नफरत के दौर में कबीर की वाणी ही मानवता की सबसे बड़ी आवाज़"

Jun 30, 2026 - 08:14
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नफरत के दौर में कबीर की वाणी ही मानवता की सबसे बड़ी आवाज़"

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"नफरत के दौर में कबीर की वाणी ही मानवता की सबसे बड़ी आवाज़"

कायमगंज/फर्रुखाबाद। क्रांतिकारी संत कवि कबीरदास की जयंती पर राष्ट्रीय प्रगतिशील फोरम द्वारा कृष्णा प्रेस परिसर, सड़वाड़ा में आयोजित विचार गोष्ठी में वक्ताओं ने कबीर के विचारों को आज के समय की सबसे बड़ी आवश्यकता बताते हुए उनके साहित्य और सामाजिक चेतना पर विस्तार से प्रकाश डाला। मुख्य वक्ता साहित्यकार प्रो. रामबाबू मिश्र 'रत्नेश' ने कहा कि संत कबीर शब्दों के ऐसे निर्भीक जुलाहे थे जिन्होंने समाज में फैले पाखंड, जातिगत भेदभाव और कुरीतियों पर बिना किसी भय के प्रहार किया। उन्होंने कहा कि कबीर को अशिक्षित बताना उनके विराट ज्ञान और चिंतन का अपमान है।

उनकी उलटबांसियों का रहस्य आज भी बड़े-बड़े विद्वानों के लिए चुनौती बना हुआ है। प्रधानाचार्य योगेश तिवारी ने कहा कि हिंसा, उन्माद और नफरत से भरे वर्तमान दौर में मानवता को बचाने के लिए संत कबीर जैसे स्पष्टवादी और कर्मयोगी संत की शिक्षाओं को अपनाना समय की सबसे बड़ी जरूरत है। गीतकार पवन बाथम ने कहा कि कबीर की साखियां और सबद हिंदी साहित्य की अमूल्य धरोहर हैं। उनके पद आज भी फकीरों से लेकर विश्व के प्रसिद्ध गायकों तक की आवाज़ में गूंजते हैं और पीढ़ियों को सत्य, प्रेम तथा मानवता का संदेश दे रहे हैं। प्रधानाचार्य शिवकांत शुक्ला एवं अमरनाथ शुक्ला ने कहा कि कबीर की वाणी मनुष्य की चेतना को झकझोर कर उसे सही मार्ग पर चलने की प्रेरणा देती है। वीएस तिवारी ने तुलसी, सूर और कबीर को मानवीय संवेदनाओं का अमर गायक बताते हुए कहा कि उनकी सधुक्कड़ी भाषा सीधे जनमानस के हृदय तक पहुंचती है। युवा कवि अनुपम मिश्रा ने कहा कि निर्गुण संत कबीर ने प्रेम को मानव जीवन का सर्वोच्च मूल्य माना। डॉ. सुनीत सिद्धार्थ ने संत कबीर और संत रविदास को भारत की आत्मा का प्रकाश बताते हुए कहा कि दोनों संतों ने समानता और मानवता का संदेश दिया। छात्र कवि यशवर्धन ने अपनी कविता का पाठ करते हुए कहा— "होंगे लेखक, समीक्षक, कवि, कोविद मतिधीर, नहीं किसी साहित्य में तुलसी, सूर, कबीर।"

कार्यक्रम में शिव कुमार दुबे, हंसा मिश्रा, शिक्षिका रेखा तिवारी सहित अनेक साहित्यप्रेमी उपस्थित रहे। गोष्ठी की अध्यक्षता पूर्व प्रधानाचार्य अहिवरन सिंह गौर ने की। उन्होंने कहा कि संत राष्ट्र, धर्म और संस्कृति के सशक्त प्रहरी होते हैं। अंत में फतेहगढ़ बार एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष अधिवक्ता जवाहर सिंह गंगवार ने कहा कि संत कबीर किसी एक धर्म के नहीं, बल्कि पूरे विश्व मानव समाज के आदर्श संत हैं। उनकी वाणी आज भी मानव चेतना को जागृत कर विश्व बंधुत्व और सर्वधर्म समभाव का संदेश देती है।

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SuragBureau

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