फर्रुखाबाद: लोहिया अस्पताल में डॉक्टरों की कमी से बिगड़ी ओपीडी व्यवस्था
फर्रुखाबाद के लोहिया अस्पताल में मरीजों की भारी भीड़ और डॉक्टरों की कमी से स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित। वायरल बुखार के बढ़ते मामलों के बीच ओपीडी में लंबा इंतजार।
फर्रुखाबाद स्थित लोहिया अस्पताल में सोमवार का दिन मरीजों के लिए काफी चुनौतीपूर्ण रहा। सुबह होते ही ओपीडी के बाहर मरीजों की लंबी कतारें देखी गईं, जिससे अस्पताल परिसर में अव्यवस्था का माहौल बना रहा। पर्चा बनवाने से लेकर आभा (ABHA) आईडी पंजीकरण तक, हर प्रक्रिया के लिए मरीजों को घंटों अपनी बारी का इंतजार करना पड़ा। अस्पताल में न केवल स्थानीय निवासी बल्कि आसपास के जिलों से आने वाले मरीजों की भी भारी संख्या रहती है, जिससे संसाधनों पर अतिरिक्त दबाव बढ़ जाता है।
डॉक्टरों की अनुपलब्धता का कारण
सोमवार को ओपीडी व्यवस्था के प्रभावित होने के पीछे मुख्य रूप से डॉक्टरों की सीमित संख्या रही। जानकारी के अनुसार, उस दिन दो डॉक्टर अवकाश पर थे। इसके अतिरिक्त, ईएनटी और हड्डी रोग विशेषज्ञों सहित कई अन्य चिकित्सकों की ड्यूटी विशेष दिव्यांग शिविर में लगा दी गई थी। चिकित्सकों की इस कमी का सीधा असर ओपीडी के कामकाज पर पड़ा। जब विशेषज्ञ डॉक्टर अन्य कार्यों में व्यस्त होते हैं, तो सामान्य मरीजों के लिए उपलब्ध डॉक्टरों पर काम का बोझ अचानक बढ़ जाता है, जिसका खामियाजा मरीजों को लंबी प्रतीक्षा के रूप में भुगतना पड़ता है।
बढ़ते वायरल बुखार के मामले
वर्तमान में बदलते मौसम के कारण अस्पताल में मरीजों की संख्या में तेजी से इजाफा हुआ है। मुख्य रूप से वायरल बुखार, सर्दी, खांसी और जुकाम के मरीज बड़ी संख्या में उपचार के लिए पहुंच रहे हैं। डॉ. अभय श्रीवास्तव ने स्थिति पर प्रकाश डालते हुए बताया कि वर्तमान में ओपीडी में आने वाले प्रत्येक 100 मरीजों में से लगभग 70 मरीज वायरल बुखार से ग्रसित हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि मौसम में हो रहे बदलाव के कारण संक्रमण फैलने का खतरा अधिक रहता है।
डॉक्टरों द्वारा दी गई प्रमुख सावधानियां निम्नलिखित हैं:
- स्वच्छता का ध्यान रखें: अपने हाथों को बार-बार साबुन से धोएं और आसपास साफ-सफाई बनाए रखें।
- खान-पान में सतर्कता: ताजा और सुपाच्य भोजन का सेवन करें।
- समय पर परामर्श: यदि बुखार, बदन दर्द या खांसी जैसे लक्षण महसूस हों, तो स्वयं उपचार करने के बजाय तुरंत चिकित्सकीय सलाह लें।
प्रशासनिक पक्ष और चुनौतियां
इस पूरी स्थिति पर प्रतिक्रिया देते हुए सीएमएस डॉ. जगमोहन शर्मा ने कहा कि दिव्यांग शिविर का आयोजन पूर्व निर्धारित था, जिसके कारण ओपीडी की व्यवस्था में कुछ समय के लिए असंतुलन पैदा हुआ। उन्होंने आश्वासन दिया कि सभी मरीजों को उचित उपचार उपलब्ध कराने के लिए संबंधित चिकित्सकों और कर्मचारियों को आवश्यक निर्देश दे दिए गए हैं। हालांकि, यह स्पष्ट है कि नियमित रूप से आयोजित होने वाले शिविरों और दैनिक ओपीडी के बीच तालमेल बिठाना अस्पताल प्रशासन के लिए एक बड़ी चुनौती बना हुआ है।
अस्पताल की कार्यप्रणाली में सुधार की आवश्यकता को देखते हुए स्थानीय लोगों ने मांग की है कि ओपीडी के समय डॉक्टरों की उपलब्धता सुनिश्चित की जाए ताकि दूर-दराज से आने वाले मरीजों को परेशानी का सामना न करना पड़े। सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों पर निर्भर रहने वाले गरीब और मध्यम वर्गीय परिवारों के लिए सुचारु स्वास्थ्य सेवा किसी जीवनदान से कम नहीं है। उम्मीद है कि भविष्य में प्रशासन इस तरह की अव्यवस्था को रोकने के लिए ठोस कदम उठाएगा ताकि मरीजों को समय पर इलाज मिल सके।
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