कुष्ठ रोगी खोजी अभियान के लिए स्वास्थ्यकर्मियों को दिया गया प्रशिक्षण

Aug 30, 2024 - 14:15
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कुष्ठ रोगी खोजी अभियान के लिए स्वास्थ्यकर्मियों को दिया गया प्रशिक्षण

कुष्ठ रोगी खोजी अभियान के लिए स्वास्थ्यकर्मियों को दिया गया प्रशिक्षण

 - कुष्ठ रोग उन्मूलन के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन

 - दो सितम्बर से खोजे जाएंगे कुष्ठ रोगी, घर घर जाएगी स्वास्थ्य विभाग की टीम

 - दो वर्ष से अधिक उम्र के लोगों की लक्षण के आधार पर उनके घर पर ही होगी स्क्रीनिंग

 - कुष्ठ रोग के खिलाफ अभियान में सामुदायिक सहयोग की अपील

 आगरा । जनपद आगरा में राष्ट्रीय कुष्ठ रोग उन्मूलन कार्यक्रम के अंतर्गत 2 से 15 सितंबर तक कुष्ठ रोगी खोजी अभियान चलाया जाएगा। अभियान के सफल क्रियान्वयन के लिए गुरुवार को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र शमशाबाद, बिचपुरी, खंदौली, सैंया और शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र लोहा मंडी प्रथम में प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में स्वास्थ्यकर्मियों को कुष्ठ रोग की पहचान, उपचार और रोकथाम के बारे में प्रशिक्षित किया गया।

इस अभियान के दौरान स्वास्थ्य विभाग की टीम घर-घर जाकर कुष्ठ रोग की जांच करेगी और आवश्यक उपचार प्रदान करने में सहयोग करेगी। आयोजित प्रशिक्षण कार्यक्रम में नॉन मेडिकल असिस्टेंट उमेश चंद्र शर्मा, नॉन मेडिकल असिस्टेंट राकेश बाबू , पैरामेडिकल वर्कर अरविंद उपाध्याय, नॉन मेडिकल सुपरवाइजर मनीष कुमार यादव द्वारा स्वास्थ्यकर्मियों और सुपरवाइजर को कुष्ठ रोग और कुष्ठ रोग के इलाज के संदर्भ में प्रशिक्षित किया गया ।

प्रशिक्षण कार्यक्रम में प्रतिभाग करने आई ग्राम मिधकुर की आशा कार्यकर्ता पिंकी शर्मा बताती है कि प्रशिक्षण में कुष्ठ रोग के शुरुआती लक्षणों में त्वचा पर चमड़े के रंग से हल्के या गहरे रंग के दाग-धब्बे हो सकते हैं, जो सुन्न होते हैं और इनमें दर्द नहीं होता है। अगर किसी के शरीर पर ऐसे कोई दाग-धब्बे दिखाई दें तो तुरंत स्वास्थ्य केंद्र पर भेजें और जांच करने की सलाह दें । कुष्ठ रोग का इलाज संभव है, लेकिन समय पर इलाज बहुत जरूरी है।

अगर इलाज में देरी होती है तो यह रोग गंभीर रूप ले सकता है और त्वचा, नसों और अंगों को स्थायी नुकसान पहुंचा सकता है। मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. अरुण श्रीवास्तव द्वारा जनमानस से कुष्ठ रोग के खिलाफ अभियान में सामुदायिक सहयोग की अपील की है। अभियान के दौरान स्वास्थ्य विभाग की टीम आपके घर आए तो टीम को लक्षणों के आधार पर सही जानकारी प्राप्त कराकर अपना सहयोग सुनिश्चित करें। यह अभियान कुष्ठ रोग के प्रति जागरूकता फैलाने और इसके निदान एवं उपचार में मदद करने के लिए चलाया जा रहा है। स्वास्थ्य विभाग की टीम घर-घर जाकर कुष्ठ रोगियों की पहचान करेगी और उन्हें आवश्यक उपचार प्रदान करेगी।

इस अभियान में सामुदायिक सहयोग की आवश्यकता है ताकि कुष्ठ रोग के प्रति जागरूकता बढ़े और अधिक से अधिक लोग इसके निदान एवं उपचार में मदद कर सकें। सामुदायिक सहयोग से हम कुष्ठ रोग से मुक्त होने में सफल हो सकते हैं। जिला कुष्ठ रोग अधिकारी डॉ. सीएल यादव ने बताया कि इस बार यह अभियान प्रदेश के 47 जनपदों के 550 विकास खंडों में चलना है। आगरा जिले के 15 ब्लॉक और शहरी क्षेत्र में अभियान चलेगा। ग्रामीण क्षेत्र में आशा कार्यकर्ता और एक पुरुष सदस्य की टीम, जबकि शहरी क्षेत्र में आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और एक पुरुष सदस्य की टीम लक्षणयुक्त व्यक्तियों की स्क्रीनिंग करेंगी।

इसके बाद चयनित किये गये संभावित कुष्ठ रोगियों को नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र पर संदर्भन पर्ची के साथ रेफर किया जाएगा। यह अभियान 14 दिन चलेगा। इसे पल्स पोलियो अभियान की भांति चलाया जाना है। दो वर्ष से अधिक उम्र के लोगों की लक्षण के आधार पर उनके घर पर ही स्क्रीनिंग होगी। त्वचा रोग विशेषज्ञ डॉ. ध्रुव गोपाल ने बताया कि अगर शरीर पर चमड़ी के रंग से हल्का कोई भी सुन्न दाग धब्बा हो तो कुष्ठ की जांच अवश्य करानी चाहिए । हल्के रंग के व्यक्ति की त्वचा में गहरे और लाल रंग के भी धब्बे हो सकते हैं।

हाथ या पैरों की अस्थिरता या झुनझुनी, हाथ पैर व पलकों में कमजोरी, नसों में दर्द, चेहरे या कान में सूजन अथवा घाव और हाथ या पैरों में दर्द रहित घाव भी इसके लक्षण हैं । तुरंत जांच और इलाज से मरीज ठीक हो जाता है और सामान्य जीवन जी सकता है। इसके विपरीत देरी पर कुष्ठ दिव्यांगता का रूप ले सकता है। ने बताया कि कुष्ठ सुन्न दाग धब्बों की संख्या जब पांच या पांच से कम होती है और कोई नस प्रभावित नहीं होती या केवल एक नस प्रभावित होती है तो मरीज को पासी बेसिलाई (पीबी) कुष्ठ रोगी कहते हैं जो छह माह के इलाज में ठीक हो जाता है ।

अगर सुन्न दाग धब्बों की संख्या छह या छह से अधिक हो और दो या दो से अधिक नसें प्रभावित हों तो ऐसे रोगी को मल्टी बेसिलाई (एमबी) कुष्ठ रोगी कहते हैं और इनका इलाज होने पर साल भर का समय लगता है। कुष्ठ रोगी को छूने और हाथ मिलाने से इस रोग का प्रसार नहीं होता। रोगी से अधिक समय तक अति निकट संपर्क में रहने पर उसके ड्रॉपलेट्स के जरिये ही बीमारी का संक्रमण हो सकता है । प्रस्तावित अभियान पर एक नजर लक्षित आबादी= 51.15 लाख कुल टीम= 4057 कुल पर्यवेक्षक= 841

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