एटा लोक अदालत का नया कीर्तिमान: 53 हजार से अधिक वादों का निस्तारण
एटा में आयोजित राष्ट्रीय लोक अदालत में 53 हजार से अधिक वादों का सफल निस्तारण कर नया रिकॉर्ड बनाया गया। जानें इस ऐतिहासिक उपलब्धि के मुख्य विवरण।
राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण, नई दिल्ली तथा उ०प्र० राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, लखनऊ के दिशा-निर्देशों के अनुपालन में, दिनांक 12 सितंबर 2026 को जनपद एटा में राष्ट्रीय लोक अदालत का भव्य आयोजन किया गया। माननीय जनपद न्यायाधीश राकेश धर दुबे की अध्यक्षता में दीवानी न्यायालय एटा, ग्राम न्यायालय अलीगंज, कलेक्ट्रेट और समस्त तहसील परिसरों में आयोजित इस कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्ज्वलन और सरस्वती वंदना के साथ हुआ।
इस लोक अदालत में लगभग 1,21,000 वाद सूचीबद्ध किए गए थे, जिनमें से 53,000 से अधिक वादों का त्वरित निस्तारण किया गया। यह संख्या जनपद के इतिहास में अब तक की सर्वाधिक है, जो एक बड़ी न्यायिक उपलब्धि मानी जा रही है। आयोजन के दौरान 'एक जिला एक उत्पाद' के तहत विभिन्न स्टॉल लगाए गए थे, जिनमें जलेसर के पीतल के घंटों और निशुल्क चिकित्सा शिविर ने वादियों का विशेष ध्यान आकर्षित किया।
विभिन्न न्यायालयों द्वारा महत्वपूर्ण उपलब्धियाँ
लोक अदालत के दौरान विभिन्न न्यायिक पीठों ने आपसी सुलह-समझौते के आधार पर मामलों को निपटाया:
- मोटर दुर्घटना प्रतिकर अधिकरण: कुल 146 वादों का निस्तारण करते हुए 10,72,04,293 रुपये की क्षतिपूर्ति राशि प्रदान की गई।
- परिवार न्यायालय: आपसी सहमति से 61 पारिवारिक मामलों का समाधान किया गया।
- राजस्व एवं चकबन्दी न्यायालय: इन न्यायालयों द्वारा 44,238 लम्बित और प्री-लिटीगेशन वादों का निस्तारण किया गया।
- बैंक ऋण मामले: बैंकों द्वारा 669 मामलों का निपटारा किया गया, जिसमें मौके पर 3,52,91,000 रुपये की ऋण वसूली सुनिश्चित हुई।
इसके अतिरिक्त, विशेष न्यायाधीश (ई०सी० एक्ट), पॉक्सो कोर्ट, गैंगेस्टर कोर्ट और मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालतों ने भी बड़ी संख्या में लंबित वादों का निपटारा किया। विशेष न्यायाधीश (ई०सी० एक्ट) ने 459 वाद, जबकि मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट ने 2,652 मामलों में सुगमता से न्याय प्रदान किया। ग्राम न्यायालय अलीगंज द्वारा भी 630 वादों का निस्तारण कर 41,780 रुपये का जुर्माना वसूला गया।
न्यायिक अधिकारियों की सक्रिय भागीदारी
इस ऐतिहासिक आयोजन में अहमद उल्लाह खाँ (पीठासीन अधिकारी, एम०ए०सी०टी०), गोपाल उपाध्याय (प्रधान न्यायाधीश परिवार न्यायालय), तथा दिनेश कुमार शर्मा-III (अध्यक्ष, स्थायी लोक अदालत) सहित जिले के समस्त न्यायिक अधिकारी, कर्मचारीगण और सुरक्षाकर्मियों ने सक्रिय भूमिका निभाई। नोडल अधिकारी कमालुद्दीन और अपर जिला जज के नेतृत्व में प्रशासनिक टीम ने समन्वय का कार्य किया।
एटा जनपद में इस लोक अदालत की सफलता ने न केवल लंबित मुकदमों के बोझ को कम किया है, बल्कि आम नागरिकों के लिए त्वरित न्याय की सुलभता को भी सिद्ध किया है। बड़ी संख्या में मामलों का निस्तारण होने से वादियों को वर्षों से चल रही कानूनी प्रक्रियाओं से राहत मिली है, जो जिले के लिए एक गौरवपूर्ण क्षण है।
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