फतेहगढ़ रेलवे रोड पर अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई पर बवाल, दुकानदारों ने लगाए विरोध के पोस्टर
फतेहगढ़ रेलवे रोड पर अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई पर बवाल, दुकानदारों ने लगाए विरोध के पोस्टर
फर्रुखाबाद/फतेहगढ़ रेलवे स्टेशन रोड पर प्रस्तावित अतिक्रमण हटाओ अभियान को लेकर विवाद लगातार गहराता जा रहा है। सरकारी भूमि पर बने भवनों को हटाने के लिए लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) और राजस्व विभाग द्वारा जारी अंतिम नोटिस के बाद प्रभावित दुकानदार खुलकर विरोध में उतर आए हैं। दुकानदारों ने अपनी दुकानों के बाहर विरोध स्वरूप पोस्टर लगा दिए हैं और आरोप लगाया है कि एक समाजवादी पार्टी के नेता की शिकायत पर अधिकारियों ने उन्हें निशाना बनाया है।
बताया गया कि पीडब्ल्यूडी ने करीब 18 दुकानदारों को 29 अप्रैल को अंतिम नोटिस जारी किया था। इसके बाद शुक्रवार को नगर पालिका की जेसीबी और ट्रैक्टर-ट्रॉली अतिक्रमण हटाने के लिए मौके पर पहुंची, लेकिन व्यापारियों के तीव्र विरोध और जिलाधिकारी से शिकायत के बाद कार्रवाई को फिलहाल रोक दिया गया। प्रशासन ने सभी पक्षों की बात सुनने के लिए 29 जून को पीडब्ल्यूडी के अधिशासी अभियंता कार्यालय में सुनवाई निर्धारित की, जहां प्रभावित पक्षों ने अपने-अपने दस्तावेज और दावे प्रस्तुत किए। दुकानदारों का कहना है कि वे पिछले लगभग 50 वर्षों से इन भवनों में रहकर व्यापार कर रहे हैं और उनके पास स्वामित्व से जुड़े दस्तावेज भी मौजूद हैं। कार्रवाई की आशंका के चलते कई दुकानदारों ने अपने प्रतिष्ठानों से टीनशेड और अन्य सामान हटाना भी शुरू कर दिया है। व्यापारी विजेंद्र गुप्ता ने आरोप लगाया कि एक सपा नेता के दबाव में अधिकारियों ने नोटिस जारी किए हैं। उनका कहना है कि उनका भवन स्वीकृत नक्शे के अनुसार बना है, फिर भी उसे अतिक्रमण बताकर कार्रवाई की जा रही है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि कुछ लोगों के निजी स्वार्थ के कारण ईमानदार व्यापारियों को परेशान किया जा रहा है। वहीं रूबी गुप्ता ने कहा कि उनका मकान कई दशक पुराना है और परिवार लंबे समय से वहीं निवास कर रहा है। उन्होंने दावा किया कि उनके पास मकान का बैनामा भी है, लेकिन पिछले छह महीनों से लगातार अतिक्रमण के नोटिस दिए जा रहे हैं। उनका आरोप है कि निजी रंजिश का खामियाजा गरीब और छोटे व्यापारियों को भुगतना पड़ रहा है। मामले की जानकारी मिलने पर उत्तर प्रदेश युवा उद्योग व्यापार मंडल के प्रदेश उपाध्यक्ष अंकुर श्रीवास्तव भी मौके पर पहुंचे। उन्होंने प्रभावित व्यापारियों से बातचीत कर उनकी समस्याएं सुनीं और भरोसा दिलाया कि छोटे व्यापारियों के साथ किसी प्रकार का अन्याय या उत्पीड़न बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा कि यदि व्यापारियों के पास वैध दस्तावेज हैं तो उनकी बात प्रशासन के समक्ष मजबूती से रखी जाएगी। फिलहाल पूरे मामले पर प्रशासन की अंतिम सुनवाई और निर्णय का इंतजार किया जा रहा है। रेलवे रोड के व्यापारियों में कार्रवाई को लेकर असमंजस की स्थिति बनी हुई है, जबकि इस मुद्दे ने अब राजनीतिक और सामाजिक दोनों स्तरों पर चर्चा तेज कर दी है।
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