिए, न कि पुतिन को एहसान के तौर पर राहत देनी चाहिए।
कानून की विरासत पर सवाल
टेक्सास के सीनेटर जॉन कॉर्निन ने दिवंगत लिंडसे ग्राहम की याद दिलाते हुए कहा कि यदि वे आज जीवित होते, तो इस फैसले से बेहद नाराज होते। ग्राहम ने अपनी मृत्यु से पहले इस विधेयक को पारित कराने के लिए अथक प्रयास किए थे। अब इस अधिनियम के क्रियान्वयन में दी गई ढील ने अमेरिकी विदेश नीति के भविष्य को लेकर बहस छेड़ दी है।
आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या ट्रंप प्रशासन इस छूट को लंबे समय तक जारी रखता है या घरेलू दबाव के चलते उन्हें अपनी रणनीति में बदलाव करना पड़ता है। फिलहाल, यह स्पष्ट है कि वैश्विक ऊर्जा बाजार और भू-राजनीतिक समीकरणों पर इस निर्णय का गहरा असर पड़ने वाला है।
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